Article 370: अनुच्छेद 370 रहेगा या हटेगा? आज आएगा 'सुप्रीम' फैसला, पूरे जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट
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Article 370: अनुच्छेद 370 रहेगा या हटेगा? आज आएगा 'सुप्रीम' फैसला, पूरे जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट

Article 370 Case in Supreme Court: जम्मू कश्मीर के लिए आज यानी सोमवार का दिन खास होने वाला है. इस एक ऐसा बड़ा फैसला आने वाला है, जिसे लेकर उमर अब्दुल्ला से लेकर गुलाम नबी आजाद तक बेसब्र हो रहे हैं. 

 

Article 370: अनुच्छेद 370 रहेगा या हटेगा? आज आएगा 'सुप्रीम' फैसला, पूरे जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट

Article 370 Case in Supreme Court Latest Updates: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट आज यानी सोमवार को फैसला सुना सकता है. कोर्ट के 5 जजों की खंडपीठ ने 16 दिनों तक लगातार सुनवाई के बाद 5 सितंबर को आदेश सुरक्षित रख लिया था. इस दौरान आर्टिकल 370 को हटाने के पक्षधर और विरोधी वकीलों की दलीलों को विस्तार से सुना गया था. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की संभावना को देखते हुए जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. साथ ही कश्मीर में शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. 

कश्मीर जोन के आईजी पुलिस वी के बिरदी ने कहा, ‘यह सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है कि घाटी में हर परिस्थिति में शांति बनी रहे.’ उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी तो नहीं दी, लेकिन कहा कि पर्याप्त व्यवस्था की गई है. बिरदी ने पिछले दो हफ्ते में घाटी के 10 जिलों में से अधिकतर में सुरक्षा समीक्षा बैठकें कीं. 

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

यह पूछे जाने पर कि क्या सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 लागू करने का आदेश उच्चतम न्यायालय के अपेक्षित फैसले से संबंधित है, उन्होंने कहा कि कुछ तत्वों द्वारा लोगों को भड़काने की कोशिश करने की कई घटनाएं हुई हैं. बिरदी ने कहा, ‘हाल में कई ऐसे पोस्ट शेयर किए गए हैं, जिनमें लोगों को भड़काने की कोशिश की गई है. ऐसे तत्वों के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की गई है और आगे भी की जाएगी.’’

उधर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए कश्मीर के नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. प्रदेश के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, वर्ष 2019 में जब हम सुप्रीम कोर्ट गए थे तो इंसाफ हासिल करने की उम्मीद लेकर गए थे. आज भी हमारे जज्बात वही हैं. हमें बेसब्री से इस दिन का इंतजार था. कल सुबह हॉनरेबल चीफ जस्टिस और उनके साथ चार और जज जो है, वे अपना फैसला सुनाएंगे और हम इंसाफ की उम्मीद लिए बैठे हैं. 

'फैसला आने के बाद भी लोग माहौल नहीं बिगाड़ेंगे'

उमर अब्दुल्ला ने कहा, इससे ज्यादा हम क्या कह सकते हैं. मैं अगर- मगर में नहीं जाता. यहां के लोगों ने पिछले 4 सालों में कब कानून को हाथ में लिया है. 2019 में नहीं लिया, 2020 में नहीं लिया जबकि गाज़ा को लेकर हम सब बहुत ज्यादा नाराज हैं. आज भी लोग दिमाग से काम ले रहे हैं. माहौल को बिगड़ने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. फैसला आने के बाद भी लोग माहौल नहीं बिगाड़ेंगे. पुलिस को धरपकड़ करने की जरूरत नहीं है.

नेशनल कांफ्रेंस (NC) के नेता उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की बहाली के लिए संविधान के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीके से लड़ाई जारी रखेगी. अब्दुल्ला ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय के प्रतिकूल फैसले की स्थिति में भी उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर में शांति भंग नहीं करेगी.

'संवैधानिक तरीके से लड़ेंगे अपनी लड़ाई'

उमर ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट को फैसला देना है. फैसला देने दीजिए. अगर हमें स्थिति बिगाड़नी होती तो हमने 2019 के बाद ही ऐसा किया होता. हालांकि, हमने तब भी कहा था और अब भी दोहराते हैं कि हमारी लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से संविधान के अनुरूप होगी. हम अपने अधिकारों की रक्षा और अपनी पहचान को सुरक्षित रखने के लिए संविधान और कानून की मदद ले रहे हैं.’

अब्दुल्ला ने बारामूला जिले के राफियाबाद में एक पार्टी सम्मेलन में पूछा, ‘इसमें गलत क्या है? क्या हमें लोकतंत्र में यह कहने का अधिकार नहीं है? क्या हम लोकतंत्र में आपत्ति नहीं जता सकते? अगर दूसरे लोग बात कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?’

'NC नेताओं को धमका रही पुलिस'

अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं को शनिवार रात से पुलिस थानों में बुलाकर डराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि NC नेताओं पर अंकुश लगाने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि वे हमेशा से शांति के समर्थक रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को क्षेत्र के लोगों पर भरोसा करना चाहिए क्योंकि कोई भी जम्मू-कश्मीर में शांति भंग नहीं करना चाहता.

'उम्मीद है, जम्मू कश्मीर के फेवर में आएगा फैसला'

जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के लीडर सज्जाद गनी लोन ने कहा, 'हमारी सारी उम्मीदें कोर्ट के आदेश पर टिकी हुई हैं. मुझे लगता है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाने वाला मैं पहला शख्स था. हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि अदालत का फैसला जम्मू कश्मीर के लोगों के फेवर में आएगा.' 

जम्मू-कश्मीर के ही एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने रविवार को उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को 2019 में निरस्त किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यहां के लोगों के पक्ष में फैसला सुनाएगा. आजाद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मैंने पहले भी यह कहा है... केवल दो (संस्थाएं) हैं, जो जम्मू-कश्मीर के लोगों को अनुच्छेद 370 और 35ए वापस कर सकती हैं और वे संस्थाएं संसद और सुप्रीम कोर्ट हैं. सुप्रीम कोर्ट की पीठ निष्पक्ष है और हमें उम्मीद है कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के पक्ष में फैसला देगी.’

कांग्रेस से अलग होने के बाद डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) की स्थापना करने वाले आजाद ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि संसद 5 अगस्त, 2019 को लिए गए निर्णयों को पलटेगी क्योंकि इसके लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी.

'लोगों को अनुच्छेद 370 से भावनात्मक जुड़ाव'

उन्होंने कहा, ‘अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को वापस लाने के लिए (लोकसभा में) 350 सीट की आवश्यकता होगी. जम्मू-कश्मीर में किसी भी क्षेत्रीय दल को तीन, चार या अधिकतम पांच सीट मिल सकती हैं. ये पर्याप्त नहीं होंगी. मुझे नहीं लगता कि विपक्ष इतनी संख्या जुटा पाएगा. (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी के पास बहुमत था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसलिए, यह केवल सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता है.’

आजाद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हर धर्म और जाति के लोगों का संविधान के उन विशेष प्रावधानों से भावनात्मक जुड़ाव रहा हैं, जिन्हें चार साल पहले निरस्त कर दिया गया था. उन्होंने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर के लोग अनुच्छेद 370 (Article 370) और अनुच्छेद 35ए से राजनीतिक रूप से नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं. यह महत्वपूर्ण है कि हमारे वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इन (प्रावधानों) को बहाल किया जाए.’

'महाराज हरि सिंह ने किए थे विशेष प्रावधान'

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की जमीन और नौकरियां बचाने के लिए 1925 में महाराजा हरि सिंह ने विशेष प्रावधान लागू किए थे. उन्होंने कहा, ‘इन प्रावधानों को आजादी के बाद अनुच्छेद 35ए के रूप में देश के संविधान में जगह मिली. पिछले 100 वर्ष में कई सरकारें आईं और गईं तथा किसी को भी इसे बदलने की जरूरत महसूस नहीं हुई.’’

बता दें कि मोदी सरकार ने लंबी तैयारी के बाद 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) को निरस्त कर दिया था. इसके साथ ही राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों-जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया था. इसके खिलाफ जम्मू कश्मीर के कई नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. 

(एजेंसी भाषा)

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