रामभक्त की अयोध्या से लंका की पैदल यात्रा, दंडकारण्य में समाज को दिया प्रभु राम का सबसे बड़ा संदेश
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रामभक्त की अयोध्या से लंका की पैदल यात्रा, दंडकारण्य में समाज को दिया प्रभु राम का सबसे बड़ा संदेश

MP News: भगवान राम के पदचिन्हों पर चलने के लिए एक युवक ने अयोध्या से लेकर लंका तक की पैदल यात्रा शुरु की है. ये युवक लगभग 3200 किमी का सफर तय करके बस्तर पहुंचा है. उसकी इस यात्रा का उद्देश्य भगवान राम के संदेश को दूर-दूर तक पहुंचाना है.

रामभक्त की अयोध्या से लंका की पैदल यात्रा, दंडकारण्य में समाज को दिया प्रभु राम का सबसे बड़ा संदेश

Bastar News: भगवान राम के लाखों करोड़ों भक्त है, आए दिन देखा जाता है मंदिर में उनकी पूजा के लिए काफी संख्या में भक्त आते हैं. ऐसे ही एक युवक ने भगवान राम के पदचिन्हों पर चलने की ठानी है. लखनऊ (Lucknow UP) का रहने वाला यह युवक पैदल भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या (Ayodhya) से लेकर श्री लंका तक सफर तय कर रहा है. लगभग 3200 किलोमीटर की यात्रा करके ये बस्तर (Bastar) पहुंचा. जहां पर लोगों ने उसका स्वागत किया और माला पहनाया. युवक के इस यात्रा का क्या उद्देश्य है जानिए यहां.

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एकता अखंडता का संदेश
श्री लंका की यात्रा करने वाले युवक ने अपनी यात्रा अयोध्या से शुरु की है. वो पैदल चलते - चलते बस्तर पहुंचा है जहां पर जगदलपुर में दंतेश्वरी मंदिर में माई का दर्शन किया. इस दौरान उसने बताया कि वो सनातन धर्म की एकता और अखंडता का संदेश देने के लिए अयोध्या से यात्रा शुरु की है.

पदचिन्हों पर चलने की कोशिश
युवक ने अपनी यात्रा को लेकर कहा कि वो उन प्रमुख जगहों पर जाने की कोशिश कर रहा है जहां पर भगवान राम पैदल गए थे. भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान कई राज्यों का भ्रमण किया था और बस्तर में भी उन्होंने कुछ समय बिताया था. ऐसे में वो बस्तर के दंडकारण्य भी गया. यहां पहुंचने के बाद जितने लोग उससे मिलते थे सबको सनातन संस्कृति के बारे में जानकारी देता था. 

भेदभाव मिटाना
युवक ने बताया कि वो यात्रा के जरिए छुआ छूत के बंधन को मिटाने की कोशिश कर रहा है. अपने संदेश में कहा कि भगवान राम भी अपने वनवास के दौरान लोगों को यही संदेश दिया था. उनका ये संदेश दूर - दूर तक पहुंचे इसका विस्तार इस पैदल यात्रा के द्वारा वो कर रहा है. इसके जरिए वो सनातन धर्म की अखंडता एकता से लोगों को रुबरु करा रहा है. बता दें की युवक को भारत के अयोध्या से लेकर भारत के अंतिम छोर रामसेतु तक 7000 किलो मीटर की पैदल यात्रा करनी है. 

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