सावधान! दिन में सोना कर देगा अंधा, 2040 तक दुनिया के 11.2 करोड़ लोग हो जाएंगे दृष्टिहीन
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सावधान! दिन में सोना कर देगा अंधा, 2040 तक दुनिया के 11.2 करोड़ लोग हो जाएंगे दृष्टिहीन

Side effects of sleeping in day: 11 साल तक हुई रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, लगभग 8690 लोगों में ग्लूकोमा पाया गया, जो 2040 तक दुनियाभर में लगभग 11.2 करोड़ लोगों को प्रभावित कर सकता हैं.

 

सावधान! दिन में सोना कर देगा अंधा, 2040 तक दुनिया के 11.2 करोड़ लोग हो जाएंगे दृष्टिहीन

Sleeping In Day: भारत के हर घर में अक्सर ये कहा जाता है कि हमें शाम के समय नहीं सोना चाहिए, लेकिन सिर्फ शाम ही नहीं बल्कि दिन में भी नहीं सोना चाहिए, लेकिन यह भी परिस्थितियों पर ही निर्भर होता है कि हमें कब सोना है. 

अक्सर हमें सलाह दी जाती है कि 6 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए, लेकिन अगर यह नींद आप रात में नहीं लेते है तो आपको दिनभर नींद आती है और पूरा दिन बदन टूटता है. इसलिए कहते है कि रात के समय ली गई अच्‍छी नींद अगले दिन तरोताजा रखती है. अगर आप रात में भरपूर नींद नहीं लेते तो आपको दिन में नींद आती है. क्या आपको जानते है कि दिन में सोने से आपकी आंखों पर बुरा असर पड़ता है? इसका खुलासा एक शोध में हुआ है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह स्थिति ज्‍यादा गंभीर हो तो समस्‍या अंधेपन तक भी बढ़ सकती है.

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दिन में सोना कर देगा अंधा
ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रात में नींद नहीं लेने और दिन में खर्राटे भरने की समस्या लंबे समय तक चलने से ग्लूकोमा, यानी काला मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है. इस बीमारी का सही समय पर इलाज नहीं हो तो यह स्तिथि इतनी गंभीर हो सकती है कि इससे दृष्टिहीनता यानी अंधे होने का भी खतरा बढ़ जाता है. बीएमजे ओपन जर्नल में छपी एक रिसर्च के मुताबिक ग्लूकोमा के कारण अगर आंखों की रोशनी चली जाती है, तो दोबारा नहीं लौटती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि रात में पूरी नींद नहीं लेने की स्थिति में किसी भी उम्र के लोगों को ग्लूकोमा हो सकता है और यह समस्या बुजुर्गों और धूम्रपान करने वालों में तो आम बात है.

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2010 से 2021 तक चली रिसर्च ने किया बड़ा खुलासा
ब्रिटेन के बायोबैंक की ओर से हुई स्‍टडी में 40 से 69 साल के बीच की उम्र वाले 4 लाख से अधिक लोगों के डेटा का आकलन और विश्‍लेषण किया है. इस स्‍टडी में शामिल किए गए लोगों से उनकी नींद की आदतों के बारे में जाना गया. 2010 से 2021 तक चली इस स्‍टडी में लगभग 8,690 लोगों में ग्लूकोमा पाया गया है. आंकड़ों के आधार पर शोधकर्ताओं ने पाया कि भरपूर नींद लेने वाले लोगों की तुलना में दिन में नींद और खर्राटे भरने वाले लोगों में ग्लूकोमा का खतरा 11 फीसदी बढ़ जाता है. वहीं अनिद्रा और छोटी या लंबी नींद वाले लोगों में यह खतरा 13 फीसदी तक बढ़ जाता है. रिसर्चर्स के मुताबिक साल 2040 तक दुनियाभर में लगभग 11.2 करोड़ लोग ग्लूकोमा से प्रभावित हो सकते हैं.

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सोना है बेहद जरूरी
एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अच्‍छी नींद नहीं लेने से हमारी निर्णय लेने की क्षमता, सीखने की क्षमता, हमारे व्‍यवहार/स्वभाव और हमारी याद्दाश्‍त पर बहुत बुरा असर पड़ता है. ग्लूकोमा आंख से दिमाग को जोड़ने वाली ऑप्टिक तंत्रिका को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है, जिस वजह से आंखों की संवेदनशील कोशिकाओं का क्षरण होने लगता है. अगर समय पर इलाज नहीं मिले तो आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है.

Disclaimer: संबंधित लेख पाठक की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए है. जी मीडिया इस लेख में प्रदत्त जानकारी और सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है. उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें.

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