NEET Revised Merit List: 61 से घटकर 17 रह जाएगी टॉपर्स की संख्या, जानिए किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान
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NEET Revised Merit List: 61 से घटकर 17 रह जाएगी टॉपर्स की संख्या, जानिए किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान

NEET UG Toppers: रैंक में बदलाव कई स्टूडेंट्स के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि देश में 1.08 लाख मेडिकल सीटों के लिए 24 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने नीट-यूजी दिया था.

NEET Revised Merit List: 61 से घटकर 17 रह जाएगी टॉपर्स की संख्या, जानिए किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान

NEET UG Toppers List 2024: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) संभवत: आज को रिवाइज्ड मेरिट लिस्ट की घोषणा करेगी, तो एनईईटी-यूजी परीक्षा में टॉपर्स की संख्या 61 से घटकर 17 हो जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के कहने पर आईआईटी-दिल्ली द्वारा सिफारिश किए जाने के बाद मेरिट लिस्ट में संशोधन जरूरी हो गया था कि फिजिक्स के पेपर में एक सवाल में केवल एक ऑप्शन सही था.

कई स्टूडेंट्स ने शिकायत की थी कि चार ऑप्शन में से दो को अलग-अलग एनसीईआरटी की किताबों के अनुसार सही माना जा सकता था. केवल एक उत्तर को सही मानते हुए, जिन स्टूडेंट्स ने दूसरे ऑप्शन को चुना था, वे पांच नंबर (गलत उत्तर के लिए चार नंबर और एक नेगेटिव मार्क) खो चुके थे, जिसका निश्चित रूप से परीक्षा देने वाले सभी लोगों की रैंक पर प्रभाव पड़ा होगा.

यह निर्णय मुख्य रूप से 4.2 लाख उम्मीदवारों के स्कोर को प्रभावित करेगा, जिनमें से 44 ने 720 के फुल मार्क्स हासिल किए थे, क्योंकि उन्होंने आईआईटी-दिल्ली द्वारा गलत माना गया उत्तर चुना था और जिसके लिए उन्हें पहले एनटीए द्वारा चार अंक दिए गए थे. टाइम्स ऑफ इंडिया को एनटीए के एक अधिकारी ने बताया, "टॉपरों की संख्या, जो 61 है, नंबर काटने के बाद 17 हो जाएगी."

रैंक में बदलाव कई स्टूडेंट्स के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि देश में 1.08 लाख मेडिकल सीटों के लिए 24 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने नीट-यूजी दिया था. इनमें से 56,000 सीटें सरकारी संस्थानों में हैं, जो बेहतर बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और कम फीस के लिए ज्यादा डिमांड में हैं.

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सूत्रों के मुताबिक, सबसे ज्यादा प्रभाव 50,000 से 1 लाख रैंक के बीच के कैंडिडेट्स पर पड़ेगा क्योंकि 16,000 से ज्यादा कैंडिडेट्स, जो पहले मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल करने की संभावना रखते थे, अब इस दौड़ से बाहर हो सकते हैं.

सूत्रों ने मुताबिक 44 स्टूडेंट्स पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो अब टॉपर नहीं रहेंगे, क्योंकि वे अभी भी 33,000 से 50,000 की रैंक के ग्रुप में शामिल होंगे, लेकिन उनकी रैंक में बदलाव से उनकी पसंद के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें हासिल करने की संभावना पर असर पड़ेगा.

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