गहलोत ने केन्द्र सरकार से जीएसटी क्षतिपूर्ति की अवधि को 5 वर्ष बढ़ाने की मांग की
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गहलोत ने केन्द्र सरकार से जीएसटी क्षतिपूर्ति की अवधि को 5 वर्ष बढ़ाने की मांग की

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्द्र सरकार से जीएसटी क्षतिपूर्ति की अवधि को जून 2022 से 5 वर्ष बढ़ाकर जून 2027 तक करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना काल में सख्ती से किए गए लॉकडाउन से राजस्व पर अत्यधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. 

 CM गहलोत ने केन्द्र सरकार से जीएसटी क्षतिपूर्ति की अवधि को बढ़ाने की मांग की.

Jaipur: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्द्र सरकार से जीएसटी क्षतिपूर्ति की अवधि को जून 2022 से 5 वर्ष बढ़ाकर जून 2027 तक करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना काल में सख्ती से किए गए लॉकडाउन से राजस्व पर अत्यधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. जीएसटी लागू करते समय कहा गया था कि 5 वर्ष में राजस्व में स्थिरता आ जाएगी और राज्यों के राजस्व में निश्चित वृद्धि दर की स्थिति प्राप्त होगी.

परन्तु अभी तक जीएसटी राजस्व प्राप्तियां अपेक्षित रूप से स्थिर नहीं हो पाई हैं. आर्थिक मंदी एवं कोरोना महामारी के कारण राज्यों की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है. कोई भी राज्य इस विषम आर्थिक संकट का सामना अकेले करने में सक्षम नहीं है. इसलिए राज्यों को दिए जाने वाले जीएसटी क्षतिपूर्ति की अवधि को 5 वर्ष बढ़ाना आवश्यक है.

गहलोत ने कहा कि राज्य के कई बार जीएसटी काउंसिल एवं भारत सरकार के स्तर पर वर्ष 2017-18 से मई 2022-23 तक राजस्थान को देय 4822.63 करोड़ रूपए की जीएसटी क्षतिपूर्ति की बकाया राशि राज्य को देने के मामले को उठाया गया है लेकिन यह राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई है.सभी राज्यों की भी यह मांग है कि उनकी बकाया राशि को शीघ्र जारी किया जाए और भविष्य में इसे ऋण के रूप में देने की बजाए इसे राज्यों को अनुदान के रूप में दिया जाए.

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मुख्यमंत्री ने जीएसटी की कर दरों को सुसंगत करने का भी आग्रह किया है ताकि इसकी बेहतर अनुपालना सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने कहा कि किसानों, दिव्यांगों और मध्यम वर्ग के घरेलू उपयोग में आने वाली वस्तुओं पर करारोपण को युक्तिसंगत किया जाना चाहिए और इसमें कोई भी परिवर्तन हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही किए जाने चाहिए.

गहलोत ने कहा कि कुछ वस्तुओं जैसे खाद्य तेलों पर इन्वर्टेड़ ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण उपलब्ध रिफंड को रोकने के संबंध में लिए गए निर्णय, टैक्स दरों में वृद्धि और कर के दायरे से बाहर वाली वस्तुओं पर कर लगाने के संबंध में जीएसटी काउंसिल में लिए गए निर्णयों का क्रियान्वयन कम से कम एक वर्ष तक स्थगित रखा जाना चाहिए.

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