DNA Analysis: जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के 3 साल हुए पूरे, धीरे-धीरे ऐसे बदल गई लोगों की जिंदगी
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DNA Analysis: जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के 3 साल हुए पूरे, धीरे-धीरे ऐसे बदल गई लोगों की जिंदगी

Importance of August 5: भारतीय इतिहास में 5 अगस्त का दिन 2 खास ऐतिहासिक घटनाओं की वजह से दर्ज हो चुका है. आज आपको इन दोनों घटनाओं के बारे में विस्तार से जानना चाहिए. 

DNA Analysis: जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के 3 साल हुए पूरे, धीरे-धीरे ऐसे बदल गई लोगों की जिंदगी

Importance of August 5: भारत के इतिहास में 5 अगस्त का दिन कई वजहों से ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है. इस दिन भारत के इतिहास की दो बड़ी ऐतिहासिक गलितयों को सुधारा गया था. तीन साल पहले 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35A को हटा दिया था. इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने में भारत को 70 वर्षों का समय लगा. इसी दिन 500 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद अयोध्या में राम मन्दिर का निर्माण शुरू हुआ था. ये बात 5 अगस्त 2020 की है. यानी आज का दिन बहुत खास है.

महबूबा-पाकिस्तान ने मनाया दुख

शिलान्यास के दो साल के भीतर राम मंदिर का 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. वहीं दूसरी तरफ कश्मीर में भी काफी बदलाव हो चुके हैं. आप सोचिए कि महबूबा भारत की नागरिक हैं. वो भारत की सुविधाएं लेती हैं. उन्हें भारत के लोगों के टैक्स के पैसों से तमाम सुविधाएं मिलती हैं और उसके बाद भी उनकी भाषा में पाकिस्तान जैसे देशों के बयान नजर आते हैं. अब नाम पाकिस्तान का आया है तो शुक्रवार का दिन पाकिस्तान के लिए बेचैनी से भरा रहा. कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फेल हो चुका है. इस बात को आप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इन ट्वीट से समझ सकते हैं. शहबाज शरीफ़ ने लिखा कि भारत ने 5 अगस्त 2019 को एकतरफा कार्रवाई की थी और अब भारत कश्मीर के लोगों को डरा धमका रहा है और मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है.

आपको याद होगा जिस वक्त कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाया गया था पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार थी, इमरान खान इसे अपने लिए बड़ी नाकामी के तौर पर देखते हैं और आज भी उनकी टीस, उनके दर्द को आप उनके ट्वीट से आसानी से समझ सकते हैं. आज भी इमरान संयुक्त राष्ट्र संघ में कश्मीर को लेकर हाथ फैला रहे हैं क्योंकि इससे अधिक उनके हाथ में और कुछ भी नहीं है.

इमरान खान ने भी किया ट्वीट

इमरान खान ने ट्वीट करके कहा, '5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर UNSC प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है. मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर की डेमोग्राफी बदलकर चौथे जिनेवा समझौते के तहत वॉर क्राइम किया है.'

अब सवाल ये उठता है कि तीन साल में कश्मीर में क्या कुछ बदल गया. सबसे पहले तो आपको वो मुख्य बदलाव जानने चहिए जिसे आज हम नया कश्मीर कहते हैं. पहले जम्मू कश्मीर के पास विशेष राज्य का दर्जा था, जो इसके बाद समाप्त हो गया. पहले वहां लोगों के पास दोहरी नागरिकता थी. वो जम्मू कश्मीर के भी नागरिक थे और भारत के भी नागरिक थे , लेकिन अब देश के बाकी लोगों की तरह वहां भी एक ही नागरिकता है. 

जम्मू- कश्मीर में हुए ये अहम बदलाव

इसके अलावा पहले ये क़ानून था कि जम्मू कश्मीर की कोई लड़की भारत के किसी राज्य के लड़के से शादी करती है तो उसका उसका परिवार की सम्पत्ति में अधिकार खत्म हो जाता था. उसके बच्चों की भी जम्मू कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है.

पहले जम्मू कश्मीर का अलग झंडा था लेकिन अब तिरंगा ही पूरे जम्मू कश्मीर में लहरा रहा है. पहले अनुच्छेद 356 लागू नहीं था. यानी वहां सरकार भंग होने पर राष्ट्रपति शासन नहीं लग सकता था लेकिन अब अनुच्छेद 356 जम्मू कश्मीर में लागू है. जम्मू कश्मीर अनुच्छेद 360 के दायरे में भी नहीं आता था, जिसके तहत राष्ट्रपति आर्थिक आपातकाल लागू करते हैं लेकिन इस फ़ैसले के बाद ये व्यवस्था भी वहां आ गई

अलग विधान यानी क़ानून होने की वजह से अल्पसंख्यकों को आरक्षण नहीं मिलता था. लेकिन अब वहां अल्पसंख्यकों को आरक्षण की व्यवस्था है. दूसरे राज्य के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे लेकिन अब ये कानून नहीं है. Right to Information Act यानी सूचना का अधिकार नहीं था लेकिन अब दूसरे राज्यों की तरह वहां भी लोगों के पास ये कानून है.

असेंबली का कार्यकाल 5 साल का हुआ

पहले जम्मू कश्मीर में सरकार का कार्यकाल 6 साल का होता था लेकिन अब वहां भी 5 साल के बाद चुनाव कराने का प्रावधान है. और सबसे अहम, पहले लद्दाख जम्मू कश्मीर का हिस्सा था लेकिन अब लद्दाख को भी अलग से केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया है. 

कश्मीर में और बहुत कुछ बदल चुका है जिसके लिए कश्मीर को हम नया कश्मीर कह रहे हैं. अनुच्छेद 370 हटने के बाद अप्रैल 2021 में जम्मू और कश्मीर में सरकार ने निवेश के लिए 456 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. ये कुल निवेश 23 हज़ार करोड़ से भी अधिक का है. मार्च 2022 में UAE ने जम्मू कश्मीर में 3 हजार करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया है. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब की तीन कंपनियां यहां भारी निवेश कर रही हैं. UAE का एक बड़ा ग्रुप, फूड और प्रोसेसिंग के क्षेत्र के जरिए जम्मू कश्मीर में 200 करोड़ रुपये से कारोबार शुरू करने जा रहा है. वर्ष 2019-20 में जम्मू कश्मीर का निर्यात 188 मिलियन US डॉलर यानी 1500 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2022 में 199 मिलियन US डॉलर यानी लगभग 1600 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया.

प्रदेश में खरीद सकते हैं जमीन

कश्मीर में अब तक 890 केंद्रीय क़ानून लागू किये जा चुके हैं, जिनका सीधा फायदा कश्मीर की जनता को मिल रहा है. अब तक कश्मीर के बाहर रहने वाले कई भारतीय कश्मीर में जमीन खरीद चुके हैं, ये पहले संभव नहीं था. कश्मीर में 2 हजार से ज्यादा प्रवासी घाटी में लौट चुके हैं.

2018 में पत्थरबाजी की कुल घटनाएं 1500 थी, ये आंकड़ा 2019 में करीब 2000 के करीब था लेकिन उसके बाद पत्थरबाजी की घटनाएं 90 फीसदी तक घट चुकी हैं. वर्ष 2018 में करीब 206 आतंकी घटनाएं हुई थी लेकिन वर्ष 2022 में ऐसी 101 घटनाएं ही हुई. वर्ष 2018 में जहां 86 नागरिक मारे गए थे वहीं 2022 में 20 नागरिक आतंकी घटनाओं के शिकार हुए. ये आंकड़ा भी दुखद है लेकिन इसमें संतोषजनक सुधार दिखता है.

लेकिन इन सबके बीच अभी कश्मीर में बहुत सी चुनौतियां हैं. कश्मीर में अब भी आतंकवाद पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं हो पाया है. अब भी कश्मीर में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, टारगेट किलिंग से कश्मीर में कानून व्यवस्था को चुनौती मिली है. आतंकवादी लोगों में डर पैदा करने के लिए उन्हें चुन चुन कर मार रहे हैं. इनमें लोगों में भी खासतौर पर कश्मीरी पंडितों और सरकार का समर्थन करने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. 

आतंकवाद बना हुआ है बड़ी चुनौती

इसके अलावा कश्मीर से बाहर गए प्रवासी कश्मीरियों खासकर कश्मीरी पंडितों की वापसी अभी भी दूर का सपना है, क्योंकि ज्यादातर कश्मीरी पंडित आतंकियों के डर से वापस आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. 370 के बाद सरकार ने कश्मीर में पंचायत चुनाव सम्पन्न कराए लेकिन अभी भी वहां पर आम चुनाव कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है. ये इसलिए भी जरूरी है ताकि जनता में सरकार के प्रति भरोसा पैदा हो सके.

चुनौतियां बड़ी हैं लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सच ये भी है कि हमारा कश्मीर बदल रहा है, विकास के नए पैमाने गढ़ रहा है. इसका जीता जागता सबसे बड़ा उदाहरण है कश्मीर में बढ़ता पर्यटन. कश्मीर में इसी वर्ष जनवरी से अब तक कश्मीर में 1 करोड़ 6 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंच चुके हैं. 

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