Ramayan Story: आखिर अंगद को क्यों सता रहा था सुग्रीव के हाथों मारे जाने का भय, जानें ये रोचक कहानी
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Ramayan Story: आखिर अंगद को क्यों सता रहा था सुग्रीव के हाथों मारे जाने का भय, जानें ये रोचक कहानी

Angad And Sugriva: सीता जी के न मिलने से अंगद काफी परेशान हो रोने लगे. खाली हाथ लौटने पर सुग्रीव के हाथों मारे जाने का भय उन्होंने सता रहा था, लेकिन जामवंत जी से अंगद का ये दुख देखा न गया.

फाइल फोटो

Dharam: सीता जी की खोज करते हुए वानर जंगलों से निकल रहे थे कि उन्हें अचानक प्यास लगी और वे व्याकुल हो गए, स्थिति ऐसी हो गई की पानी न मिला तो सब प्यासे ही मर जाएंगे. ऐसे में हनुमान जी ने एक पहाड़ की चोटी पर चढ़ कर देखा तो उन्हें कुछ दूरी पर उन्हें एक गुफा दिखी जिसके ऊपर पक्षी उड़ भी रहे हैं और अंदर भी जा रहे हैं. हनुमान जी समझ गए कि गुफा के अंदर जीवन जीने की सारी वस्तुएं हैं. वे नीचे उतरे और वानरों के साथ गुफा में प्रवेश कर गए. अंदर एक उपवन और तालाब तथा एक सुंदर सा मंदिर दिखा जिसमें एक तपोमूर्ति स्त्री बैठी थी. स्त्री को प्रणाम किया तो उन्होंने पूरी बात समझी और तालाब में स्नान कर पेड़ों में लगे तरह तरह के स्वादिष्ट फल खाने की आज्ञा दी. इसके बाद उस तपोमूर्ति स्त्री ने कहा अब वे वहां जाएंगी जहां पर श्री रघुनाथ जी हैं. तुम लोग आंखें मूंद लो और गुफा छोड़ कर बाहर जाओ. तुम लोग निराश न हो, सीता जी की खोज कर ही लोगे. इतना सुनते ही वानरों ने आंख बंद की और जब खोली तो देख कर दंग रह गए कि सारे वीर वानर समुद्र तट पर खड़े हैं.

सीता जी के न मिलने पर निराशा में अंगद दुखी हो रोने लगे 

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तपोमूर्ति स्त्री समुद्र तट में सीधे प्रभु श्री राम के पास पहुंची और उनके चरणों में मस्तक नवा कर कई तरह से विनती की तो प्रभु ने उसे अपनी अनपायनी यानी कभी खत्म न होने वाली भक्ति दी. इसके बाद तो वह स्त्री प्रसन्नचित हो कर बद्रिकाश्रम के लिए प्रस्थान कर गई. इधर वानर गण विचार कर रहे हैं कि अवधि तो बीत गई पर श्री राम का एक काम भी वे नहीं कर सके, अब सीता जी की खबर लिए बिना लौट कर क्या करेंगे. बालि पुत्र अंगद तो निराशा में रोने लगे और दोनों नेत्रों में आंसू भर कर बोले, दोनों ही प्रकार से मृत्यु है, एक तो यहां पर सीता जी की सुध नहीं मिली दूसरे वहां जाने पर वानर राज सुग्रीव मार डालेंगे, वे तो पिता जी का वध होने पर ही मुझे मार डालते किंतु श्री राम ने ही मेरी रक्षा की इसमें सुग्रीव महाराज का कोई अहसान नहीं है, अंगद बार-बार कहने लगे कि अब तो मरना तय है, कोई नहीं बचा सकता है.

जामवंत जी ने युवराज अंगद को प्रभु की महिमा समझाई 

वानर युवराज अंगद के वचन सुनने के बाद भी कोई वानर कुछ नहीं बोल पा रहा था, उन सबके नेत्रों से जल बह रहा था. सब एक क्षण के लिए सोच में मग्न हो गए फिर एक साथ बोले, हे युवराज हमलोग सीता जी को खोजे बिना वापस नहीं जाएंगे. ऐसा कह कर वे सब लवण सागर के तट पर कुशा बिछाकर बैठ गए. जामवंत जी से भी अंगद का दुख नहीं देखा गया तो उन्होंने समझाते हुए कहा, हे पुत्र श्री राम जी को सामान्य मनुष्य न समझो, उन्हें निर्गुण ब्रह्म, अजय और अजन्मा समझो. हम सब बड़े भाग्य वाले हैं जो उनकी सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है. देवता, पृथ्वी, गौ और ब्राह्मणों के लिए प्रभु अपनी इच्छा से अवतार लेते हैं. जामवंत जी ने अपने उपदेश के माध्यम से अंगद सहित सभी वानरों को बताने की कोशिश की कि यह सब प्रभु की लीला है, वे चाहते हैं इसीलिए ऐसा हो रहा है.   

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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