Assam Meghalaya Border: मोबाइल इंटरनेट बंद, गाड़ियों पर रोक; 144 लागू...हिंसा के बाद असम-मेघालय बॉर्डर पर ऐसे हैं हालात
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Assam Meghalaya Border: मोबाइल इंटरनेट बंद, गाड़ियों पर रोक; 144 लागू...हिंसा के बाद असम-मेघालय बॉर्डर पर ऐसे हैं हालात

Meghalaya सरकार ने राज्य के पूर्वी हिस्से में कम से कम सात खासी-जैंतिया हिल्स जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर शनिवार तक के लिए रोक लगा दी है. असम से मेघालय के विभिन्न प्रवेश बिंदुओं पर पुलिसकर्मियों ने बैरिकेड्स लगा दिए हैं और लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि वे असम की नंबर प्लेट वाले वाहनों में मेघालय न जाएं.

Assam Meghalaya Border: मोबाइल इंटरनेट बंद, गाड़ियों पर रोक; 144 लागू...हिंसा के बाद असम-मेघालय बॉर्डर पर ऐसे हैं हालात

Assam Meghalaya Dispute: असम-मेघालय सीमा पर एक गांव में मंगलवार तड़के हुई हिंसक झड़पों के बाद स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन शांति कायम है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हिंसक झड़पों में छह व्यक्तियों की मौत के बाद इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. अधिकारी ने कहा कि संघर्ष स्थल और आसपास के इलाकों में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत प्रतिबंध भी लगाया गया है.

अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा को बताया, स्थिति शांतिपूर्ण है और जब तक माहौल पूरी तरह से सामान्य नहीं हो जाता तब तक सुरक्षाकर्मियों को वहां तैनात रखा जाएगा. हमारे मजिस्ट्रेट रोजाना घटनास्थल का दौरा कर रहे हैं.

इस बीच, मेघालय सरकार ने राज्य के पूर्वी हिस्से में कम से कम सात खासी-जैंतिया हिल्स जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर शनिवार तक के लिए रोक लगा दी है. गृह विभाग के सचिव सीवीडी डेंगदोह ने कहा, शांति भंग करने के लिए सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं को 48 घंटे के लिए बंद किया जाता है.  मंगलवार को हिंसा भड़कने के कुछ घंटों के बाद ही सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं.

बता दें कि असम-मेघालय सीमा के साथ पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में एक विवादित स्थान पर मंगलवार तड़के हुई हिंसा में एक वन रक्षक सहित छह लोगों की मौत हो गई थी. झड़प उस समय हुई जब अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों से लदे एक ट्रक को असम के वनकर्मियों द्वारा रोका गया था. घटना के बाद यात्री कारों पर सिलसिलेवार हमलों के बाद असम सरकार ने वाहनों को मेघालय ले जाने से रोक दिया. 

असम से मेघालय के विभिन्न प्रवेश बिंदुओं पर पुलिसकर्मियों ने बैरिकेड्स लगा दिए हैं और लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि वे असम की नंबर प्लेट वाले वाहनों में मेघालय न जाएं. असम और मेघालय के बीच 884.9 किलोमीटर लंबी अंतर-राज्यीय सीमा से सटे 12 क्षेत्रों में लंबे समय से विवाद है और जिस स्थान पर हिंसा हुई वह उनमें से एक है.  दोनों राज्यों ने छह क्षेत्रों में विवाद को समाप्त करने की दिशा में इस साल मार्च में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. मेघालय को 1972 में असम से अलग किया गया था और तब से इसने असम पुनर्गठन अधिनियम, 1971 को चुनौती दे रखी है, जिसके अनुसार दोनों राज्यों के बीच सीमा का सीमांकन किया गया था.

मेघालय के सीएम ने क्या कहा?

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने गुरुवार को कहा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि वह सीमा पर असम पुलिस की ओर से की गई गोलीबारी की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने के उनके अनुरोध पर विचार करेंगे. उन्होंने कहा कि अमित शाह के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने गोलीबारी में मारे गए लोगों के लिए न्याय और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

संगमा ने इस बात पर जोर दिया कि असम के पुलिसकर्मियों ने मेघालय में पश्चिम जयंतिया हिल्स के मुकरोह गांव में निर्दोष लोगों पर गोली चलाई थी.  संगमा ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार से असम के साथ सीमा विवाद में हस्तक्षेप करने का भी अनुरोध किया ताकि दोनों राज्यों के बीच संवाद और विश्वास में सुधार हो सके.  उन्होंने कहा,गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि वह आज ही सीमा पर गोलीबारी की जांच के हमारे अनुरोध पर कार्रवाई करेंगे. उन्होंने कहा कि दोषियों को सजा मिलेगी लेकिन इस समय हमें शांति बनाए रखनी चाहिए. अमित शाह के साथ हुई बैठक में संगमा के संग उनके कैबिनेट सहयोगी भी थे.

ईंधन के परिवहन को रोका

इस बीच, असम में पेट्रोलियम कर्मचारियों के शीर्ष निकाय ने गुरुवार को कहा, असम से जा रहे वाहनों पर हमले की खबरों के बाद इसने मेघालय में ईंधन के परिवहन को रोक दिया. असम पेट्रोलियम मजदूर यूनियन (एपीएमयू) ने आईओसी, एचपीसीएल, और बीपीसीएल समेत सभी पीएसयू तेल विपणन कंपनियों को अलग-अलग पत्र भेज कर टैंकरों में ईंधन नहीं भरे जाने के यूनियन के फैसले के बारे में अवगत कराया.

गुवाहाटी स्थित आईओसी के पूर्वोत्तर मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस तरह का पत्र मिलने की पुष्टि की है. हालांकि, नुमालीगढ़ रिफाइनरी के प्रवक्ता ने बताया कि संबंधित अधिकारियों को अब तक पत्र नहीं मिला है. बीपीसीएल इस रिफाइनरी से अपने उत्पाद मेघालय भेजता है. एचपीसीएल अधिकारियों से इस संबंध में अब तक कोई टिप्पणी नहीं मिली है.

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