Varun Gandhi ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने का किया समर्थन, कांग्रेस को सुनाई 'खरी-खोटी'
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Varun Gandhi ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने का किया समर्थन, कांग्रेस को सुनाई 'खरी-खोटी'

Varun Gandhi attack on Congress: गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने के फैसले का विरोध करने पर बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है और कहा है कि अकारण आलोचना नकारात्मकता का आधार बनती है.

Varun Gandhi ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने का किया समर्थन, कांग्रेस को सुनाई 'खरी-खोटी'

Varun Gandhi comment on Gita Press Gandhi Peace Prize: मोदी सरकार ने गोरखपुर की गीता प्रेस (Gita Press) को साल 2021 का गांधी शांति पुरस्कार (Gandhi Shanti Award) से सम्मानित किया जाएगा. इसके बाद सियासत तेज हो गई है और कांग्रेस (Congress) ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसकी तुलना सावरकर और गोडसे को पुरस्कार दिए जाने से की है. अब इस मुद्दे पर बीजेपी सांसद वरुण गांधी (Varun Gandhi) ने केंद्र सरकार का समर्थन किया है और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है.

अकारण आलोचना नकारात्मकता का आधार: वरुण गांधी

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी (Varun Gandhi) ने इस मुद्दे पर कांग्रेस का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि अकारण आलोचना नकारात्मकता का आधार बनती है. उन्होंने कहा, 'एक-दूसरे की आस्था का परस्पर सम्मान ही एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की पहचान है. गीता प्रेस (Gita Press) सिर्फ एक प्रकाशक नहीं, एक संपूर्ण आंदोलन है, जिसने गरीब से गरीब परिवार को उनके धर्म से उच्चस्तरीय भाषा में लिखी त्रुटिहीन पुस्तकों के माध्यम से जोड़ा है. अकारण आलोचना नकारात्मकता का आधार बनती है.'

कांग्रेस ने सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने से की तुलना

बता दें कि कांग्रेस ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने के फैसले की आलोचना की है और कहा है कि यह निर्णय उपहासपूर्ण है और सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, साल 2021 के लिए गांधी शांति पुरस्कार गोरखपुर में गीता प्रेस को प्रदान किया गया है, जो इस वर्ष अपनी शताब्दी मना रहा है. अक्षय मुकुल द्वारा इस संगठन की लिखित जीवनी में उन्होंने महात्मा गांधी और उनके राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक एजेंडे पर गीता प्रेस के साथ चली लड़ाई व खराब संबंधों का खुलासा किया है. यह निर्णय वास्तव में एक उपहास और सावरकर व गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है.
(इनपुट- न्यूज एजेंसी आईएएनएस)

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