Ramayana: रामायण में क्यों नहीं है भगवान राम की बड़ी बहन का जिक्र? इस देश की बनीं थी राजकुमारी

Ramayana: आप भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और राजा दशरथ जैसे रामायण के सभी पात्रों से तो भलीभांति परिचित होंगे, लेकिन क्या आपने रामायण में भगवान राम की बहन का जिक्र सुना है?      

Written by - Shruti Kaul | Last Updated : Jan 16, 2024, 03:22 PM IST
  • भगवान राम की बड़ी बहन थीं देवी शांता
  • अंगदेश की राजकुमारी बनी थीं देवी शांता
Ramayana: रामायण में क्यों नहीं है भगवान राम की बड़ी बहन का जिक्र? इस देश की बनीं थी राजकुमारी

नई दिल्ली: Ramayana: रामायण हिंदू धर्म की प्रमुख स्मृति ग्रंथियों में से एक है. ऋषि वाल्मीकि के अलावा तुलसीदास, संत एकनाथ और अन्य संतो ने इस के हर संस्करणों में अलग-अलग तरीकों से रामायण का वर्णन किया है. आप रामायण के किरदारों में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, राजा दशरथ, माता कौशल्या, कैकयी, मंथरा, जटायु और रावण जैसे सभी पात्रों से ते भलीभांति परिचित होंगे, लेकिन क्या आपने रामायण में भगवान राम की बहन का जिक्र सुना है? बहुत ही कम लोगों को इस बारे में पता है कि भगवान राम की एक बहन भी थीं. उनको लेकर अलग-अलग तरह की कथाएं भी प्रचलित हैं. 

भगवान राम की बड़ी बहन थीं शांता 
भगवान राम राजा दशरथ और देवी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र थे. लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न उनके तीन छोटे भाई थे. इसके अलावा भगवान राम की एक बहन भी थी. उनका नाम था देवी शांता. बता दें कि देवी शांता सारे भाईयों में सबसे बड़ी थीं. वह राजा दशरथ की पहली संतान थीं. रामायण में देवी शांता का जिक्र बेहद ही कम है इसलिए उनका नाम कहीं भी सुनने में नहीं आता है.   

शांता की कहानी  

पहली कथा 

देवी शांता को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. उसमें एक कथा यह है कि राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या की बड़ी बहन थीं वर्षिणी. उनकी कोई भी संतना नहीं थी. एक बार वह अपने पति अंग देश के राजा रोमपद के साथ अयोध्या आई हुई थीं. संतान का सुख न मिलने के कारण राजा रोमपद और वर्षिणी बेहद दुखी थे. इसे देखते हुए राजा दशरथ ने अपनी बेटी शांतां को उन्हें गोद दे दिया. इसके बाद शांता अंगदेश की राजकुमारी बनीं.   

दूसरी कथा 
देवी शांता को लेकर दूसरी लोककथा यह है कि उनके पैदा ही अयोध्या में 12 वर्षों तक अकाल पड़ा रहा. वर्षों तक अयोध्या की जमीन में धूल रहने के कारण राजा दशरथ को सलाह दी गई कि उनकी पुत्री देवी शांता ही अकाल का कारण है. ऐसे में दशरथ ने अपनी पुत्री को अंगदेश के राजा रोमपद को दान कर दिया. उसके बाद शांता कभी भी वापस अयोध्या नहीं आई. कहा जाता है कि राजा दशरथ शांता को वापस बुलाने से डरते थे कि कहीं वापस से अयोध्या में अकाल न पड़ जाए.   

तीसरी कथा

कई लोगों का मानना है कि राजा दशरथ ने अपनी पुत्री शांता को इसलिए राजा रोमपद को दान कर दिया क्योंकि लड़की होने के चलते वह उनकी उत्तराधिकारी बनने में असमर्थ थीं.

इस ऋषि से हुआ शांता का विवाह 

माना जाता है कि देवी शांता का विवाह महर्षि विभाण्डक के पुत्र श्रृंगी ऋषि से हुआ था. पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रृंगी ऋषि ने ही अयोध्या में राजा दशरथ के यहां पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया था. जिसके बाद राजा दशरथ के चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न हुए. 

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. Zee Hindustan इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.   

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