Shukrawar Pooja: शुक्रवार को रात के समय करें अष्टलक्ष्मी की पूजा, कभी खाली नहीं होगी तिजोरी!
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Shukrawar Pooja: शुक्रवार को रात के समय करें अष्टलक्ष्मी की पूजा, कभी खाली नहीं होगी तिजोरी!

Friday Vrat: शुक्रवार का दिन अष्टलक्ष्मी का होता है. इस दिन मां लक्ष्मी के आठों स्वरूपों की पूजा करना शुभ माना जाता है. अष्टलक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन धान्य की कमी नहीं होती और परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहती है... 

Shukrawar Pooja: शुक्रवार को रात के समय करें अष्टलक्ष्मी की पूजा, कभी खाली नहीं होगी तिजोरी!

Shukrawar Pooja: हिंन्दू धर्म में सप्ताह के हर एक दिन विशेष पूजा का महत्व है. इसी कड़ी में शुक्रवार धन की देवी लक्ष्मी को समर्पित है. मान्यता है कि शुक्रवार को अष्टलक्ष्मी की पूजा के लिए उत्तम है. अगर आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं तो इससे मुक्ति पाने के लिए विधि विधान से मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए. कहा जाता है जिस घर में धर्म के नियमों का पालन होता है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है. 

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शुक्रवार को करें मंत्र-जाप, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
माना जाता है कि मां लक्ष्मी बहुत चंचल हैं. वह कभी भी एक जगह पर स्थिर नहीं बैठतीं. ऐसे में अगर आप लक्ष्मी को अपने घर में वास कराना चाहते हैं और चाहते हैं कि उनकी कृपा आपके परिवार पर बनी रहे तो महालक्ष्मी की विशेष पूजा करनी होगी. इसके लिए मंत्र-जाप किए जाते हैं. 

घर में बनी रहेगी हमेशा खुशहाली
मालूम हो, महालक्ष्मी के आठ स्वरूप हैं. माना जाता है कि अगर शुक्रवार को इनकी आराधना की जाए तो धन के अभाव नहीं होता और सद्बुद्धि भी आती है. इतना ही नहीं, अष्टलक्ष्मी का पूजन करने से घर में हमेशा खुशहाली बनी रहती है. 

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ये हैं लक्ष्मी के आठ स्वरूप
कहा जाता है कि मां लक्ष्मी के आठ स्वरूप हमारे जीवन के आठ वर्गों से जुड़े हुए हैं. शुक्रवार को अष्टलक्ष्मी की पूजा और उनके बीज मंत्र का जाप किया जाए तो भौतिक सुख मिल सकते हैं. ये आठ स्वरूप हैं-
श्री आदि लक्ष्मी
श्री विद्या लक्ष्मी
श्री धान्य लक्ष्मी
श्री विजय लक्ष्मी यां वीर लक्ष्मी
श्री धैर्य लक्ष्मी
श्री गज लक्ष्मी
श्री ऐश्वर्य लक्ष्मी
श्री संतान लक्ष्मी

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ऐसे करें मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों की पूजा
1. रात के समय मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है. शास्त्रों में लिखा है कि मां लक्ष्मी का पूजन रात में करना चाहिए. इसलिए रात 9 से 10 के बीच अष्टलक्ष्मी की आराधना करें.
2. साफ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा की चौकी पर गुलाबी कपड़ा बिछाएं और श्रीयंत्र के साथ अष्ट लक्ष्मी की तस्वीर की स्थापना करें.
3. इसके बाद अष्टलक्ष्मी के सामने घी के 8 दीपक जलाएं. इसके बाद अष्टगंध से श्रीयंत्र और अष्ट लक्ष्मी को तिलक लगाएं. इसके साथ ही, अष्टलक्ष्मी को लाल गुड़हल की माला चढ़ाएं.
4. अष्टलक्ष्मी के बीज मंत्र 'ऐं ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्मीयै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नमः स्वाहा।।' 
5. पूजा संपन्न होने के बाद सभी आठ दीपकों को घर की आठ दिशाओं में रख दें. माना जाता है कि इससे हर घरवालों के सामने आने वाली सभी समास्याओं का समाधान होता है.

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