Draupadi Murmu Speech: द्रौपदी मुर्मू ने ली राष्ट्रपति पद की शपथ, अपने पहले भाषण में कही ये बातें
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Draupadi Murmu Speech: द्रौपदी मुर्मू ने ली राष्ट्रपति पद की शपथ, अपने पहले भाषण में कही ये बातें

Draupadi Murmu ने देश की 15वीं राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले ली है. संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित समारोह में चीफ जस्टिस NV Ramana ने उन्हें शपथ दिलाई.

 

Draupadi Murmu Speech: द्रौपदी मुर्मू ने ली राष्ट्रपति पद की शपथ, अपने पहले भाषण में कही ये बातें

Draupadi Murmu Oath Ceremony: द्रौपदी मुर्मू ने देश की 15वीं राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले ली है. संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित समारोह में चीफ जस्टिस NV Ramana ने उन्हें शपथ दिलाई. उन्होंने शपथ लेते हुए कहा कि मैं भारत के समस्त नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों की प्रतीक इस पवित्र संसद से सभी देशवासियों का पूरी विनम्रता से अभिनंदन करती हूं. आपकी आत्मीयता, आपका विश्वास और आपका सहयोग, मेरे लिए इस नए दायित्व को निभाने में मेरी बहुत बड़ी ताकत होंगे. 

द्रौपदी मुर्मू ने कही ये बातीं

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर निर्वाचित करने के लिए मैं सभी सांसदों और सभी विधानसभा सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं.  आपका मत देश के करोड़ों नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति है.

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मुझे राष्ट्रपति के रूप में देश ने एक ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में चुना है जब हम अपनी आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. आज से कुछ दिन बाद ही देश अपनी स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे करेगा.ये भी एक संयोग है कि जब देश अपनी आजादी के 50वें वर्ष का पर्व मना रहा था तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी और आज आजादी के 75वें वर्ष में मुझे ये नया दायित्व मिला है. 

उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक समय में जब भारत अगले 25 वर्षों के विजन को हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से जुटा हुआ है, मुझे ये जिम्मेदारी मिलना मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है. मैं देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूं जिसका जन्म आज़ाद भारत में हुआ है. 

अपने संबोधन में द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने आजाद हिंदुस्तान के हम नागरिकों से जो अपेक्षाएं की थीं, उनकी पूर्ति के लिए इस अमृतकाल में हमें तेज गति से काम करना है. इन 25 वर्षों में अमृतकाल की सिद्धि का रास्ता दो पटरियों पर आगे बढ़ेगा- सबका प्रयास और सबका कर्तव्य. 

उन्होंने कहा कि कल यानि 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस भी है.ये दिन, भारत की सेनाओं के शौर्य और संयम, दोनों का ही प्रतीक है. मैं आज, देश की सेनाओं को तथा देश के समस्त नागरिकों को कारगिल विजय दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देती हूं.

द्रौपदी मुर्मू ने अपने जीवन के बारे में बताया

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से शुरू की थी.  मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूं, वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था. लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी. मैं जनजातीय समाज से हूं, और वार्ड कौन्सिलर से लेकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मुझे मिला है. यह लोकतंत्र की जननी भारतवर्ष की महानता है. 

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