मां-बाप के बारे में क्या कहते थे प्रोफेट मोहम्मद, क्या वाकई 'मां के पैरों तले जन्नत है'?
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मां-बाप के बारे में क्या कहते थे प्रोफेट मोहम्मद, क्या वाकई 'मां के पैरों तले जन्नत है'?

Islam on Parents दीगर मजाहिब की तरह इस्लाम धर्म में भी किसी इंसान के लिए भगवान के बाद अगर किसी को बहुत ज्यादा अहमियत और मान- सम्मान देने की बात कही गई है, तो वो माँ -बाप है.  पैग़म्बर मुहम्मद (स.) इस बात पर बहोत जोर देते थे कि अपने वाल्देन की इज्ज़त और खिदमत करें. आइए जानते हैं इस बारे में क्या थी पैगम्बर की शिक्षा?

 

मां-बाप के बारे में क्या कहते थे प्रोफेट मोहम्मद, क्या वाकई 'मां के पैरों तले जन्नत है'?

Islam on Parents: मां-बाप दुनिया की सबसे बड़ी नेमत हैं. मां-बाप पर जितना लिखा जाए कम है. मां-बाप की कमी उन लोगों को सबसे ज्यादा खलती है, जिनके मां-बाप नहीं होते हैं. हर मजहब में मां-बाप की अहमियत के बारे में बताया गया है. उनके साथ अच्छा सुलूक करने के लिए बताया गया है. इसी तरह इस्लाम धर्म में भी अपने मां-बाप के साथ अच्छा सुलूक करने और उनकी खिदमत करने की हिदायत दी गई है.

मां-बाप की खिदमत

इस्लाम में बताया गया है कि अपने मां-बाप की खूब खिदमत करो, क्योंकि उन्होंने आपकी खिदमत तब की जब आप अपने आप से हिल भी नहीं सकते थे. यह माना जाता है कि अगर आप मां-बाप की खिदमत करते हैं, तो आपको अल्लाह ताला जन्नत नसीब करेगा. हदीस मुस्लिम के मुताबिक "हजरत अबू हुरैरा रजि. ने बताया है कि प्रोफेट मोहम्मद स. ने फरमाया; "वह आदमी रुसवा हो." यह लाइन प्रोफेट मोहम्मद स. ने तीन बार दोहराई. लोगों ने पूछा; "ऐ अल्लाह के रसूल. यह बद्दुआ आप किसे दे रहे हैं?" प्रोफेट मोहम्मद स. ने फरमाया; "यह बद्दुआ उस शख्स के लिए है, जिसने अपने मां-बाप में से दोनों को या उसमें से किसी एक को उनके बुढ़ापे की हालत में पाया और (उनकी खिदमत करके) जन्नत में दाखिल न हुआ."

मां का हक बाप से ज्यादा

इस्लाम में मां-बाप की खिदमत और उनकी इज्जत करने के बारे में बताया गया है. अगर बात करें कि मां-बाप की खिदमत में से किसकी खिदमत सबसे ज्यादा करना चाहिए, तो ऐसे में बताया गया है कि मां की खिदमत सबसे ज्यादा करनी चाहिए. इसीलिए कहा जाता है कि मां के पैरों तले जन्नत है. हदीस बुखारी मुस्लिम के मुताबिक "हजरत अबुहुरैरा रजि. ने फरमाया कि एक शख्स ने प्रोफेट मोहम्मद स. से पूछा; "ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे अच्छे सुलूक का कौन ज्याया हकदार है"? प्रोफेट मोहम्मद स. ने फरमाया तुम्हारी मां. उसने पूछा; "फिर कौन?" प्रोफेट मोहम्मद स. ने फरमाया तुम्हारी मां. उसने कहा; "फिर कौन?" प्रोफेट मोहम्मद स. ने फरमाया तुम्हारी मां. उसने चौथी बार पूछा; "फिर कौन?" प्रोफेट मोहम्मद स. ने फरमाया तुम्हारा बाप."

कुरान में मां-बाप का जिक्र

मां-बाप की खितमत और उनके साथ अच्छे सुलूक के बारे में अल्लाह ने कुरान में भी जिक्र किया है. कुरान में एक जगह अल्लाह फरमाता है "हमने इंसान को ताकीद की है कि वह अपने मां-बाप का शुक्रगुजार हो." इसके बाद फरमाया है कि "उसकी मां ने तकलीफ पर तकलीफ झेलकर नौ महीने तक उसे अपने पेट में उठाए रखा, फिर दो साल तक अपने खून से पाला" (सूरा-31 लुकमान, आयत;14)

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