DU: चोरी का निकला दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्ट्रैटेजिक प्लान! करना पड़ा ये काम
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DU: चोरी का निकला दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्ट्रैटेजिक प्लान! करना पड़ा ये काम

25 Year DU Plan: एकेडमिक काउंसिल के सदस्यों ने तर्क दिया कि प्लान को भारतीय संदर्भों को शामिल करते हुए फिर से लिखने की जरूरत है. 

DU: चोरी का निकला दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्ट्रैटेजिक प्लान! करना पड़ा ये काम

DU Strategic Plan: दिल्ली यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल अगले 25 साल के लिए यूनिवर्सिटी के स्ट्रैटेजिक प्लान पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई. हालांकि, यह 52 पेज का डॉक्यूमेंट दुनिया भर की दूसरी यूनिवर्सिटीज के समान डॉक्यूमेंट से प्लेगरिज्म (साहित्यिक चोरी) के उदाहरणों से भरा हुआ था, जिसका काउंसिल के मेंबर्स ने विरोध किया और ब्लूप्रिंट को रिवाइज करने के लिए एक समिति को वापस भेजने के लिए मजबूर किया.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार, विकास गुप्ता ने कन्फर्म किया कि डॉक्यूमेंट को उस समिति द्वारा दोबारा काम करने के लिए वापस ले लिया गया है जिसने इसका मसौदा तैयार किया था और कहा कि प्लेगरिज्म डॉक्यूमेंट के 8 फीसदी तक सीमित था.

गुप्ता ने कहा, "समिति के सदस्यों के मुताबिक, डॉक्यूमेंट का केवल 8 फीसदी हिस्सा दूसरों से लिया गया था. हालांकि, हम डॉक्यूमेंट को समिति को वापस भेज देंगे और वे इसे रिवाइज करेंगे."

वीसी ऑफिस के एक बयान में कहा गया है कि वीसी मेंबर्स द्वारा बताए गए विचारों पर विचार करेंगे. बयान में कहा गया, "कुलपति ने कहा कि मसौदे की भाषाई बारीकियों को देखने के लिए समिति में भाषाविदों और संपादकों को भी शामिल किया जाएगा." समिति के अध्यक्ष ने इस पर कोई कमेंट नहीं किया है.

प्लेगरिज्म के आरोप पहली बार नहीं हैं जब दिल्ली यूनिवर्सिटी (2022-2047) के स्ट्रेटेजिक प्लान की आलोचना की गई है. इसे अप्रूवल के लिए जून में कार्यकारी परिषद के सामने पेश किया गया था, लेकिन कुछ शिक्षाविदों द्वारा इसे "निजीकरण और संविदाकरण के लिए क्लियर ब्लूप्रिंट" के रूप में आलोचना करने के बाद इसे रिवीजन के लिए वापस भेज दिया गया था.

एकेडमिक काउंसिल के सदस्यों ने तर्क दिया कि प्लान को भारतीय संदर्भों को शामिल करते हुए फिर से लिखने की जरूरत है. एसी सदस्य विकास गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि मसौदे में धर्मनिरपेक्षता, आरक्षण या अल्पसंख्यक शब्द की अवधारणाओं का उल्लेख नहीं है. "दलित शब्द का प्रयोग केवल एक बार हुआ है और वह भी स्वदेशी ज्ञान के संबंध में. जाति शब्द का प्रयोग केवल एक बार किया गया है, जबकि यह हमारे व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन की सबसे जरूरी सामाजिक घटना बनी हुई है."

छह एसी सदस्यों द्वारा साइन एक असहमति नोट में कहा गया है: "स्थानीय जरूरतों और वास्तविकताओं से हटकर, प्रस्तावित स्ट्रैटेजिक प्लान वास्तव में यूनिवर्सिटी की मौजूदा समस्याओं, चुनौतियों, लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों और फायदों को एजेंडा सेटिंग के सेंटर में रखने में विफल रही है."

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