सरकार ने भी माना, भारत की बढ़ती आबादी बोझ नहीं बल्कि देश की ताकत है
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सरकार ने भी माना, भारत की बढ़ती आबादी बोझ नहीं बल्कि देश की ताकत है

Book lauching programme: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के कोषाध्यक्ष विष्णु मित्तल द्वारा लिखी गई किताब ‘ऐसे थे भारत के गांव’ के विमोचन के मौके पर ये बातें कही है. 

किताब ‘ऐसे थे भारत के गांव’ का विमोचन

नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत की 130 करोड़ की मानव आबादी देश पर बोझ नहीं है, बल्कि यह मुल्क की ताकत है. अपनी इस बड़ी आबादी की वजह से दुनिया भर के लिए भारत एक बड़ा बाजार बन गया है. गोयल ने यह टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के कोषाध्यक्ष विष्णु मित्तल द्वारा लिखित किताब ‘ऐसे थे भारत के गांव’ के विमोचन के मौके पर कही है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने इतवार की शाम आयोजित एक प्रोग्राम में कहा कि गांवों में प्रौद्योगिकी और मोबाइल फोन का प्रसार बढ़ा है और ग्रामीणों को भी तेजी से सूचनाएं मिल रही हैं. केंद्र की सरकार ने पंचायतों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी भी बनाया है.

भारत में निवेश कर कोई हमपर एहसान नहीं कर रहा है 
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ’’मोदी सरकार ने जनधन खातों, आधार और मोबाइल से गांव में रहने वाले गरीबों का सशक्तीकरण किया है. केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, जनधन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण सहित कई दूसरी योजनाओं को ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखकर बनाया है. 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गांवों में बदलाव देखने को मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास पहुंचा है.’’ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ’’जब मैं वाणिज्य मंत्री के तौर पर कोई मुक्त व्यापार समझौता करता हूं, या विदेश में निवेश के लिए बात करता हूं तो निवेशक भारत में निवेश करके हमारे ऊपर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं. वह देखते हैं कि 130 करोड़ भारतवासी कैसे एक बड़ा बाजार बन गए हैं.” 

हिंदुओं और मुसलमानों को लड़ाने के लिए गांवों को किया बर्बाद 
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने इस मौके पर कहा कि 1857 के बाद अंग्रजों ने हिंदुओं और मुसलमानों को लड़ाने के लिए भारत के गांवों को बर्बाद कर दिया. वहीं, इस किताब के लेखक मित्तल ने कहा कि उन्होंने किताब उन लोगों को अपने गांवों के लिए काम करने के लिए लिखी है, जो पहले गांवों में रहते थे, लेकिन अब रोजी-राजगार के लिए शहरों में रहने लगे हैं. वह शहरों में अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं और अच्छे पदों पर भी काम कर रहे हैं. ऐसे लोगों को अब अपने गांवों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ करना चाहिए. 

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