Naglok in Chhattisgarh: ये है छत्तीसगढ़ का नागलोक, यहां की गुफा से पाताल लोक जाने का है रास्ता, जानिए क्या है मान्यता
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Naglok in Chhattisgarh: ये है छत्तीसगढ़ का नागलोक, यहां की गुफा से पाताल लोक जाने का है रास्ता, जानिए क्या है मान्यता

Ngaloka On Earth In Chhattisgarh: आज हम आपको छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित ऐसे प्राकृतिक स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर एक दो नहीं बल्कि 29 से भी ज्यादे प्रजाति के जहरीले सांप पाए जाते हैं. यहां कोतेबीरा धाम गुफा की मान्यता है कि यह गुफा नागलोक का प्रवेश द्वार है. आइए जानते हैं इससे जुड़ी मान्यताओं और रोचक जानकारियों के बारे में.

Naglok in Chhattisgarh: ये है छत्तीसगढ़ का नागलोक, यहां की गुफा से पाताल लोक जाने का है रास्ता, जानिए क्या है मान्यता

संजीत यादव/ जशपुरः आज तक आपने कई प्राचीन मंदिर या प्राकृतिक दृश्य को देखे या सुने होगे, जहां पर चमत्कारी घटनाएं होती रहती हैं और इस स्थान पर लोग आस्था के साथ आते हैं. कुछ स्थान डरावने तो कुछ स्थान काफी खुबसुरत होते हैं. ऐसे में आज हम ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे नागलोक के नाम से जाना जाता है. इस स्थान पर स्थित गुफा को लेकर मान्यता है कि इस गुफा से सीधे नागलोक का रास्ता है और किसी समय में देवता इसी गुफा के रास्ते सर्प का रूप धारण करके पाताल लोक गए थें. आइए जानते हैं इस गुफा से जुड़े मान्यताओं और कहानियों के बारे में.

यहां पाए जाते हैं जहरीले सांप
दरअसल छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बसे जशपुर जिले के ओडिशा से जोड़ने वाली सड़क हाईवे के किनारे फरसाबहार ब्लाक और इससे लगे आसपास के गांवो को नागलोक के नाम से जाना जाता है. इस गांव में किंग कोबरा, करैत और ग्रीन पिट वाईपर जैसे विषैल सर्प पाए जाते हैं. इसलिए इसे इलाके को नागलोक के नाम से जाना जाता है.

यहां से जाता है नागलोक को रास्ता
जशपुर जिले के कोतेबीरा धाम में नागलोक के कई सारी कहानिया प्रचलित है. इसके साथ ही इस क्षेत्र में एक किवदंती भी चली आ रही है. यहां लोगों कि मान्यता है कि यहां स्थित कोतेबीरा धाम से सीधे नागलोक का रास्ता है. लोग इस गुफा को ही नागलोक का प्रवेश द्वार कहते हैं. लोगों की मानें तो यहां प्राचीन समय में यहां देवदूत रहा करते थे. कुछ लोगों ने लालच में आकर उनसे सोने चांदी के बर्तन छीनने का प्रयास किया तो देवता सर्प का रूप धारण कर इसी रास्ते पाताल लोक चले गए. इस शिवधाम में सावन माह के नागपंचमी और महाशिवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़ जुटती है.

यहां पाए जाते हैं कई दुर्लभ प्रजाति के सांप
इस क्षेत्र में किंग कोबरा, करैत जैसे विषधर सांपों की संख्या ज्यादा है. वहीं, विचित्र प्रजाति का सांप ग्रीन पीट वाइपर और सरीसृप प्रजाति के जीव-ग्रीन कैमेलियन, सतपुड़ा लेपर्ड लिजर्ड भी यहां पाए जाते हैं. ग्रीन पिट वाइपर का वैज्ञानिक नाम ट्रिमर सेरसस सलजार है. जो छत्तीसगढ़ के अलावा सिर्फ अरुणाचल प्रदेश में ही पाया जाता है. इसका विष कोबरा की अपेक्षा धीमा असर करता है. इस सांप का उल्लेख हॉलीवुड के हैरी पॉटर श्रृंखला की फिल्मों में किया गया है.

अब तक 29 प्रजातियों के सांप मिलने का है दावा
सर्प के जानकार और रेस्क्यू करने वाले शिक्षक केसर हुसैन का कहना है कि जशपुर क्षेत्र में कई  मात्रा में सांप पाए जाते हैं. लगभग छत्तीसगढ़ में जितने भी प्रजाति के सांप पाए जाते हैं. उनमें से जशपुर में 80 फीसदी सांपों की प्रजाति जशपुर में मौजूद है. उन्होंने बताया की सांपों के रेस्क्यू के दौरान 29 प्रजातियों के पाए जाने का दावा किया है. उन्होंने बताया कि जशपुर में सांपों को लेकर कोई सर्वे नहीं किया गया है. अगर सर्वे हो तो और भी प्रजातियों के सांप मिल सकते हैं. केसर हुसैन ने आगे बताया कि क्षेत्र की भुरभुरी मिट्टी और आर्द्र जलवायु सांपों के प्रजनन और भोजन के लिए आदर्श भौगोलिक स्थिति है. यही वजह है कि यह नागलोक के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहा है.

पिछले दो साल में 94 लोगों की हुई है मौत
नागलोक के रूप में पहचान बना चुके जशपुर जिले में सर्पदंश से पिछले दो सालों में 94 लोगों की मौत हुई है. सर्पदंश से अधिकांश मौतें पीड़ित को समय पर मेडिकल सहायता न मिलने की वजह से होती है. जागरुकता की कमी से लोग सर्पदंश पीड़ित को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और जड़ी बूटी से इलाज भी कराते हैं. इससे जहर शरीर में फैल जाता है.

लोगों को किया जा रहा जागरूक
आपको बता दें कि इस इलाके में सर्पदंश से अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन अब साल दर साल यहां मौतों का आंकड़ा कम होता जा रहा है. उसका बड़ा कारण यह है कि यहां वन विभाग सहित प्रशासन और युवाओं की साझा पहल से जनजागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है. इसके साथ ही अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. जिसकी वजह से सर्पदंश से मृत्य दर में थोड़ी कमी आई है.

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(disclaimer: इस लेख में दी गई मान्यताएं लोक आस्था पर आधारित है. zee media इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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