गैसों से भरा तारा है सूरज, इस धधकते आग के गोले के बारे में कितना जानते हैं आप?
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गैसों से भरा तारा है सूरज, इस धधकते आग के गोले के बारे में कितना जानते हैं आप?

सनातन धर्म में सूर्य पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. साइंस भी मानता है कि इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है. कम ही लोग जानते होंगे कि इस आग के गोले का तापमान कितना है...

गैसों से भरा तारा है सूरज, इस धधकते आग के गोले के बारे में कितना जानते हैं आप?

Facts Of Sun: सूर्य को सौरमंडल की आभा माना जाता है, जिसके बिना हमारा जीवन अंधकारमय हो जाएगा. इतना ही नहीं वेदों में इसे संसार की आत्मा कहा गया है. साइंस की किताबों में यह तो आपने भी पढ़ा ही होगा कि सूर्य विभिन्न गैसों से भरा हुआ आग का एक धधकता गोला है. आज हम जानेंगे इस धधकते हुए तारे जुड़ी कुछ खास बातें...

ऐसे उत्सर्जित होता है प्रकाश
सूरज में 70 प्रतिशत से ज्यादा हाइड्रोजन और 26 प्रतिशत तक हीलियम गैस मौजूद हैं, क्योंकि हाइड्रोजन के परमाणु घने वातावरण में फ्यूजन की क्रिया करके हीलियम बनाते हैं. इस प्रक्रिया में वह ऊर्जा छोड़ते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में प्रकाश उत्सर्जित होता है और सूर्य जलता हुआ दिखाई देता है. वहां कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन भी प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं.  

सूरज का आकार और तापमान 
धरती के मुकाबले यह लगभग 109 गुना बड़ा है, लेकिन हमारे ब्रह्मांड में ऐसे खरबों पिंड मौजूद हैं. सूर्य के प्रकाश को धरती पर पहुंचने में 8 मिनट 16.6 सेकंड लगता है. सूरज के भीतर का तापमान 14,999,726 डिग्री सेल्सियस होता है. इसी कारण उसके करीब जाना मुमकिन नहीं है. 

सोलर डस्ट रिंग से लगाते हैं अनुमान 
अनुमान है कि सूरज करीब 4.6 अरब साल पुराना है और इसका जीवन 10 अरब साल या ज्यादा हो सकता है. इसकी ग्रेविटी धरती से 27 गुना ज्यादा है, जो सौरमंडल को अपनी-अपनी कक्षा में रखती है. दरअसल, इसके चारों ओर बड़े पिंड से लेकर किसी अंतरिक्ष यान के मलबे के एक छोटे से हिस्से को अंतरिक्ष में एक कक्षा में बनाए रखने में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की अहम भूमिका होती है.

गैसों से बना एक पिंड
सूर्य केवल गैसों से भरा है, यह किसी और ग्रह की तरह ठोस नहीं है. सूर्य का अधिकतम तापमान उसके केंद्र में होता है, जो 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस होता है. सूर्य अत्यधिक गर्म और आवेश युक्त कणों के गैस से बना हुआ है, जिसे प्लाज्मा कहते हैं.

प्लाज्मा सूर्य के भूमध्य रेखा पर इसका एक चक्कर पृथ्वी के 25 दिनों में पूरा होता है. जबकि, ध्रुवों पर 36 पृथ्वी दिन लगते हैं. सूर्य की ऊपरी सतह फोटोस्फीयर, फिर क्रोमोस्फीयर और कोरोना होती है. जहां परमाणु फ्यूजन से विशाल विस्फोट होते हैं, जिसके उर्जायुक्त कण पृथ्वी पर पहुंचते हैं.

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