Mahashivratri 2024: उत्तराखंड के इस गुप्त मंदिर में रुकी थी भगवान शिव की बारात, आज भी होता है ये चमत्कार
Advertisement

Mahashivratri 2024: उत्तराखंड के इस गुप्त मंदिर में रुकी थी भगवान शिव की बारात, आज भी होता है ये चमत्कार

Shiv Ji Ki Barat: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन देशभर में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. बता दें कि इस दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था. शिव जी की बारात के समय उत्तराखंड के इस मंदिर में भगवान शिव की बारात रुकी थी. 

 

bhootnath temple

Shiv Vivah: हिंदू शास्त्रों में भगवान शिव की बारात और उनके विवाह से संबंधित कई कथाएं मौजूद हैं. भगवान शिव जब सती से विवाह करने के लिए बारात लेकर गए थे, तो वे रास्ते में एक मंदिर में रुके थे. वो मंदिर आज भी मौजूद है.  भगवान शिव के विवाह और बारात से जुड़े कई प्रसंग आज भी पढ़ने को मिलते हैं. इन्हीं में से एक उत्तराखंड में स्थित भूतनाथ मंदिर. 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तराखंड को कई लोग भगवान शिव की भूमि भी मानते हैं क्योंकि यही से भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत है. कहते हैं कि यहां स्थित भूतनाथ मंदिर काफी प्राचीन है. इसे गुप्त मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.  

इस मंदिर को लेकर प्रचलित है एक कथा

उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित भूतनाथ मंदिर को लेकर एक कथा प्रचलित है. भगवान शिव के विवाह से जुड़ी एक कथा मंदिर को लेकर खूब प्रचलित है. ये मंदिर अपनी सुंदरता और विचित्रता के लिए जाना जाता है. इसके साथ ही इस भूतनाथ मंदिर को लेकर ये कथा भी प्रचलित है कि इस मंदिर में भगवान शिव की बारात रुकी थी. मंदिर के विचित्र और आध्यात्मिक पौराणिक महत्व ने मंदिर को चर्चित किया है.  

मंदिर को लेकर है ये कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शंकर मां सती से विवाह करने के लिए बारात लेकर निकले थे. उस समय माता सती के पिता राजा दक्ष ने इसी भूतनाथ मंदिर में भगवान शिव को उनकी बारात के साथ इस भूतनाथ मंदिर में ठहराया था. बता दें कि उस समय भगवान शिव ने अपनी बारात में शामिल सभी देव, गण, भूत और तमाम बरातियों के साथ यहीं रात बितायी थी. इस मंदिर को लेकर एक बात प्रचलित है, जो सभी दार्शनियों को हैरान कर देती है. 

भूत-प्रेत बाधाएं होंगी दूर  

बता दें कि इस भूतनाथ मंदिर को गुप्त मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि यहां जानें मात्र से ही भूत-प्रेत बाधाएं दूर हो जाती हैं. वहीं, अगर कोई असाध्य रोग से पीड़ित है, तो उसे एक बार मंदिर के दर्शन अवश्य करने चाहिए. दर्शन कर भोलेबाबा से प्रार्थना अवश्य करें. ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में भगवान शिव के सच्चे भक्तों को ही सिर्फ दर्शन मिलते हैं.  

नशे की लत होगी दूर 

इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां की मिट्टी में काफी शक्ति है. यहां जो भक्त दर्शन को आते हैं, वे मंदिर की मिट्टी को अपने साथ ले जाते हैं. वहीं, अगर कोई व्यक्ति अवसाद और नशे की लत से परेशान हैं या उस व्यक्ति का मन अशांत रहता है, तो ऐसे भक्तों को बाबा के दर्शन अवश्य करने चाहिए. 

बता दें कि मंदिर में शिवलिंग के चारों तरफ 10 घंटियां लगी हुई हैं और 10 घंटियों में से अलग-अलग आवाज निकलती है. एक साथ बजने के बाद भी इसमें से अलग-अलग ध्वनि निकलती है, जिसे देखकर लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं.  

सात मंजिला बना है मंदिर

बता दें कि भूतनाथ मंदिर सात मंजिला बना हुआ है. इसकी पहली मंजिल पर आपको भगवान शंकर से जुड़ी कथाओं का वर्णन मिलेगा. ये वर्णन चित्रों के माध्यम से देखने को मिलेगा.  मंदिर की हर मंजिल पर हनुमान और नंदी के अलावा सभी देवी-देवताओं के चित्र देखने को मिलते हैं. सबसे आखिर में सांतवी मंजिल पर छोटा-सा शिव मंदिर बना है. जहां भगवान शिव और उनकी बारात का वर्णन चित्रों के माध्याम से किया गया है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

Trending news