टाइम के कवर पेज पर बांग्लादेश की PM शेख हसीना; मार्गरेट थेचर और इंदिरा गांधी को छोड़ा पीछे
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टाइम के कवर पेज पर बांग्लादेश की PM शेख हसीना; मार्गरेट थेचर और इंदिरा गांधी को छोड़ा पीछे

अमेरिका के टाइम के कवर पेज शेख हसीना ने बनाई जगह और इसमें इनका एक इंट्रव्यू भी है. जिसमें उन्होनें बताया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के जरिए उनकी सरकार को हटाना मुश्किल ह.। बांग्लादेश में जनवरी 2024 में चुनाव भी होने वाले है. 

 टाइम के कवर पेज पर बांग्लादेश की PM शेख हसीना; मार्गरेट थेचर और इंदिरा गांधी को छोड़ा पीछे

शेख हसीना

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अमेरिका के सबसे फैमस मैगजीन टाइम के कवर पेज पर जगह बनाने वाली पहली महिला प्रधानमंत्री है. इस मैगजीन मे शेख हसीना का इंट्रव्यू छपा है, जिसमें उन्होनें कहा है कि उसकी सरकार को हटाना बहुत मुस्किल है. लोकतंत्र के जरिए शेख हसीना की सरकार को नही हटाया जा सकता है. बांग्लादेश में शेख हसीना के कामों से उनकी आवाम बेहद मुतमइन है. बता दें कि इस जनवरी 2024 में बाग्लादेश में चुनाव होने वाले है. मैगजीन पर हसीना का जो इंट्रव्यू छपा है उसके मुताबिक शेख हसीना ने कहा है, "मुझे विश्वास है कि मेरी आवाम मेरे साथ है और मेरी आवाम ही मेरी वाहिद ताकत है. लोकतांत्रिक व्यवस्था के जरिए मुझे हटाना आसान नही है. मुझे हटाने का एकमात्र जरिए है कि आप मुझे खत्म कर दे और अपनी आवाम के वास्ते में मरने के लिए भी तैयार हूं."

चार्ली कैम्पबेल ने लिखा 
अमेरिका में स्थित न्यूयार्क के एक समाचार इंस्टिट्यूट ने बताया है कि टाइम मैगजीन के 20 नवंबर के कवर पेज पर शेख हसीना को जगह मिली है. इसका लेटेस्ट वर्जन 10 नवंबर को मार्केट में आ जाएगा.  टाइम मैगजीन के चार्ली कैम्पबेल की कवर स्टोरी में कहा गया है कि बाग्लादेश की प्राधानमंत्री शेख हसीना 76 साल की उम्र में भी ऐसी राजनीतिक सोच रखती है, जिसने 17 करोड़ की आबादी वाले इस देश को देहाती जूट से एशिया के तेजी से उभरने अर्थव्यवस्था वाले मुल्कों के साथ शामिल कर दिया है. इसमे यहा भी कहा गया है कि शेख हसीना पूरी दुनिया में किसी देश पर लंबे समय तक शासन करने वाली पहली महिला है. उन्होने पहले 1996 से 2001 तक बांग्लादेश की सत्ता संभाली थी और 2009 से अब तक बांग्लादेश की सरकार में बनी हुई है. शेख हसीनी को सिर उठा रहे इस्लामवादियों और दख्ल देने वाली सेना दोनों को दबाने का श्रेय दिया जाता है.

19 दफा हसीना पर हो चुका है हमला 
कैम्पबेल ने यहां भी लिखा है कि हसीना मार्गरेट थेचर या इंदिरा गांधी से ज्यादा बार चुनाव जीत चुकी है, और इंशाअल्लाह वो इस बार भी जनवरी में होने वाले चुनाव के बाद अपने ओहदे पर रहेंगी. इस मैगजीन में ये भी बताया गया है कि इतने वर्षों में 19 दफा हसीना ने अपनी जान पर जोखिम का सामना किया है. हाल ही के कुछ महीनों में विपक्षी पार्टी बीएनपी के सपोट्र की सुरक्षा बलो से लड़ाई हुई थी. जिसमें पुलिस की गाड़ियों और सरकारी बसों में आग लगायी गयी और कई लोगों की हत्या भी की गई. विपक्षी पार्टी का ये दावा है कि  2014 और 2018 की तरह तब तक चुनाव का बहिष्कार करते रहेगे, जब तक हसीना चुनाव कराने की जिम्मेदारी किसी और को नहीं सौप देती. 

हसीना के एक तानाशाह: आलोचक
चार्ली कैम्पबेल ने इस कवर स्टोरी को बांग्लादेश में लोकतंत्र का भविष्य का नाम दिया है. इस कवर स्टोरी के मुताबिक हसीना के शासन में देश ने उनकी आवामी लीग पार्टी के तहत एक सत्तावादी रुख अपनाया है. अमेरिका और यूरोपीय संघ ने बांग्लादेश के पिछले दो चुनावों की निंदा की थी. मैगजीन में ये भी लिखा गया है कि आज, दो बार की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी की नेता खालिदा जिया भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के वजह से अपने  ही घर  में नजरबंद होकर गंभीर रूप से बीमार हैं. इस बीच, बीएनपी के नेताओ पर 40 लाख कानूनी मुकदमे दर्ज हैं जबकि स्वतंत्र पत्रकार और नागरिक समाज भी प्रतिशोध की कार्रवाई के कारण उत्पीड़न की शिकायत करते हैं. कुछ आलोचक कहते हैं कि जनवरी में होने वाले चुनाव में ताजपोशी और हसीना के एक तानाशाह बनने के समान.

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