"श्रद्धा की लाश के टुकड़ों का DNA निकालने में इतना वक्त लगना अफसोसनाक, 24 घंटे काफी होते हैं"
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"श्रद्धा की लाश के टुकड़ों का DNA निकालने में इतना वक्त लगना अफसोसनाक, 24 घंटे काफी होते हैं"

Shraddha Murder Case: श्रद्धा मर्डर केस के आरोपी आफताब पूनावाला को गिरफ्तार हुए दो हफ्ते हो चुके हैं, साथ ही कथित तौर पर श्रद्धा की लाश के टुकड़े बरामद हुए भी काफी वक्त हो गया लेकिन अभी तक DNA टेस्ट से कुछ भी साबित नहीं हुआ. 

Shraddha Murder Case: दिल्ली के महरौली में हुए श्रद्धा कत्ल कांड के आरोपी आफताब पूनावाला की गिरफ्तारी को दो हफ्ते से भी ज्यादा वक्त हो गया है, लेकिन अब भी इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि कि लाश के जो टुकड़े मिले हैं, वे श्रद्धा वालकर के हैं. इसलिए कुछ एक्सपर्ट्स ने डीएनए टेस्ट में देरी होने पर सवाल उठाए हैं. एक्सपर्ट्स ने इस बारे में अफसोस ज़ाहिर करते हुए कहा कि इस तरह के संगीन मामले में अगर इतनी देरी होना अफसासनाक है. 

बता दें कि आफताब पूनावाला को श्रद्धा वालकर का गला घोंटकर कत्ल करने के आरोप में 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था. आफताब पर श्रद्धा के 35 टुकड़े करके लगभग तीन हफ्तों तक अपने घर पर 300 लीटर के फ्रिज में रखने और फिर कई दिन तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में उन टुकड़ों के फेंकने का भी आरोप है. पुलिस ने 13 नवंबर को कथित तौर पर 12 इंसानी अंग बरामद किए हैं. जिन्हें लैब में भेज दिया है लेकिन अभी तक उन अंगों का डीएनए अलग करके वालकर के परिवार के मेंबर्स के डीएनए से मिलान नहीं किया गया है. इस मामले की जानकारी रखने वाले अफसर फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं.

रोहिणी में मौजूद फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) में पीआरओ डॉक्टर रजनीश कुमार सिंह ने कहा, "हम लाश के बरामद हुए अंगों के बारे में कुछ भी नहीं बता सकते क्योंकि हम ऐसे मामलों में काफी गोपनीयता बरतते हैं." इन्हीं वजहों के चलते टॉप फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने कहा कि डीएनए टेस्ट में देरी क्यों हो रही है? यह समझ से परे है. उनके अनुसार, एक्सपर्ट्स को किसी लाश की शिनाख्त के लिए आम तौर पर 24 घंटे से ज्यादा का वक्त नहीं लेना चाहिए, भले ही वह छह महीने पुराना हो. 

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में जैनेटिक के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे का मानना है कि एक साल पुराने इंसानी अंगों से डीएनए निकालने के लिए 24 घंटे का वक्त काफी है, भले ही उसे महफूज़ तरीके से ना रखा गया हो. चौबे उस टीम का हिस्सा थे जिसने 2021 में डीएनए टेस्ट के जरिए जॉर्जिया की रानी केतेवन के कत्ल हत्या के 400 साल पुराने रहस्य से पर्दा हटाया था. उन्होंने कहा, "छह महीने या एक साल के बाद हमें लाश पर मांस नहीं मिल सकता, लेकिन हड्डियों के अंदर पाया जाने वाला एक बोन मैरो एक साल से ज्यादा वक्त तक बरकरार रहता है और यह डीएनए को अलग करने के अमल को आसान बनाता है."

उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि जब इतने बड़े मामले में इतना समय लग सकता है, तो आम मामलों में कितना वक्त लगता होगा. चौबे ने कहा, "देरी होना बदकिस्मती की बात है और मैं सरकार को प्रस्ताव देता हूं कि देश के टॉप डीएनए एक्सपर्ट्स को शामिल करते हुए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाया जाना चाहिए." 

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