देश भर में गधों की प्रजाति पर संकट देख वैज्ञानिकों ने जताई चिंता, यूपी में संख्या बढ़ाने को लेकर बनाई गई कार्ययोजना
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देश भर में गधों की प्रजाति पर संकट देख वैज्ञानिकों ने जताई चिंता, यूपी में संख्या बढ़ाने को लेकर बनाई गई कार्ययोजना

देशभर में गधों की संख्या में लगातार कमी आ रही है. यूपी में भी गधों की संख्या में करीब 72 प्रतिशत की कमी आई है. इसी क्रम में लखनऊ पशुपालन निदेशालय में आयोजित कार्यशाला में गधों की कम होती संख्या पर जानकारों ने मंथन किया. 

फाइल फोटो.

लखनऊ/विशाल रघुवंशी: देश में गधों की प्रजाति पर संकट आ गया है. कई राज्यों में गधों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. एक समय था जब सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए गधों का काफी इस्तेमाल होता था. यातायात के साधनों में बढ़ोतरी की वजह से गधों का उपयोग दिन प्रतिदिन कम होता गया. अब देश में गधों की संख्या में रिकॉर्ड गिरावट आ रही है. उत्तर प्रदेश में गधों की संख्या में 71.72 प्रतिशत की गिरावट आई है. प्रदेश में जहां साल 2012 में गधों की संख्या 57 हजार थी, वो अब आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक घटकर 16 हजार दो हो गई है. पुराने समय तक बोझ ढोने के लिए गधा पालन होता था, लेकिन जैसे-जैसे मशीनों का उपयोग बढ़ता गया. गधों की उपयोगिता खत्म होती गई. इसी विषय को लेकर लखनऊ पशुपालन निदेशालय में कार्यशाला आयोजित की गई. 

पशुपालन निदेशालय में हुआ मंथन
लखनऊ पशुपालन निदेशालय में आयोजित कार्यशाला में गधों की कम होती संख्या पर जानकारों ने मंथन किया. इस दौरान गधों की संख्या बढ़ाने को लेकर कार्ययोजना को भी बनाया गया. यूपी के कुछ खास जिलो में जहां गधा अभी भी प्रयोग में है वहां विशेष प्रोत्साहन के तहत कार्यक्रम चलाने पर भी सहमति बनी. गधों की घटती आबादी से वैज्ञानिक भी चिंतित हैं. उनका कहना है कि प्राकृतिक संतुलन के लिहाज से भी गधों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. 

क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में गधों की संख्या में यह कमी सीमा से उनका अवैध तरीके से दूसरे देशों में निर्यात बताया गया है. कई देशों में लोग इनका मीट भी खाते हैं. इनकी खाल का भी उपयोग कई चीजों में किया जाता है. कई व्यापारी गधों की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री कर रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि गधों का इस्तेमाल कम होने से और अवैध तरीके से इन्हें मारने से इनकी संख्या कम हुई. 

चित्रकूट में लगता है खास गधों का बाजार
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में दीपावली अमावस्या मेला के दौरान मंदाकिनी तट पर गधों और खच्चरों का खास बाजार लगता है. जहां गधों की सारी नस्लें देखने को मिलती है. गधों के इस अनूठे मेले में देश के विभिन्न प्रदेशों से ही नहीं विदेश से भी व्यापारी और खरीदार आते हैं. यह गधा मेला विभिन्न नस्लों के लिए दूर-दूर तक अपनी पहचान रखता है. गधा मेला की शुरुआत चित्रकूट में मुगल काल में हुई थी. मुगल शासक औरंगजेब के सैन्य बल ने घोड़ों की कमी हो गई थी, जिसको पूरा करने लिए यहां गधा मेला लगाया था. 

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