Jaipur में बनीं Kali Devi की मूर्ति, केरला के 500 साल पुराने मंदिर में होगी प्राण प्रतिष्ठा, जानिए कैसा है देवी का स्वरूप
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Jaipur में बनीं Kali Devi की मूर्ति, केरला के 500 साल पुराने मंदिर में होगी प्राण प्रतिष्ठा, जानिए कैसा है देवी का स्वरूप

Kali Devi idol made in Jaipur :  दुनियाभर में मूर्ति कला के लिए प्रसिद्ध गुलाबी नगरी में रविवार को एक और कीर्तिमान स्थापित हो गया. परकोटे से खजाने वालों के रास्ते निवासी मूर्तिकार मुकेश भारद्वाज ने एक ही सिला पर साढ़े 18 फीट की मां काली देवी को मूर्ति बनाई है. मां काली देवी की यह मूर्ति केरला के त्रिवेंद्रम के वैंगानूर में पौर्णिमिका मंदिर में बाल त्रिपुर सुंदरी के स्वरूप में स्थापित होगी

Jaipur में बनीं Kali Devi की मूर्ति, केरला के 500 साल पुराने मंदिर में होगी प्राण प्रतिष्ठा, जानिए कैसा है देवी का स्वरूप

Kali Devi idol made in Jaipur :  दुनियाभर में मूर्ति कला के लिए प्रसिद्ध गुलाबी नगरी में रविवार को एक और कीर्तिमान स्थापित हो गया. परकोटे से खजाने वालों के रास्ते निवासी मूर्तिकार मुकेश भारद्वाज ने एक ही सिला पर साढ़े 18 फीट की मां काली देवी को मूर्ति बनाई है.

मां काली देवी की यह मूर्ति केरला के त्रिवेंद्रम के वैंगानूर में पौर्णिमिका मंदिर में बाल त्रिपुर सुंदरी के स्वरूप में स्थापित होगी. मूर्ति का आज जूनागढ़ से आए जगतगुरु सूर्याचार्य कृष्ण देवानंद गिरीजी महाराज ने वैदिक मंत्रोंच्चारण से पूजा अर्चना के बाद मूर्ति को करेला रवाना किया. उनके साथ आमेर की शिला माता के पुजारी पंडित बनवारी लाल शर्मा सहित पांच विद्वानों ने मंत्रोचार कर मूर्ति का पूजन कार्य किया.

16 दिन में 2400 किमी का सफर कर पहुंचेगी केरला

केरला से मूर्ति लेने आए पूर्णिमिका मंदिर के ट्रस्टी भुवन चंद्र ने बताया कि मां आदि देवी का यह मंदिर करीब 500 सौ साल पुराना है. जिसमें मां बाल त्रिपुर सुन्दरी के स्वरूप में भक्तो की मनोकामना को पूरा करती है. यह मंदिर महीने में एक बार ही पूर्णिमा के दिन खुलता है. कई साल पहले आतताइयो माता की मूर्ति को खंडित कर दिया था.  अब ट्रस्ट ने जयपुर में माता की साढ़े 18 फीट की विशाल मूर्ति को बनवाया है. यह मूर्ति केरला में करीब 16 दिन बाद पहुंचेगी, जहां शुभ मुहूर्त में विधि विधान से माता की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी.

राजस्थान के भैंसलाना के काले पत्थर की बनी है मूर्ति

मूर्तिकार मुकेश भारद्वाज ने बताया कि उनके दादा रामस्वरूप भारद्वाज से प्रेरणा लेकर वे मूर्ति बनाने का काम कर रहे है. उनके बाद पिता किंग कॉन्ग ने इस कला को आगे बढ़ाया. इस मूर्ति को बनाने में करीब तीन साल लगे है. इसे बनाने में राजस्थान के ही भैंसलाना के पत्थर का प्रयोग किया गया है. मां काली देवी के साथ ही 15 अन्य मूर्ति भी बनाई गई है.

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