Lucknow News: योगी सरकार नवरात्रि में कराएगी श्री दुर्गा सप्तशती पाठ, जानिए पाठ के समय इन बातों का रखें ध्यान
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Lucknow News: योगी सरकार नवरात्रि में कराएगी श्री दुर्गा सप्तशती पाठ, जानिए पाठ के समय इन बातों का रखें ध्यान

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार नवरात्रि को लेकर खास तैयारियों में जुट गई है. इसी के तहत दुर्गाशप्तशती और भगवान श्रीराम के जन्मदिन रामनवमी पर अखंड रामायण का पाठ कराया जाएगा. इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा.

Lucknow News: योगी सरकार नवरात्रि में कराएगी श्री दुर्गा सप्तशती पाठ, जानिए पाठ के समय इन बातों का रखें ध्यान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार नवरात्रि को लेकर खास तैयारियों में जुट गई है. इसी के तहत दुर्गाशप्तशती और भगवान श्रीराम के जन्मदिन रामनवमी पर अखंड रामायण का पाठ कराया जाएगा. इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा. इन कार्यक्रमों में महिलाओं व बालिकाएं खास तौर से सहभागिता करेगी. इसको लेकर प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं. आइए हम आपको बताते हैं. हम सबके बीच लड़ाई हम आपको बताते हैं श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें.

आपको बता दें कि जिसे पूजा करना है वह सबसे पहले विधिवत स्नान करे. इसके बाद पाठ शुरू करने से पहले आसन शुद्धि की क्रिया करें. जब आसन शुद्ध हो जाए तो आसन पर बैठ जाएं. बैठने से पहले अपने साथ साफ पानी, पूजन सामग्री और श्री दुर्गा सप्तशती पाठ करने की पुस्तक सामने रखें. इन्हें अपने सामने शुद्ध आसन पर विराजमान कर ले. पाठ शुरू करने से पहले माथे पर टीका जरूर लगाए. आप भस्म, चंदन या रोली भी लगा सकते हैं. शिखा भी बांध लें. इसके बाद चार-बार आचमन करें. आचमन के समय ये मंत्रों बोलें-

ॐ ऐं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा.
ॐ ह्रीं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा.
ॐ क्लीं शिवतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा.
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सर्वतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा.

आपको बता दें कि इसके बाद गणेश आदि देवताओं और गुरुजनों को प्रणाम करें, फिर 'पवित्रेस्थो वैष्णव्यौ' इत्यादि मंत्र से कुश की पवित्री पहन लें. इसके बाद हाथ में लाल फूल, अक्षत और जल लेकर नींचे दिए गए संकल्प को करें-

जानकारों की मानें तो चिदम्बरसंहिता में पहले अर्गला, उसके बाद कीलक और अंत में कवच पढ़ने का विधान है, लेकिन योगरत्नावली में पाठ का क्रम इससे अलग होता है. उसमें कवच को बीज, अर्गला को शक्ति तथा कीलक को कीलक संज्ञा दी गई है.

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः ॐ नमः परमात्मने, श्रीपुराणपुरुषोत्तमस्य श्रीविष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तेकदेशे पुण्यप्रदेशे बौद्धावतारे वर्तमाने यथानामसंवत्सरे अमुकामने महामांगल्यप्रदे मासानाम् उत्तमे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुकवासरान्वितायाम् अमुकनक्षत्रे अमुकराशिस्थिते सूर्ये अमुकामुकराशिस्थितेषु चन्द्रभौमबुधगुरुशुक्रशनिषु सत्सु शुभे योगे शुभकरणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ सकलशास्त्र श्रुति
स्मृति पुराणोक्त फलप्राप्तिकामः अमुकगोत्रोत्पन्नः अमुक नाम अहं ममात्मनः सपुत्रस्त्रीबान्धवस्य श्रीनवदुर्गानुग्रहतो ग्रहकृतराजकृतसर्व-

विधपीडानिवृत्तिपूर्वकं नैरुज्यदीर्घायुः पुष्टिधनधान्यसमृद्ध्यर्थं श्री नवदुर्गाप्रसादेन सर्वापन्निवृत्तिसर्वाभीष्टफलावाप्तिधर्मार्थ-
काममोक्षचतुर्विधपुरुषार्थसिद्धिद्वारा श्रीमहाकाली-

महालक्ष्मीमहासरस्वतीदेवताप्रीत्यर्थं शापोद्धारपुरस्परं कवचार्गलाकीलकपाठ- वेदतन्त्रोक्त रात्रिसूक्त पाठ देव्यथर्वशीर्ष पाठन्यास विधि सहित नवार्णजप सप्तशतीन्यास- धन्यानसहितचरित्रसम्बन्धिविनियोगन्यासध्यानपूर्वकं च 'मार्कण्डेय उवाच॥ सावर्णिः सूर्यतनयो यो मनुः कथ्यतेऽष्टमः।' 'सावर्णिर्भविता मनुः' इत्यन्तं दुर्गासप्तशतीपाठं तदन्ते न्यासविधिसहितनवार्णमन्त्रजपं वेदतन्त्रोक्तदेवीसूक्तपाठं रहस्यत्रया शापोद्धारादिकं च किरष्ये/करिष्यामि॥

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