Ek Din Ek Film: हेमा मालिनी की इस फिल्म में राजेश खन्ना चाहते थे भारी चेंज, सलीम-जावेद ने नहीं बदला गेम
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Ek Din Ek Film: हेमा मालिनी की इस फिल्म में राजेश खन्ना चाहते थे भारी चेंज, सलीम-जावेद ने नहीं बदला गेम

Sita Aur Geeta: 1972 में आई सीता और गीता पचास साल बाद भी दर्शकों को आकर्षित करती है. हेमा मालिनी को अगर लोग शोले की बसंती के रूप में याद करते हैं, तो सीता और गीता में भी उनका अंदाज यादगार है. आज भी बॉलीवुड के कई निर्देशक इसका रीमेक करना चाहते हैं.

 

Ek Din Ek Film: हेमा मालिनी की इस फिल्म में राजेश खन्ना चाहते थे भारी चेंज, सलीम-जावेद ने नहीं बदला गेम

Hema Malini Film: आपने जुड़वां भाइयों या जुड़वां बहनों पर बनी बॉलीवुड फिल्में देखी होंगी. लेकिन सीता और गीता का नाम आज भी ऐसी फिल्मों में ऊपर रखा जाता है. कारण था फिल्म की कॉमेडी और वह सारा मसाला जो एक दर्शक बॉलीवुड फिल्म में देखना चाहता है. सलीम-जावेद की जोड़ी ने दिलीप कुमार की राम और श्याम से प्रेरित होकर इस फिल्म को लिखा था. यह नायिका प्रधान फिल्म थी, जिसमें हेमा मालिनी, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, मनोरमा तथा हनी ईरानी की मुख्य भूमिकाएं थी. रमेश सिप्पी ने इसे निर्देशित किया था. जी.पी. सिप्पी प्रोड्यूसर थे. हिट होने पर तेलुगु में इसे गंगा-मंगा तथा तमिल में वाणी-रानी नाम से बनाया गया. आगे चलकर इस फिल्म का हिंदी में चालबाज नाम से रीमेक हुआ, जिसमें श्रीदेवी की मुख्य भूमिका थी. यह फिल्म भी खूब चली. हालांकि इसमें सीता और गीता के मुकाबले कई परिवर्तन किए गए थे.

जिंदगी के दो चेहरे
सीता और गीता दो ऐसी जुड़वां बहनों की कहानी थी, जो एक करोड़पति दंपति की संतान हैं और जन्म के समय किसी कारणवश अलग हो जाती हैं. सीता अपने घर में अपने माता-पिता के साथ ही होती है और जल्द ही अनाथ हो जाती है. जबकि गीता को किसी और दंपति ने पाल-पोसकर बड़ा किया. सीता सीधी सादी लड़की है, जिस पर उसकी लालची चाची कौशल्या (मनोरमा), उसकी बेटी शीला (डेजी ईरानी) का कहर बरसता रहता है. इन सबके आगे चाचा बद्रीनाथ की एक नहीं चलती. सीता को एकमात्र सहारा अपनी अपाहिज दादी (प्रतिमा देवी) से मिलता है. दूसरी ओर, गीता तेजतर्रार है और सड़कों पर स्टंट करके अपना तथा मां का पेट पालती है. एक दिन हालात से तंग आकर सीता आत्महत्या का फैसला करने के लिए घर से भाग जाती है. वह बच जाती है लेकिन यहां से कहानी में मोड़ आता है. सीता, गीता की जगह और गीता, सीता की जगह पहुंच जाती है. इसके बाद दोनों की जिंदगी बदल जाती है. धर्मेंद्र और संजीव कुमार ने सीता और गीता के प्रेमियों की भूमिका निभाई थी.

कहानी में ट्विस्ट
सलीम खान ने फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने के बाद फिल्म की कहानी राजेश खन्ना को सुनाई थी. सलीम खान चाहते थे कि राजेश खन्ना यह फिल्म करें, लेकिन राजेश खन्ना को कहानी पसंद नहीं आई क्योंकि यह एक नायिका प्रधान फिल्म थी. राजेश खन्ना के लिए इस फिल्म में करने के लिए कुछ ज्यादा नहीं था. लेकिन वह सिर्फ ऐसी फिल्म करना चाहते थे जिसमें सिर्फ वह ही छाए रहें. उन्होंने सलीम खान से कहा वह एक ही शर्त पर इस फिल्म को करेंगे यदि सलीम इसकी स्क्रिप्ट को जुड़वां लड़कों में बदल दें. लेकिन सलीम खान ने ऐसा नहीं किया. फिल्म सुपरहिट हुई. सीता और गीता हिंदी की सबसे कामयाब नायिका प्रधान फिल्मों में है. आज भी इसे खूब देखा जाता है. यह हेमा मालिनी की सबसे कामयाब और यादगार फिल्म मानी जाती है. इसे यूट्यूब और ओटीटी अमेजन प्राइम पर देखा जा सकता है.

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