Uttarkashi Tunnel Update: साइंस और सनातन...दोनों की जुगलबंदी ने 17 दिन से टनल में फंसे मजदूरों के लिए बनाई राह
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Uttarkashi Tunnel Update: साइंस और सनातन...दोनों की जुगलबंदी ने 17 दिन से टनल में फंसे मजदूरों के लिए बनाई राह

Uttarkashi Tunnel Rescue Update: उत्तरकाशी में 41 मजदूरों को बचाने के लिए चल रहा ऑपरेशन और साइंस और सनातन दोनों की जुगलबंदी का सटीक उदाहरण माना जा रहा है. कहते हैं कि बौख नाग देवता की नाराजगी की वजह से यह अचानक आपदा आन पड़ी है. 

Uttarkashi Tunnel Update: साइंस और सनातन...दोनों की जुगलबंदी ने 17 दिन से टनल में फंसे मजदूरों के लिए बनाई राह

Baukh Nag Devta and Uttarakhand Tunnel Update: उत्तरकाशी में 17 दिन पहले 12 नवंबर को अचानक सुरंग धंसने से 41 मजूदरों की जिदंगियां मुश्किल में आ गई थी. फिर रेस्क्यू टीम पूरे दल-बल के साथ इन सभी की जिंदगियां बचाने में जुट गईं. इस बीच आस्था का वो दौर चला, जब रेस्क्यू टीम से लेकर केंद्रीय मंत्री भी बौख नाग देवता के आगे नतमस्तक हो गए. उत्तराखंड के लोग अब इस ऑपरेशन की सफलता में साइंस और सनातन दोनों का ही बराबर योगदान मान रहे हैं. 

साइंस और सनातन की जीत

ये जीत विज्ञान की है. ये जीत साइंस और सनातन की है. कहते हैं कि विज्ञान और ईश्वर में आस्था दो अलग विषय हैं. लेकिन उत्तराखंड के सुरंग हादसे ने जिस तरह 41 जिंदगियां कैद हो गईं. उसके बाद जहां विज्ञान ने करिश्मा किया तो आस्था का चमत्कार भी होता दिखा. एक वक्त ऐसा भी आया जब आखिरी 24 घंटे सुरंग के बाहर टनल की एक तरफ से रिस कर बाहर आ रहे पानी ने जिस आकृति को उकेरा, उसे शिव रूप मान कर लोगों में आस्था की अलख जगी..

बौख नाग देवता का प्रकोप!

ठीक दीपावली के दिन हुए टनल हादसे (Uttarakhand Tunnel Update) को लोग भगवान बौख नाग देवता (Baukh Nag Devta) का प्रकोप मान रहे हैं. दरअसल बौख नाग देवता में आस्था रखने वाले स्थानीय लोग टनल बनाने वाली कंपनी से नाराज़ थे. माना जा रहा है कि कंपनी ने इनसे 2019 में मंदिर बनाने का वादा किया था. लेकिन मंदिर का काम नहीं हुआ. कई बार लोगों ने कंपनी के अधिकारियों को इसकी याद भी दिलाई, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. उल्टे टनल साइट पर कुछ दिन पहले ग्रामीणों का बनाया गया छोटा-सा मंदिर भी तोड़ दिया. संयोग से इसके ठीक बाद टनल में दुर्घटना हो गई

महिलाएं गाकर कर रहीं अर्चना

टनल के ठीक ऊपर जंगल में बौख नाग देवता (Baukh Nag Devta) का मंदिर है. यहां स्थानीय महिलाएं भी भगवान से इस मिशन की सफलता की कामना गा कर करती रही हैं. 
आखिरकार यही वजह है कि सिल्कयारा सुरंग के अंदर फंसे 41 श्रमिकों की सुरक्षित निकासी के लिए बाकायदा एक पुजारी को बुलाया गया. बौखनाग मंदिर के पुजारी ने सुरंग में पूजा अर्चना की और शंख बजाया ताकि रेस्क्यू अभियान सफल हो सके.

ऑपरेशन की सफलता की कामना

इस बीच केंद्रीय मंत्री वीके सिंह हों या फिर नितिन गडकरी हादसे के बाद बौखनाग मंदिर (Baukh Nag Devta) में पूजा पाठ कर 41 जिंदगियों की जान बचाने के लिए पूजा करते हैं. यही नहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी सफलता के करीब पहुंने से पहले मंदिर के आगे हाथ जोड़े दिखें. यही नहीं दुनिया के प्रसिद्ध टनलिंग एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स ने भी पूजा कर इस रेस्क्यू ऑपरेशन (Uttarakhand Tunnel Update) की सफलता की कामना की.

क्या है मान्यता?

मान्यता है कि बौखनाग देवता (Baukh Nag Devta) की उत्पत्ति वासुकी नाग के रूप में हुई. ये भी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण टिहरी जनपद के सेम-मुखेम से पहले यहां पहुंचे थे, इसलिए एक वर्ष सेम मुखेम और दूसरे वर्ष बौखनाग में भव्य मेला आयोजित होता है. बौखनाग के मन्दिर में लगने वाले मेले में नंगे पांव जाने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी होने की भी मान्यता है.

'सकुशल वापसी की प्रार्थना'

पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन राठौर भी अपनी भावनाएं रोक नहीं पाए. उन्होंने ट्वीट कर लिखा, साइंस और सनातन. बाबा बौख नाग जी से उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल में फंसे श्रमवीरों के यथाशीघ्र सकुशल वापसी हेतु प्रार्थना है. 

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