अगर आपका पड़ोसी आपसे नहीं है खुश, तो आप अभी तक नहीं बन पाए हैं सच्चे मुसलमान!
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अगर आपका पड़ोसी आपसे नहीं है खुश, तो आप अभी तक नहीं बन पाए हैं सच्चे मुसलमान!

The Right of the Neighbor: इस्लाम में अपने पड़ोसियों का ख्याल रखने के बारे में बताया गया है. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि पड़ोसियों के क्या हक हैं. 

अगर आपका पड़ोसी आपसे नहीं है खुश, तो आप अभी तक नहीं बन पाए हैं सच्चे मुसलमान!

The Right of the Neighbor: इस्लाम में पड़ोसियों का बहुत ख्याल रखने की ताकीद की गई है. वह पड़ोसी ही हैं, जो आपको वक्त जरूरत काम आते हैं. इसके अलावा अगर रात के वक्त आपको कोई तकलीफ होती है, तो सबसे पहले पड़ोसी ही आपके पास आता है. पड़ोसी हर दुःख- दर्द में सबसे पहले आपके पास पहुँचता है. ऐसे में अगर पड़ोसियों से आपके रिश्ते अच्छे हैं, तो आप एक सच्चे मोमिन हैं. यहां तक के कुरआन में ऐसी हिदायत दी गई है कि आपका पड़ोसी अगर कोई गैर-मुस्लिम है, तो भी आपको पड़ोसियों के सारे आदाब और हक़ निभाने होंगे. इस्लाम में पड़ोसियों के हक के बारे में बताया गया है. आईए इनके बारे में जानते हैं.

पड़ोसियों के हक पर हदीस

हदीस बुखारी मुस्लिम के मुताबिक "हजरत अबु हुरैरा (र.) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया: खुदा की कसम! वह ईमान नहीं रखता: खुदा की कसम! वह ईमान नहीं रखता! खुदा की कसम: वह ईमान नहीं रखता! लोगों ने घबराकर पूछा: कौन? ऐ अल्लाह के रसूल! आप (स.) ने फरमाया: वह शख्स ईमान नहीं रखता जिसका पड़ोसी उसके जरिए तकलीफ देने और सताने से महफूज न हो." इस तरह हम देख सकते हैं कि अगर कोई शख्स अपने पड़ोसियों को नुक्सान पहुंचाता है या फिर उसे परेशान करता है, तो वह सच्चा मुसलमान नहीं है. इसलिए सच्चे मुसलमान को चाहिए कि अपने पड़ोसी की देखभाल करे और उन्हें तकलीफ न पहुंचाए.

भूखा पड़ोसी

हजरत अब्दुल्लाह इब्ने-अब्बास (र.) का बयान है कि मैंने अल्लाह के रसूल (स.) को यह फरमाते हुए सुना है: मोमिन ऐसा नहीं होता जो पेट भर खा कर सोए और उसका पड़ोसी भूखा सोए. (हदीस: मिशकात). इस हदीस से ये साफ होता है कि अगर आप अच्छा खा रहे हैं, तो आप अपने पड़ोसी का भी ख्याल रखें. उसे भी खाने-पीने के बारे में पूछें. अगर आप ऐसा नही करते हैं तो एक अच्छे मुसलमान नहीं हो सकते हैं. 

पड़ोसियों की देखभाल

हजरत अबूजर गिफारी (र.) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल ने फरमाया: ऐ अबूजर! जब तुम गोश्त पकाओ तो शोरबा ज्यादा कर दो और पड़ोसियों की देखभाल करो. (जिसके यहां सालन कम हो उसके यहां भेजो) (हदीस: मुस्लिम)

पड़ोसियों को तोहफा

हजरत अबु हुरैरा (र.) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (स.) ने मुसलमान औरतों को मुखातब करते हुए फरमाया: ऐ मुसलमान औरतों! कोई औरत अपनी पड़ोसन को मामूली से मामूली चीज तोहफा भेजने को छोटा न समझे: अगर उसके पास बकरी के खुर ही हों तो वही भेजे. 

पड़ोसियों का हक

हजरत आइशा (र.) फरमाती है कि मैंने पूछा: ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे दो पड़ोसी हैं, तो उनमें से किसके यहां मैं कोई चीज तोहफे में भेजूं? नबी (स.) ने फरमाया: उस पड़ोसी के यहां जिसका दरवाजा तेरे दरवाजे से ज्यादा करीब हो.

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