Everest Winner: छत्तीसगढ़ सविता ने रचा इतिहास, 13वीं बार हिमालय की चोटी पर फहराया तिरंगा
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Everest Winner: छत्तीसगढ़ सविता ने रचा इतिहास, 13वीं बार हिमालय की चोटी पर फहराया तिरंगा


छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की प्रसिद्ध पर्वतारोही ने हिमालय की दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहराया है. इन पर्वतारोही महिलाओं की उम्र 50 साल से ऊपर है. इन्होनें कई खतरनाक दर्रों को पार करते हुए 4977 किमी का कठिन सफर 140 दिन में तय किया है. 

Everest Winner: छत्तीसगढ़ सविता ने रचा इतिहास, 13वीं बार हिमालय की चोटी पर फहराया तिरंगा

हितेश शर्मा/दुर्गः छत्तीसगढ़ की प्रख्यात पर्वतारोही सविता धपवाल ने 13वीं बार हिमालय की दुर्गम चोटियां फतह कर एक अनूठा कीर्तिमान बनाया है देश की आजादी के अमृत महोत्सव को रेखांकित करते हुए पद्मभूषण बछेंद्री पाल के नेतृत्व में 50 पार उम्र की देश भर की 11 महिलाओं का यह समूह हिमालय की विभिन्न चोटियों को फतह कर यहां देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा कर लौटा है. 140 दिन के इस जोखिम भरे सफर में इन महिलाओं ने 35 खतरनाक दर्रों को पार करते हुए 4977 किमी का सफर तय किया.

पर्वतारोही ने की राष्ट्रपति व मंत्री से मुलाकात
दुर्ग जिले की पर्वतारोही सविता धपवाल ने फिर एक बार दुर्ग सहित पूरे देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने इस अभियान के माध्यम से बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सेहतमंद भारत (फिट इंडिया) का संदेश फैलाने में अपना योगदान दिया. अभियान के सफलतापूर्वक संपन्न होने के उपरांत महिलाओं के इस समूह ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित विभिन्न मंत्रियों व देश के प्रमुख लोगों से मुलाकात की. 

विपरीत मौसम के बाद भी दुर्गम चोटियों पर करती रही ट्रैकिंग
सविता धपवाल यहां सेल के शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं. 1987 से अब तक वे 8 प्रमुख पर्वतारोही अभियान में हिस्सा ले चुकी हैं. वहीं इसके पहले 12 मर्तबा हिमालय की विभिन्न चोटियों की ट्रैकिंग कर चुकी हैं. सविता धपवाल ने बताया कि पर्वतारोहण के क्षेत्र में ऐसा पहली बार हुआ जब 50 पार की 11 महिलाएं बारिश और बर्फबारी के इस विपरीत मौसम के बावजूद हिमालय की दुर्गम चोटियों पर पांच महीनो तक ट्रैकिंग करती रहीं.

साधन के अभाव में शमशान पर रुकना पड़ा
उन्होंने बताया कि अभियान का एक लक्ष्य कम से कम खर्च में ट्रैकिंग पूरी करना था. कई बार स्कूल भवन, नदी के किनारे से लेकर गांव में मिले खाली कमरे तक में रुकना पड़ा. सविता धपवाल ने बताया कि अभियान का एक लक्ष्य कम से कम खर्च में ट्रैकिंग पूरी करना था. इसलिए कई मौके ऐसे आए जब रास्ते में कोई अन्य साधन न होने पर श्मशान घाट में रुकना पड़ा.

प्रतिदिन औसतन 13.5 किमी चलती थी पैदल
पर्वतारोही सविता धपवाल ने बताया कि समूह की महिलाएं प्रतिदिन औसतन 13.5 घंटे पैदल चलती रहीं. पर्वतारोहण के क्षेत्र में ऐसा पहली बार हुआ जब 50 पार की 11 महिलाएं बारिश और बर्फबारी के इस विपरीत मौसम के बावजूद हिमालय की दुर्गम चोटियों पर पांच महीने तक ट्रैकिंग करती रहीं. गौरतलब है कि 50 साल की उम्र के बावजूद इस तरह का हौसला दिखाना भी अपने आप में एक बड़ी.

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