बस्सी में जीएसएस पर नहीं है यार्ड लाइटें, जान जोखिम में डाल काम करते हैं कर्मचारी
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बस्सी में जीएसएस पर नहीं है यार्ड लाइटें, जान जोखिम में डाल काम करते हैं कर्मचारी

जीएसएस में पिछले चार साल से यार्ड लाइटें नहीं होने के कारण बस्सी उपखंड के 11 जीएसएस जिनमें भूड़ला, मदनपुरा, पड़ासोली, मानसर खेड़ी, कानोता, बगराना, खिजुरिया, सुमेल सहित अन्य बिजली ग्रिड अंधेरे में है. 

बस्सी में जीएसएस पर नहीं है यार्ड लाइटें, जान जोखिम में डाल काम करते हैं कर्मचारी

Bassi: जीएसएस में पिछले चार साल से यार्ड लाइटें नहीं होने के कारण बस्सी उपखंड के 11 जीएसएस जिनमें भूड़ला, मदनपुरा, पड़ासोली, मानसर खेड़ी, कानोता, बगराना, खिजुरिया, सुमेल सहित अन्य बिजली ग्रिड अंधेरे में है. कर्मचारियों ने सुविधा के लिए अपने स्तर पर बल्ब लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था की है लेकिन पर्याप्त रोशनी के अभाव में हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है. 

रात के समय लाइट बारी बदलने के लिए कर्मचारियों को रोशनी की जरूरत रहती है और कम रोशनी में फ्यूज बदलने में परेशानी होती है. बस्सी उपखंड के कई जीएसएस जिनमें भूड़ला, मानसर खेड़ी, बगराना, सुमेल, खजूरिया, मदनपुरा, पड़ासोली में जीओ-डीओ भी खराब पड़े हुए हैं. वीसीबी ब्रेकर भी खराब पड़े हुए हैं और समय पर मेंटेनेंस नहीं होने से हादसा होने की संभावना बनी रहती है. कई जगहों पर तो जीएसएस राम भरोसे ही चलाए जा रहे हैं.

2 कार्मिकों के भरोसे जीएसएस का काम
भूड़ला जीएसएस पर दो कर्मचारी कार्यरत है, जिससे काम की अधिकता होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. जीएसएस से जुड़े लंबे एरिया में लोड ज्यादा होने के कारण हर समय परेशानी रहती है. वहीं दो कर्मचारियों को जीएसएस चलाना, 11केवी तार खींचना, मीटर लगाना, ट्रांसफार्मर जांच करना, शिकायतों का निस्तारण और अन्य विभागीय कार्य करना पड़ता है, ऐसे में दो कर्मचारी दिनभर काम में लगे रहते है फिर भी काम पूरे नहीं होते है और बिजली आपूर्ति भी बाधित होती है.

मदनपुरा में बिल्डिंग जर्जर
बांसखोह एईएन कार्यालय अधीनस्थ मदनपुरा जीएसएस भवन जर्जर हो चुका है. इस तपती धूप में कर्मचारियों को कई बार तो जर्जर भवन के बाहर ही बैठना पड़ता है. कर्मचारियों ने उच्च अधिकारी को लिखित शिकायत भी दी है लेकिन आज तक किसी अधिकारी ने सुनवाई ही नहीं की है. साथ ही मदनपुरा जीएसएस का मेन दरवाजा भी टूट चुका है जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने का अंदेशा है.

इनका कहना है कि
यार्ड में लाइट की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में अपने स्तर पर ही बल्ब लगाकर कार्य करते है. कई बार बल्ब फ्यूज हो जाते है वो भी रिस्क लेकर वापस लगाने पड़ते है. पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण फ्यूज बांधने सहित अन्य कार्य करते समय परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

महेन्द्र मीना, जीएसएस संविदा कर्मचारी भूड़ला
यार्डों की लाइटें लगाने को लेकर प्रयास चल रहे है, जल्द ही लाइटें लगा दी जाएगी. भवन के लिए अधिकारियों को लिखकर दे रखा है कि बजट के अभाव में नहीं हो पाया जैसे ही बजट आता है वहां तुरंत रिपेयरिंग करवा दी जाएगी.

Reporter: Amit Yadav

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