आर्ट ऑफ​ लिविंग आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जयपुर में, तनाव मुक्त रहने के सिखाएंगे गुर
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आर्ट ऑफ​ लिविंग आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जयपुर में, तनाव मुक्त रहने के सिखाएंगे गुर

आध्यात्मिक संत श्री श्री रविशंकर शनिवार को एक दिवसीय प्रवास के तहत जयपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करने पहुंचें. आर्ट आफ​ लिविंग संस्था के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर प्रतापनगर स्थित संस्था के आश्रम पहुंचने पर राजस्थानी अंदाज में उनका स्वागत किया गया.

आर्ट ऑफ​ लिविंग आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जयपुर में, तनाव मुक्त रहने के सिखाएंगे गुर

Jaipur News: आध्यात्मिक संत श्री श्री रविशंकर शनिवार को एक दिवसीय प्रवास के तहत जयपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करने पहुंचें. आर्ट आफ​ लिविंग संस्था के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर प्रतापनगर स्थित संस्था के आश्रम पहुंचने पर राजस्थानी अंदाज में उनका स्वागत किया गया. इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों से संवाद भी किया.

बता दें कि आश्रम में एडवांस मेडिटेशन कार्यक्रम में मेडिटेशन के फायदों के बारे में बताया. साथ ही जीवन को उपयोगी बनाने के गुर दिए. इसके बाद एसएमएस स्टेडियम में श्रीश्री रविशंकर के सान्निध्य में हैप्पीनेस कार्यक्रम यानि आनंदोत्सव कार्यक्रम हुआ. इस दौरान बड़ी संख्या में युवा समेत अन्य वर्ग के लोग मौजूद रहे. इस दौरान शहरवासियों को प्रभावशाली सुदर्शन क्रिया के द्वारा अलग-अलग अनुभव करवाए गए.

आसन, प्राणायाम और ध्यान के जरिए तनाव चिंता अवसाद और उत्तेजना से मुक्ति पाकर शहरवासी खुश नजर आए. श्री श्री रविशंकर ने शहरवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि मौनी अमावस्या के मौके पर शहरवासियों ने मौन भी रखा. मौन का जीवन में विशेष महत्व है. इससे भीतर शरीर में उर्जा जागेगी.

इस दौरान श्री श्री रविशंकर ने विदेशों का भी उदाहरण देकर मौन का महत्व समझाया. मौन रहने से आंतरिक शक्तियां जागृत होती है. मौन रहकर व्यक्ति आंनद से जुड़ जाता है. मौन रहना प्रारंभ में कठिन लगता है बाद में सब ठीक हो जाता है. मौन से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है. जिस प्रकार बीज जमीन में उगते हैं उसी प्रकार खुशी और आनंद आकाश में उगते है.

 ध्यान और प्रार्थना से बोए गए बीज अंकुरित होते हैं. मंत्र जप के साथ ध्यान करना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि सहज हो जाएं सरल हो जाए जिंदगी बहुत सुंदर है इसको इतना संघर्ष में न समझे न माने. जिंदगी उत्सव है, खुद हंसे और सबको हंसाएं यही उद्देश्य है. शहरवासियों ने कहा कि तनाव से मुक्त होने के लिए बहुत कुछ सीखा और सुदर्शन क्रिया के जरिए इतनी खुशियां इतना सुख इतना उत्साह इतना आत्मविश्वास बढ़ा.

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