जयपुर: आबकारी विभाग की दोहरी नीति से राजस्व को नुकसान,अवैध शराब बिक्री रोकने की योजना पर सेंध
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जयपुर: आबकारी विभाग की दोहरी नीति से राजस्व को नुकसान,अवैध शराब बिक्री रोकने की योजना पर सेंध

Jaipur: आबकारी विभाग राजस्व बढ़ाने के लिए बार लाइसेंस के नियमों को सरल कर रहा है, लेकिन इसकी दोहरी नीति ही बाधा बनी हुई है.एक तरफ विभाग 10 कमरों में चल रहे सरकारी होटल और हेरिटेज श्रेणी के होटलों को बार लाइसेंस दे रहा है.वहीं, 20 से कम कमरों वाले निजी होटलों को लाइसेंस देने से इनकार कर रहा है.

 

जयपुर: आबकारी विभाग की दोहरी नीति से राजस्व को नुकसान,अवैध शराब बिक्री रोकने की योजना पर सेंध

Jaipur: सरकार का सबसे ज्यादा रेवन्यू वाला डिपार्टमेंट आबकारी विभाग.लेकिन इस विभाग में दोहरी नीति के कारण राजस्व में बेरियर लगा हुआ हैं.एक्साइज डिपार्टमेंट जहां 10 कमरों में चल रहे सरकारी होटल और हेरिटेज श्रेणी के होटलों को बार लाइसेंस दे रहा है.

वहीं,20 से कम कमरों वाले निजी होटलों को लाइसेंस देने से इनकार कर रहा हैं.जबकि जयपुर, जैसलमेर, अलवर सिरोही बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कुंभलगढ़, पाली, अजमेर, सहित प्रदेश के कई जिलों में 10 से 20 रूम के 5000 से ज्यादा होटल और रिसॉर्ट हैं.वहीं, कई निर्माणाधीन हैं.

ऐसे में पर्यटन के बदले ट्रेंड के बीच रूरल टूरिज्म पर भी असर पड़ सकता है.क्योंकि ग्रामीण इलाकों में अधिकतर,होटल 20 से कम कमरों वाले हैं, जहां रुकने वाले पर्यटक शराब की डिमांड करते हैं.बता दें कि 14 मार्च तक रेस्टोरेंट बार, हेरिटेज होटल, क्लब, लग्जरी होटल व अन्य ने कुल 1084 लाइसेंस आबकारी से जारी हुए हैं.

बदलते दौर के बीच शहर के आसपास कम कमरों के रिसॉर्ट बन रहे हैं. पर्यटक भी बड़ी होटल की जगह इन छोटी इकाइयों में रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इसके दो कारण हैं.पहला तो यहां भीड़ कम होती है और दूसरी टेंट,कटिज, विला में नाइट स्टे का अलग अनुभव मिलता है. नई आबकारी नीति के तहत विभाग शराब पार्टी के लिए ओकेजनली लाइसेंस देता है.

लाइसेंस प्रक्रिया ऑनलाइन रहती है. इसमें कोई भी व्यक्ति सालभर में 45 दिनों के लिए कभी भी ओकेजनली लाइसेंस ले सकता है.छोटे होटल,रिसोर्ट संचालक ईयर एंडिंग या बड़ी पार्टी होने पर लाइसेंस ले सकते हैं.

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सालभर के लिए ऐसे लाइसेंस मिले तो यह राहत भरा होगा.आबकारी विभाग के अफसर भी मानते हैं की 20 कमरों से कम होटल, रिसोर्ट में लाइसेंस देने के लिए पॉलिसी में बदलाव करना पड़ेगा.यह राज्य सरकार के स्तर का मामला है.उधर होटल संचालको का कहना हैं की ग्रामीण इकाइयों में होटलों में कमरों की संख्या कम ही होगी.इसलिए राहत के लिए पॉलिसी में बदलाव जरूरी है.

विभाग ने यहां की होटलों को हेरिटेज श्रेणी में माना

(1) जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, माउंट आबू जैसलमेर और कुंभलगढ़ किले की परिधि के 10 किमी एरिया

(10 कमरों तक 2लाख), (11 से 25 कमरों तक 3.50लाख) और (25 से ज्यादा कमरे 4लाख )
(2) डिविजनल व डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर, भिवाड़ी रणकपुर जैन मंदिर, रणथंभौर नेशनल पार्क की 5 किमी की परिधि, यूआईटी सीमा
(10 कमरों तक 1लाख), (11 से 25 कमरों तक 2.50लाख) और (25 से ज्यादा कमरे 3.50लाख )

(3) जो श्रेणी 1 और 2 में कवर नहीं होती
(10 कमरों तक 50 हजार), (11 से 25 कमरों तक 1.25लाख) और (25 से ज्यादा कमरे 1.75लाख )

बहरहाल, जयपुर सहित प्रदेशभर में 5 हजार से ज्यादा 10 से 20 रूम के होटल-रिसोर्ट होने के बावजूद महज 1 हजार को ही लाइसेंस जारी किए हुए हैं.यदि दोहरी नीति ना हो सभी निजी होटल-रिसोर्ट को लाइसेंस जारी होने से आबकारी विभाग को राजस्व में भी बढोतरी होगी.साथ में निजी होटलों में अवैध शराब ब्रिकी रोकने की योजना में भी सेंध लगाने से कामयाबी मिल सकेगी.

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