MP Politics: मध्य प्रदेश की 34 सीटों पर BJP-कांग्रेस की नजर, जानिए सत्ता का सियासी समीकरण
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MP Politics: मध्य प्रदेश की 34 सीटों पर BJP-कांग्रेस की नजर, जानिए सत्ता का सियासी समीकरण

MP Politics: बीजेपी और कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी है. मध्य प्रदेश की 34 विधानसभा सीटों पर इस बार बीजेपी और कांग्रेस में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. कांग्रेस इस बार इन 34 सीटों के लिए एक युवा नेता को आगे करती नजर आ रही है. जबकि बीजेपी की तरफ से पार्टी के दिग्गज नेता मोर्चा संभालेंगे.

MP Politics: मध्य प्रदेश की 34 सीटों पर BJP-कांग्रेस की नजर, जानिए सत्ता का सियासी समीकरण

MP Politics: प्रहलाद सेन/ग्वालियर। मध्य प्रदेश में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने कमर कसनी शुरू कर दी है. प्रदेश की 34 विधानसभा सीटों पर इस बार दोनों पार्टियों की खास नजर है, क्योंकि इन सीटों से सत्ता का रास्ता मिल सकता है. क्योंकि 2023 के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाली 34 सीटें कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए प्रदेश में सत्ता का दरवाजा खोलेंगी. क्योंकि इन 34 सीटों से ही 2018 में कांग्रेस का वनवास खत्म हुआ था, तो उपचुनाव में बीजेपी एक बार फिर सीटों की बदोलत सत्ता में बनी रही थी.  इसलिए इन सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस की खास नजर बनी हुई है. 

ग्वालियर-चंबल पर बीजेपी कांग्रेस की नजर 
दरअसल, प्रदेश की सियासत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाली ग्वालियर चंबल अंचल की 34 सीटों पर इस बार बीजेपी-कांग्रेस की खास नजर है. 2018 में कांग्रेस ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया था, कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन से बीजेपी को भारी नुकसान हुआ था, ऐसे में कांग्रेस एक बार फिर यहां अपने प्रदर्शन को दोहराना चाहती है, लेकिन तब ग्वालियर चंबल अंचल में सिंधिया कांग्रेस पार्टी को लीड कर रहे थे, अब जब सिंधिया बीजेपी में है और 2023 का चुनावी संग्राम नजदीक आ गया है ऐसे में कांग्रेस भी बीजेपी और सिंधिया से दो-दो हाथ करने के लिए ग्वालियर चंबल अंचल के रण में तैयार है. 

कांग्रेस ने जयवर्धन सिंह को किया आगे 
2023 के विधानसभा चुनाव से पहले ही दोनों दलों की नूरा कुश्ती अंदर खाने ग्वालियर चंबल अंचल में शुरू हो गई है, दोनों पॉलिटिकल पार्टी अपना अपना होमवर्क कर रही है, ग्वालियर चंबल अंचल में सिंधिया और बीजेपी को शिकस्त देने के लिए कांग्रेस ने युवा चेहरे जयवर्धन सिंह को आगे किया, जयवर्धन सिंह सिंधिया के जाने के बाद से ही ग्वालियर चंबल अंचल पर अपनी पैनी निगाहें बनाए हुए हैं, उनके लगातार ग्वालियर चंबल अंचल के अलग-अलग जिलों में दौरे हो रहे हैं, कांग्रेस को मजबूत और संगठित नेतृत्व देने के लिए जयवर्धन सिंह लगातार कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर अपनी पकड़ को मजबूत कर रहे हैं, हालांकि जयवर्धन सिंह की सिंधिया से तुलना करने पर बीजेपी जयवर्धन सिंह को सिंधिया से बेहद कमजोर नेता करार दे रही है. जयवर्धन सिंह के ग्वालियर चंबल अंचल में एक्टिव होने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है, चर्चा इस बात की है कि क्या जयवर्धन सिंह कांग्रेस में सिंधिया के रिक्त स्थान की पूर्ति करने में जुटे हुए हैं. 

सिंधिया और दिग्विजय सिंह सबसे बड़े क्षत्रप
दरअसल, सिंधिया और दिग्विजय सिंह ग्वालियर के सबसे बड़े क्षत्रप थे, लेकिन सिंधिया के बीजेपी में जाने के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं. अभी हाल ही में ग्वालियर चंबल अंचल के दौरे पर आए जयवर्धन सिंह के निशाने पर सिंधिया रहे, उन्होंने ग्वालियर में सिंधिया और उनके समर्थकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो बिकाऊ थे वह चले गए अब सिर्फ टिकाऊ लोग कांग्रेस में रह गए हैं. जो आने वाले दिनों में सिंधिया और बीजेपी को सबक सिखाने के लिए काफी है, कांग्रेस में सिंधिया के जाने के बाद जयवर्धन सिंह और उनके पिता दिग्विजय सिंह ऐसे दो क्षत्रप लीडर है, जिनकी मजबूत पकड़ ग्वालियर चंबल अंचल की हर विधानसभा सीट पर है, सिंधिया के कांग्रेस में रहते हुए ग्वालियर चंबल अंचल की विधानसभा सीटों पर सिंधिया का ही अधिकतर दखल रहता था, टिकट वितरण से लेकर संगठन की नियुक्तियों तक सिंधिया की पसंद को ही कांग्रेस पार्टी का आलाकमान हरी झंडी दिखाता था. ऐसे में अब जब सिंधिया नहीं है तो उनकी जगह युवा चेहरे जयवर्धन सिंह से भरने की दिग्विजय सिंह और कांग्रेस की कोशिश मैदान में साफ दिखाई दे रही है.

कांग्रेस बोली नेतृत्व की कमी नहीं 
सिंधिया वाले अंदाज में ही जयवर्धन सिंह ग्वालियर चंबल अंचल के दौरे कर रहे हैं, इस मामले में जब कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर जयवर्धन सिंह ग्वालियर चंबल अंचल की कमान संभालेंगे तो उसमें कोई एतराज नहीं है, वह युवा और अनुभवी नेता है, हालांकि कांग्रेस ने कहा ग्वालियर चंबल अंचल में कांग्रेस के पास नेतृत्व की कोई कमी नहीं है यहां नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह पीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत अशोक सिंह जैसे कई दिग्गज नेता कांग्रेस के पास है, जो बीजेपी को हर मोर्चे पर शिकस्त देने के लिए सक्षम और काबिल है.

बीजेपी ने किया पलटवार 
वहीं जयवर्धन सिंह के नेतृत्व पर बीजेपी ने भी पलटवार किया,  शिवराज सरकार में मंत्री और सिंधिया के कट्टर समर्थक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने जयवर्धन सिंह से सवाल करते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर गुलाम नबी आजाद चले गए क्या? वे बिकाऊ थे? या टिकाऊ थे? कांग्रेस के अंदर जनाधार वाले लोग हैं? ,जिनकी एक राजनीतिक छवि हैं? जो काम करना चाहते हैं? वह लोग आज कांग्रेस को छोड़कर जा रहे हैं?, बाबू जगजीवन राम जी. मुराजी देसाई जैसे कितने नाम बताऊं जो कांग्रेस को छोड़कर गए, जो कांग्रेस खुद अपनी लड़ाई नहीं लड़ पा रही है उसके लिए क्या बोले. अभी राजस्थान में क्या हुआ, अशोक गहलोत का नाम आया कि वह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे, दूसरे दिन फिर नाम आया कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे, उनके सारे समर्थक फार्म भरने दिल्ली पहुंच गए, लेकिन अचानक खड़गे साहब का नाम आता है. बीजेपी ने पूछा कि क्या 70 साल का बुजुर्ग देश के दौरे कर पाएगा, कांग्रेस पहले अच्छे लोगों का सम्मान करना सीखें, जयवर्धन सिंह इस बात का जवाब दें ,जयवर्धन सिंह सपना देख रहे हैं ग्वालियर चंबल अंचल में अपना अस्तित्व बनाने का, लेकिन सपना देखने में कोई दिक्कत नहीं कोई भी देख सकता है. 

बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में परिस्थितियां बदल गई हैं. ऐसे में 2023 का विधानसभा चुनाव यहां दिलचस्प होन की पूरी उम्मीद है. क्योंकि इस बार सिंधिया यहां बीजेपी को लीड करते नजर आएंगे, ऐसे में कांग्रेस भी तैयार नजर आ रही है.

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