पहले सीएम सोरेन और अब समरी लाल, आखिर क्या है झारखंड की राजनीति में तपिश की पूरी कहानी
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पहले सीएम सोरेन और अब समरी लाल, आखिर क्या है झारखंड की राजनीति में तपिश की पूरी कहानी

5 सितंबर के झारखंड विधानसभा के विशेष मानसून सत्र के दौरान भाजपा विधायक समरी लाल की सदस्यता को लेकर सदन में सवाल उठे. सवाल उठाने वाले और कोई नहीं बल्कि खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन थे.

पहले सीएम सोरेन और अब समरी लाल, आखिर क्या है झारखंड की राजनीति में तपिश की पूरी कहानी

रांचीः झारखंड में विधायकों की सदस्यता को लेकर सियासत उफान पर है. एक तरफ जहां ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले को लेकर मुख्यमंत्री और बसंत सोरेन की सदस्य्ता का सस्पेंस लिफाफे में बंद है तो वहीं बीजेपी विधायक समरी लाल को ईसीआई की नोटिस ने राजनीतिक तपिश बढ़ा दी है. निर्वाचन आयोग के द्वारा समरी लाल को भेजी गई चिट्ठी के मामले पर बात करने से पहले इस पूरे प्रकरण में हम जरा थोड़ा पीछे चलते हैं.

बदले की भावना में हो रही राजनीतिक बयानबाजी
5 सितंबर के झारखंड विधानसभा के विशेष मानसून सत्र के दौरान भाजपा विधायक समरी लाल की सदस्यता को लेकर सदन में सवाल उठे. सवाल उठाने वाले और कोई नहीं बल्कि खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन थे मुख्यमंत्री ने सदन में अपनी बात रखते हुए बताया कि 'भाजपा विधायक समरी लाल ने कहा की चुनाव आयोग द्वारा नोटिस दिया गया है उसे लेकर हम अपना पक्ष रखेंगे वही मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री संविधान और कानून का सम्मान करना बदले की भावना की राजनीति के तहत बयानबाजी हो रही है. 

निर्वाचन आयोग ले त्वरित फैसला
अब सत्र के महज तीन दिन बाद ही केंद्रीय चुनाव आयोग ने भाजपा विधायक को उनके गलत जाति प्रमाण मामले में एक नोटिस भी जारी कर दिया है. इसे लेकर अब राज्य में सियासी बयानबाजी शुरू हो गई एक तरफ जहां झारखंड कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर देरी से करवाई करने को लेकर सवाल खड़े किए हैं. भारतीय जनता पार्टी आक्रामक है. जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि एक राजस्थान का व्यक्ति फर्जी सर्टिफिकेट लेकर झारखंड में विधायक बन कर घूम रहा है, इस पर निर्वाचन आयोग को त्वरित फैसला लेना चाहिए. 

स्वायत्तता पर खड़े हो सकते हैं सवाल
उन्होंने कहा कि सब कुछ साफ है राजस्थान का रहने वाला व्यक्ति फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर जहां आरक्षण का लाभ लेकर विधायक बन गया ,ऐसे में निर्वाचन आयोग को देर नहीं करना चाहिए पहले ही निर्वाचन आयोग काफी देर कर चुकी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मामला हो या बसंत सोरेन का मामला निर्वाचन आयोग त्वरित डेट पर डेट दे रहा था, ऐसे में समरी लाल पर भी तुरंत फैसला निर्वाचन आयोग को लेना चाहिए अगर वह ऐसा नहीं करती है तो कहीं ना कहीं उसकी स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

ईसी पर सवाल खड़ा करने वालों को आत्मचिंतन की जरूरत
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि फर्जी सर्टिफिकेट लेकर एक विधायक बन बैठा है ऐसे लोगों पर निर्वाचन आयोग को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए जैसा अन्य मामलों में निर्वाचन आयोग ने जल्दबाजी दिखाई थी.वहीं भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा कि इलेक्शन कमीशन पर सवाल खड़ा करने वालों को एक बार आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है .इलेक्शन कमिशन के पास सीएम का जब मामला गया था तो उन्हें भी कई बार समय दिया गया था ताकि वह पर्याप्त समय लेकर सबूतों के साथ अपनी बात रखें लेकिन जब समरी लाल की बात आई तो कहीं ना कहीं यह जल्दबाजी में दिख रहे हैं अभी समरी लाल को 15 दिन का समय मिला है तो इंतजार करना चाहिए सिर्फ बोलने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े नहीं करना चाहिए लेकिन जिस प्रकार से झारखंड में सरकार चल रही है उससे यह बात बेमानी है कि उनसे इस प्रकार की उम्मीद की जाए.

 

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