Gyanvapi मामले में ओवैसी ब्रदर्स और अखिलेश यादव पर दर्ज होगा मुकदमा? फैसला आज
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Gyanvapi मामले में ओवैसी ब्रदर्स और अखिलेश यादव पर दर्ज होगा मुकदमा? फैसला आज

Gyanvapi Masjid Case में आज इलाहाबाद हाई कोर्ट और वाराणसी अदालत में अहम सुनवाई होगी. जानिए आज अदालत में किन किम मामलों में सुनवाई होगी. 

Gyanvapi मामले में ओवैसी ब्रदर्स और अखिलेश यादव पर दर्ज होगा मुकदमा? फैसला आज

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मामले में आज अहम सुनवाई होने जा रही है. मंगलवार को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट और वाराणसी जिला अदालत में भी सुनवाई होगी. हाई कोर्ट में पूजा की सुनवाई को चुनौती देने वाली अर्ज़ी पर तो वाराणसी अदालत में अखिलेश यादव, असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी, इंतजामियां कमेटी, शहर काजी वगैरह पर मुकदमा दर्ज करने को लेकर भी आज सुनवाई होगी. 

धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप
सिविल कोर्ट के एडवोकेट हरिशंकर पाण्डेय ने आईपीसी की धारा 156-3 के तहत प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज करने के लिए कोर्ट से मांग की है. ज्ञानवापी मस्जिद की वजूखाने में 16 मई को कथित शिवलिंग मिला था. वहां हाथ पैर धोए जाने, थूकने और गंदा पानी बहाने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया है. इस अर्ज़ी पर अदालत में आज पहली सुनवाई होगी और तय होगा कि अखिलेश यादव, ओवैसी ब्रदर्स पर के खिलाफ केस चलाया जाए या नहीं. 

क्या कहा था अखिलेश यादव ने?
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बयान में कहा था कि पीपल के पेड़ के नीचे पत्थर रखकर झंडा लगा दो तो वही भगवान और शिवलिंग हैं. अखिलेश यादव के इस बयान पर हिंदुओं ने ऐतराज़ जताया और भावनाएं आहत होने की भी बात कही. 

इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन पर भी हिंदुओं के धार्मिक मामलों और स्वयंभू आदि विश्वेश्वर के खिलाफ अपमानजनक बातें कही हैं. इस पूरे मामले में वाराणसी की अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी, शहर काजी और शहर के उलेमा समेत सैकड़ों दूसरे लोगों पर भी मुकदमा दर्ज करने की मांग गई है. पिछले 15 नवंबर को अदालत ने अर्ज़ी मंजूर कर ली थी. 

इसके अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई की बात करें तो वहां श्रृंगार गौरी की पूजा की सुनवाई को चुनौती देने वाली अर्ज़ी पर आज सुनवाई होगी. वाराणसी अदालत ने श्रृंगार गौरी की पूजा की मांग करने वाली अर्ज़ी को सुनवाई योग्य माना था. जिसके बाद मस्जिद कमेटी ने इस पर ऐतराज जताया और वाराणसी कोर्ट के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है.

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