Indore News: खतरनाक बीमारी से जूझ रहे शख्स को बचाने के लिए चढ़ाया घोड़े का खून! जानें क्या हुआ असर
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Indore News: खतरनाक बीमारी से जूझ रहे शख्स को बचाने के लिए चढ़ाया घोड़े का खून! जानें क्या हुआ असर

Indore Aplastic Anemia Treatment: इंदौर में डॉक्टर ने खतरनाक बीमारी अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित एक युवक का घोड़े के प्लाज्मा से इलाज किया है. युवक को सामान्य होने में तीन महीने लग गए. पढ़ें पूरी स्टोरी- 

Indore News: खतरनाक बीमारी से जूझ रहे शख्स को बचाने के लिए चढ़ाया घोड़े का खून! जानें क्या हुआ असर

Aplastic Anemia: देशभर में सफाई के मशहूर इंदौर अब बेहतर स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अपना नाम कर रह रहा है. इसका उदाहरण देखने को मिला इंदौर के शासकीय सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में. यहां खतरनाक बीमारियों में से एक अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित युवक का सफल इलाज किया गया. युवक के इलाज के लिए घोड़े के खून से एंटी बॉडी ली गई. युवक को पूरी तरह से सामान्य होने में तीन महीने का समय लग गया. अब पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है.

सरकारी अस्पताल में हुआ इलाज
अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित युवक मध्य प्रदेश के गुना जिले का रहने वाला है. उसकी उम्र 23 साल है. उसका इलाज इंदौर के शासकीय सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में हुआ. डॉक्टर ने बताया कि जब उन्होंने मरीज का इलाज शुरू किया था तो उन्हें बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि यहां इस बीमारी का इलाज हो पाएगा. दरअसल, अप्लास्टिक एनीमिया के इलाज के लिए अलग से एक प्रॉपर मेडिकल टीम की जरूरत होती है. ये टीम मरीज को अंडर ऑब्जर्वेशन रखती है. इस इलाज के लिए डॉक्टर ने फंड जुटाया और इलाज शुरू किया. 

क्या है अप्लास्टिक एनीमिया? 
डॉक्टर ने बताया कि जब किसी मरीज का बोन मैरो फेल हो जाता है यानी हीमोग्लोबिन बनना बंद हो जाता है तो इसे अप्लास्टिक एनीमिया कहते है. इसके इलाज के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाता है. कई बार ट्रांसप्लांट वाले बोनमैरो के जींस पीड़ित से मैच नहीं करते. ऐसी स्थिति में बोन मैरो ट्रांसप्लांट असंभव हो जाता है, तब इलाज घोड़े के खून से एंटी बॉडी लेकर एटीजी यानी एंटी-थाइमोसाइट ग्लोब्यूलिन थेरेपी से किया जाता है. 

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तीन महीने में युवक हुआ सामान्य
डॉक्टरों और परिजनों ने बताया कि अप्लास्टिक एनिमिया से ठीक होने में युवक को तीन महीने का समय लग गया. युवक के पिता ने बताया कि वे इस बीमारी के इलाज को लेकर हिम्मत हार चुके थे.लेकिन उनके बेटे और डॉक्टरों की काफी समझाइश के बाद उन्हें इस ट्रीटमेंट पर भरोसा हुआ.
इनपुट- इंदौर से शिव मोहन शर्मा की रिपोर्ट, ZEE मीडिया

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