फर्जी आदेश से मचा हडकंप, जयपुर से लेकर अजमेर तक मची खलबली,जानें मामला
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फर्जी आदेश से मचा हडकंप, जयपुर से लेकर अजमेर तक मची खलबली,जानें मामला

Rajasthan Revenue Department: राजस्थान राजस्व विभाग ग्रुप-10 के कांट-छांटकर तैयार किए गए फर्जी आदेश से जयपुर से लेकर अजमेर तक खलबली मच गई.

 

फर्जी आदेश से मचा हडकंप, जयपुर से लेकर अजमेर तक मची खलबली,जानें मामला

Rajasthan Revenue Department: राजस्थान में फर्जी आदेश से मचा हडकंप, जयपुर से लेकर अजमेर तक मची खलबली,जानें मामला.राजस्व मंत्री के दफ्तर से फर्जी आदेश की सूचना मिलने के साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारियों से लेकर अजमेर जिला प्रशासन को अलर्ट हो गया.मामला दरअसल सिवायचक की करीब 5.75 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है.जो अजमेर विकास प्राधिकरण (एडा) के नाम दर्ज थी उसे 7 व्यक्तियों के नाम दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए.

राजस्व विभाग डिपार्टमेंट से जारी एक फर्जी आदेश से खलबली मच गई.सिवायचक की करीब 5.75 हेक्टेयर जमीन जो अजमेर विकास प्राधिकरण (एडा) के नाम दर्ज थी उसे 7 व्यक्तियों के नाम दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए.

फर्जी आदेश के सामने आने के बाद रेवेन्यू विभाग के उप शासन सचिव मोहनदान रत्नू ने अजमेर कलेक्टर को पत्र लिखकर इस जमीन से जुड़ी किसी भी फाइल पर अग्रिम कार्यवाही करने पर रोक लगाने और मामले में एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश दिए है.इसके बाद अजमेर के सिविल लाईन्स थाने में मामला दर्ज हुआ है.

साथ में अजमेर जिला कलक्टर ने तहसीलदार अजमेर को इस प्रकरण में किसी प्रकार की अग्रिम कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए हैं.मामला अजमेर तहसील के हाथीखेड़ा गांव का है.जहां खसरा संख्या 2193-94 और 2197-98 की अलग-अलग रकबे की कुल 5.75 हेक्टेयर जमीन अजमेर विकास प्राधिकरण के नाम दर्ज है.जो पहले सिवायचक जमीन थी.

इस जमीन को हाथीखेड़ा गांव को अजमेर विकास प्राधिकरण की टेरिटरी (क्षेत्राधिकार) में शामिल होने के बाद ट्रांसफर किया गया था.लेकिन आरोपित अनिल कुमार साहु और रोहिताश ने इस जमीन को 7 लोगों (नौरतमल पुत्र दूदा जाति भांबी,चुना पुत्र बालू जाति भांबी, बीरमा पुत्र माला जाति भांबी, चन्द्रा पुत्र बालू जाति भांबी, रामकिशन पुत्र मोती जाति भांबी, मोती पुत्र घासी जाति भांबी, लक्ष्मण पुत्र दल्ला जाति भांबी) के नाम दर्ज करने के फर्जी आदेश बनाकर जारी कर दिए.

फर्जी आदेश के अनुसार जिन 7 लोगों के नाम से जमीन का नामांतरण खुलवाने का फर्जी आदेश बनाया गया.इसमें इन सभी लोगों को जमीन का पुराना कब्जेधारी और आवंटी बताया गया.आदेश में बताया कि ये 7 लोग पिछले कई सालों से जमीन पर खेतीबाड़ी करते आ रहे है और पुराने कब्जे के आधार पर जमीन को साल 1995 में उपखण्ड अधिकारी ने नियमित करते हुए इनको आवंटित किया था.

आवंटन के बाद से अब तक जमीन का नामांतरण (म्यूटेशन) आवंटियों के नाम नहीं खोला गया.इसके बाद जब गांव अजमेर विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हो गया तो गलती से जमीन का म्यूटेशन अजमेर विकास प्राधिकरण के नाम खोल दिया.फर्जी आदेश बनाने के लिए विभाग के ही एक लेटर का उपयोग किया गया.ये लेटर विभाग ने सूचना आयोग को एक आरटीआई के जवाब में भेजा था.

लेटर राजस्व (ग्रुप-10/पुनर्वास) विभाग की ओर से भेजा गया था.इसी लेटर के ऊपरी हिस्से और नीचे हिस्से में कांट-छांट करके जमीन का नामांतरण अजमेर विकास प्राधिकरण से हटाकर आवंटियों के नाम दर्ज करने का आदेश बनाया गया.

बहरहाल, इस पूरे मामले में बड़ी बात ये है कि विभाग के ग्रुप-10 शाखा के नाम से फर्जी आदेश जारी होने के बाद भी विभाग को इसकी कोई खबर नहीं थी.लेकिन जब राजस्व मंत्री के ऑफिस से इस मामले पर शिकायत तो विभाग के अधिकारी हरकत में आए.

इसके बाद आनन-फानन में विभाग के अधिकारियों ने एक पत्र कलेक्टर को लिखकर इस फर्जी आदेश पर किसी भी तरह की आगे की कार्यवाही नहीं करने के लिए कहा विभाग के उप शासन सचिव एमडी रत्नू ने बताया कि इस मामले में दो जनों के खिलाफ नामदज एफआईआर दर्ज करवाई है और आगे की कार्यवाही जारी है.

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