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Chhattisgah New CM: डॉक्टर रमन सिंह या कोई आदिवासी फेस, ये हैं सीएम के दावेदार

Chhattisgarh Election 2023: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीजे रविवार को घोषित कर दिए गए. चुनावी नतीजों में जनता ने सबको चौंकाते हुए इस बार बीजेपी को गद्दी सौंपी है. खबर लिखे जाने तक छत्तीसगढ़ की 90 सीटों में से बीजेपी 53 पर बढ़त बनाए हुए है. जबकि कांग्रेस 35 पर आगे चल रही है. अन्य दो पर आगे चल रहे हैं. एग्जिट पोल्स की अगर बात करें तो अधिकतर में भूपेश बघेल सरकार की वापसी की भविष्यवाणी की गई थी. लेकिन अब राज्य में बाजी पलट चुकी है.  अब आपको बताते हैं कि  बीजेपी के सत्ता में आने के बाद किसको मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. 

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रमन सिंह

रमन सिंह छत्तीसगढ़ के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उनको पूरे राज्य की समझ भी है और सरकार चलाने का अनुभव भी. ऐसे में उनको पार्टी दरकिनार नहीं कर सकती. बीजेपी ने किसी को इस चुनाव में सीएम फेस प्रोजेक्ट नहीं किया था. शुरुआत में रमन सिंह पार्टी में भले ही उपेक्षित थे, लेकिन जब चुनाव काफी नजदीक आए तो पार्टी आलाकमान ने टिकट बंटवारे में रमन सिंह की राय भी ली. 2018 में जब बीजेपी की हार हुई तो उनकी सक्रियता काफी कम हो गई थी.

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अरुण साव

अरुण साव बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और ओबीसी समाज से आते हैं. सीधे-सरल स्वभाव के अरुण साव पार्टी के भीतर गुटबाजी के पक्षकार नहीं हैं. 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में छत्तीसगढ़ बीजेपी के लिए बेहद अहम है. राज्य में ओबीसी जाति की आबादी अच्छी खासी है. ऐसे में अरुण साव पर बीजेपी दांव लगा सकती है. हालांकि संगठन के कामकाज में इनको ज्यादा अनुभव नहीं है.

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ओपी चौधरी

पूर्व ब्यूरोक्रेट हैं. साल 2018 में सिविल सर्विसेज छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था. युवाओं में बेहद पॉपुलर हैं और सोशल मीडिया पर काफी फैन फॉलोइंग है. चौधरी ओबीसी समाज के ताल्लुक रखते हैं. लेकिन वह नेता नहीं हैं, ना ही उनको संगठन चलाने का एक्सपीरियंस है. लेकिन जिस तरह महाराष्ट्र में बीजेपी ने देवेंद्र फडणवीस को गद्दी सौंपी  थी, उसी तरह मुमकिन है कि बीजेपी ओपी चौधरी पर दांव खेल सकती है. 

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विजय बघेल

विजय बघेल भी सीएम रेस में हैं. इसकी दो वजह हैं. वह कुर्मी समाज से आते हैं. उनकी और भूपेश बघेल की जाति एक ही है. वह बघेल के खिलाफ पाटन से ही चुनावी मैदान में उतरे हैं. पार्टी आलाकमान के करीबी माने जाते हैं. लेकिन एक ही बात जो उनके खिलाफ है, वह ये कि वह पूरे छत्तीसगढ़ के सर्वमान्य नेता नहीं हैं. 

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इसके अलावा बीजेपी सबको चौंकाते हुए किसी आदिवासी नेता को भी मुख्यमंत्री बना सकती है. ऐसी स्थिति में राम विचार नेताम सबसे आगे रह सकते हैं. इसके अलावा किसी नए आदिवासी चेहरे को भी मौका मिल सकता है. 

 

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