PM Modi In Meerut: 2 फरवरी 2014 को नरेंद्र मोदी ने जब मेरठ वालों को सुनाया था कमल और रोटी का किस्सा
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PM Modi In Meerut: 2 फरवरी 2014 को नरेंद्र मोदी ने जब मेरठ वालों को सुनाया था कमल और रोटी का किस्सा

PM Narendra Modi's Meerut Rally: दस साल पहले 2 फरवरी 2014 को चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ वालों को कमल और रोटी का किस्सा सुनाया था. दरअसल, इसके बहाने उन्होंने देश की आजादी की पहली लड़ाई 1857 की कहानी को बताया था.

 PM Modi In Meerut: 2 फरवरी 2014 को नरेंद्र मोदी ने जब मेरठ वालों को सुनाया था कमल और रोटी का किस्सा

Lok Sabha Chunav News: प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए उत्तर प्रदेश के मेरठ से चुनाव प्रचार अभियान का शंखनाद किया. पीएम मोदी ने साल 1857 में मेरठ में देश की आजादी की पहली लड़ाई की शुरुआत का जिक्र किया. दस साल पहले लोकसभा चुनाव 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने मेरठ में इस बात पर पूरा जोर दिया था.

मेरठ वालों को सुनाया कमल और रोटी का किस्सा 

लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा और एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने  देश भर में तूफानी गति से प्रचार अभियान को पूरा किया था. इस दौरान 2 फरवरी 2014 को उन्होंने मेरठ वालों को कमल और रोटी का किस्सा सुनाया था. दरअसल, इसके बहाने उन्होंने 1857 में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की कहानी को बताया था. 

कमल ही भाजपा का चुनाव चिन्ह, खूबसूरती से जोड़ा

मेरठ से शुरू हुई आजादी की पहली लड़ाई के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के बीच कमल और रोटी कोड के रूप में प्रचलित था. कमल ही भाजपा का चुनाव निशान है. नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इसे बेहद बारीकी से जोड़कर मेरठ वालों के सामने रखा था. आइए, किस्सा कुर्सी का में जानते हैं कि भाजपा और एनडीए की उस चुनावी रैली में तब पीएम मोदी ने क्या-क्या कहा था?

1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कमल और रोटी का संदेश

पीएम मोदी ने दस साल पहले मेरठ की रैली में कहा था कि हेलीकॉप्टर से यहां आने पर ऐसा लगा कि नीचे भगवा लहर का समुद्र है. मेरठ अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के विद्रोह की प्रेरणा की भूमि है. इतिहास गवाह है 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कमल और रोटी का संदेश फैलाया गया था. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को 150 साल से ज्यादा हो गए हैं. उन्होंने मेरठ वालों से कहा था कि 2014 में इस संदेश के साथ हमें गरीबों के लिए रोटी लाने के लिए फिर से कमल की जरूरत है. हम 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से प्रेरणा लेते हैं.

1857 को लेकर केंद्र में तत्कालीन कांग्रेस सरकार को भी जमकर घेरा

तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे पीएम मोदी ने 1857 को लेकर केंद्र में तत्कालीन कांग्रेस सरकार को भी जमकर घेरा था. उन्होंने कहा था कि 1857  के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न पूरे भारत में मनाया गया, यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, इसे एक विफलता के रूप में पेश किया गया, इसे इसका वाजिब हक नहीं दिया गया. यहां मेरठ में एक छोटा सा कार्यक्रम भी आयोजित किया है, लेकिन शायद ही लोगों की नजर इस पर पड़े, देश भर में स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन कांग्रेस और यूपीए सरकार ने उन्हें भुला दिया.

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कांग्रेस ने 100 वर्षों से आजादी की लड़ाई के बारे में अफवाह फैलाया

नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अगर लोगों को पहली बार पता चला तो आज़ादी की लड़ाई में वे कांग्रेस की हरकतों को देखेंगे और उसे दुत्कार देंगे. कांग्रेस ने पिछले 100 वर्षों से ऐसी अफवाह फैला रखी है कि कांग्रेस पार्टी ने ही देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और बलिदान दिया. वे दूसरों के बलिदान को याद नहीं रखना चाहते, इसलिए स्वतंत्रता संग्राम के 150वें जश्न के बारे में कोई नहीं जानता. मोदी ने मेरठ के लोगों से पूछा कि भाइयो-बहनो, मुझे बताओ-बंद मुट्ठी, पूरी ताकत से जोर से बोलो. क्या आप उत्तर देंगे? क्या यह हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान नहीं है? क्या यह हमारे स्वतंत्रता संग्राम का अपमान नहीं है?

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मेरठ के लोगों को तब मोदी ने दिया था चौधरी चरण सिंह का वास्ता

भाजपा के पीएम फेस नरेंद्र मोदी ने तब मेरठ चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बदलाव का आह्वान किया था. उन्होंने लोगों से भाजपा को वोट देने की अपील की. उन्होंने मेरठ को वीरों और बलिदानियों की भूमि बताने के साथ ही चौधरी चरण सिंह की भी याद दिलाई थी. रैली में खंभे पर चढे लोगों को नीचे उतरने के लिए उन्होंने कहा था कि मेरठ वाले बहुत होशियार हैं. मैं प्रार्थना कर रहा हूं कि कृपया नीचे आ जाएं. कृपया कम से कम चौधरी चरण सिंह के नाम पर तो खंभे से नीचे उतरें.

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