सात गोलियां लगने के बाद भी नहीं मानी हार, क्रैक की UPSC 2021 परीक्षा
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सात गोलियां लगने के बाद भी नहीं मानी हार, क्रैक की UPSC 2021 परीक्षा

UPSC Success Story: रिंकू साल 2008 में पीसीएस अधिकारी बने थे, जिसके बाद उन्हें समाज कल्याण अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था. इस दौरान रिंकू ने छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा किया था, जिस कारण उन्हें साल 2009 में सात गोलियां मारी गई थी. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी क्रैक करने का निर्णय लिया और इस साल की यूपीएससी परीक्षा 2021 में 683वीं रैंक हासिल कर परीक्षा पास कर डाली.  

सात गोलियां लगने के बाद भी नहीं मानी हार, क्रैक की UPSC 2021 परीक्षा

नई दिल्ली: हमारे समाज में एक कहावत बहुत मशहूर है कि "वही इंसान सबसे शानदार और जानदार है, जिसके इरादे नेक और ईमानदार है." इस कहावत को ईमानदार नौकरशाह रिंकू राही ने सच कर दिखाया है. रिंकू राही की कहानी किसी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फिल्म से कम नहीं है. रिंकू ने 100 करोड़ रुपए के छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा किया था, जिसके परिणामस्वरूप उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई थी. इतनी गोलियां लगने के बावजूद भी, रिंकू ने अपना जीवन से हार नहीं मानी और इस साल सिविल सेवा परीक्षा 2021 पास कर डाली. 

रिंकू अपनी प्राथमिक पढ़ाई करने के बाद साल 2008 में पीसीएस अधिकारी बने थे, जिसके तहत उन्हें उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था. इस दौरान रिंकू ने छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा किया था, जिस कारण उन्हें साल 2009 में सात गोलियां मारी गई थी. सात गोलियों में से तीन गोलियां उनके चेहरे पर लगी थी, जिस कारण उनके एक आंख की रोशनी चली गई थी. साथ ही उन्हें एक कान से सुनाई देना भी बंद हो गया था. इसके बावजूद अपने जिंदगी से हार ना मानते हुए और रिंकू ने इस साल यूपीएससी परीक्षा 2021 पास कर डाली. इसी के साथ रिंकू ने समाज के लिए एक मिसाल भी कायम की है.

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रिंकू के पिता शिवदान सिंह आटा चक्की में काम करते थे. उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. इसी कारण से वे अपने बेटे रिंकू को किसी कॉन्वेंट स्कूल में नहीं पढ़ा सकते थे, जिस कारण रिंकू की पढ़ाई सरकारी स्कूल से हुई. रिंकू ने अपनी प्राथमिक शिक्षा, परिषदीय स्कूल से प्राप्त की और राजकीय इंटर कॉलेज से इंटर किया था.      

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिंकू बताते हैं कि इंटर में उन्हें अच्छे मार्क्स मिले थे, जिस कारण उन्हें छात्रवृत्ति मिली थी. छात्रवृत्ति की मदद से ही उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया. इसके बाद साल 2008 में उनका पीसीएस में चयन हुआ और उन्हें यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में समाज कल्याण अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया गया.

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इसी दौरान उन्होंने विभाग में चल रहे घोटाले को उजागर किया. इस कारण माफियाओं द्वारा उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई, जिससे उनकी एक आंख की रोशनी चली गई. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी क्रैक करने का निर्णय लिया. बता दें कि रिंकू साल 2019 से हापुड़ स्थित राजकीय आईएएस पीसीएस निःशुल्क कोचिंग सेंटर के प्रभारी के रूप में कार्यरत थे. प्रभारी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और इस साल की यूपीएससी परीक्षा 2021 में 683वीं रैंक हासिल कर परीक्षा पास कर डाली.  

बता दें कि यूपीएससी में कुछ विशेष श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आयु में छूट दी जाती है, जिससे रिंकू को मदद मिली. रिंकू आज आठ साल के बच्चे के पिता हैं.

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