लोकसभा चुनाव 2024: सिर्फ 370 सीटें ही नहीं, आधे वोट भी चाहिए... बीजेपी के प्लान की इनसाइड स्टोरी
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लोकसभा चुनाव 2024: सिर्फ 370 सीटें ही नहीं, आधे वोट भी चाहिए... बीजेपी के प्लान की इनसाइड स्टोरी

BJP Plan For Lok Sabha Election: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के लिए आगामी लोकसभा चुनाव में 370 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. बीजेपी की मंशा सिर्फ सीटों का आंकड़ा बढ़ाने की ही नहीं, वोट शेयर के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करने की भी है.

लोकसभा चुनाव 2024: सिर्फ 370 सीटें ही नहीं, आधे वोट भी चाहिए... बीजेपी के प्लान की इनसाइड स्टोरी

Lok Sabha Polls 2024: लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ताल ठोक कर 370 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही है. उसे यह जोश अपने नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्‍मविश्‍वास से मिला है. पीएम मोदी ने संसद के भीतर ऐलान किया था कि बीजेपी आगामी चुनाव में 370 सीटें जीतेगी. सत्ताधारी एनडीए की सीटों का आंकड़ा 400 के पार रहेगा, पीएम ऐसी भविष्यवाणी कर चुके हैं. उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीजेपी लगातार नए गठबंधन कर रही है. दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है. पार्टी की नजरें सिर्फ 370 सीटें जीतने पर ही नहीं, आधे वोट हासिल करने पर भी है. बीजेपी भारत के संसदीय इतिहास में सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी बनना चाहती है. 

अभी लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है. मगर मोदी और बीजेपी ने तीसरे कार्यकाल के बारे में बात करना शुरू कर दिया है. PM मोदी ने अपने कैबिनेट सदस्यों से कहा है कि वे अगली सरकार के पहले 100 दिनों का प्‍लान तैयार रखें. 

कांग्रेस का चार दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ना चाहती है बीजेपी

लक्ष्य प्राप्ति के लिए बीजेपी को दूसरे दलों के नेताओं से जरा भी परहेज नहीं, फिर चाहे वह छोटा हो या बड़ा. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आंध्र प्रदेश में TDP-जनसेना पार्टी और उत्‍तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के साथ गठबंधन लगभग फाइनल हो चुका है. पंजाब में अकाली दल से बैकडोर बातचीत जारी है. चुनावी साल में, सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्र‍ियों- चौधरी चरण सिंह और पीवी नरसिम्हा राव के साथ-साथ एमएस स्‍वामीनाथन और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से नवाजा है. उसके भी सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. 

बीजेपी नेताओं के हवाले से एक्‍सप्रेस ने लिखा है कि यह सारी कवायद सिर्फ भारी बहुमत ही नहीं, वोट शेयर को 50% के पास लाने के लिए हो रही है. विपक्षी धड़ा INDIA अक्सर आरोप लगाता है कि 2019 के चुनाव में 64% वोटरों ने बीजेपी को नहीं चुना. 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 37.36% वोट मिले थे.

बीजेपी की नजर 1984 में कांग्रेस के बनाए रिकॉर्ड को तोड़ने पर है. तब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने रिकॉर्ड 414 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को उस चुनाव में 49.10% वोट मिले थे. भारत के संसदीय इतिहास में किसी राजनीतिक पार्टी का वह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था. बीजेपी उससे भी आगे निकल जाना चाहती है. इसके लिए बीजेपी को लगभग हर सूबे में वोट प्रतिशत बढ़ाना होगा.

हिंदी भाषी राज्यों में BJP का दबदबा, दक्षिण में क्या होगा?

2019 चुनाव में, हिंदी पट्टी के कुछ राज्यों में बीजेपी का एकछत्र राज रहा. पार्टी ने राजस्थान, हरियाणा और गुजरात की सभी लोकसभा सीटें जीतीं. मध्य प्रदेश में बीजेपी सिर्फ एक सीट हारी और छत्तीसगढ़ में सिर्फ दो. बिहार में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को सिर्फ एक सीट पर हार का सामना करना पड़ा. सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों  वाले राज्‍य उत्‍तर प्रदेश (80) में बीजेपी ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद बीजेपी को उस आंकड़े में और इजाफे की उम्मीद है.

दक्षिण में बीजेपी की स्थिति डांवाडोल है मगर कर्नाटक की स्थिति अलग है. वहां 2019 में बीजेपी ने 29 में से 28 सीटें जीती थीं. राज्य की इकलौती निर्दलीय सांसद ने लोकसभा में मोदी सरकार को समर्थन दिया. 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बुरी गत हुई. इसके बावजूद JD(S) से हाथ मिलाकर बीजेपी लोकसभा चुनाव में दबदबा बनाए रखने की आस लगाए हैं.

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दक्षिण में PM मोदी की लोकप्रियता को भुनाने की तैयारी

बीजेपी नेताओं के अनुसार, पार्टी ओडिशा और तेलंगाना में भी सीटें बढ़ाएगी. बीजेपी गठबंधन पर जोर दे रही है. आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में गठबंधन के लिए हाथ-पांव इसीलिए मारे जा रहे हैं ताकि अगर बीजेपी सीटें न जीत पाए तो भी गठबंधन के दम पर वोट पा ले. 

हाल ही में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में बीजेपी कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव का रोडमैप दिखाया गया. पार्टी राज्य, जिला, ब्लॉक और बूथ स्‍तर पर बैठकें करेगी और बात आगे पहुंचाएगी. पार्टी को लगता है कि आक्रामक हिंदुत्व से उसे उत्तर भारत में तो फायदा हो सकता है लेकिन दक्षिण में मुश्किल पड़ सकती है. वहां पर बीजेपी ने पीएम मोदी की लोकप्रियता को भुनाने की सोची है.

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