Chinese Kali Temple: हलवा-लड्डू नहीं यहां काली मां को लगता है नूडल्स का भोग!जानें कैसी शुरू हुई ये परंपरा
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Chinese Kali Temple: हलवा-लड्डू नहीं यहां काली मां को लगता है नूडल्स का भोग!जानें कैसी शुरू हुई ये परंपरा

Chinese Kali Temple: हिंदू धर्म में कोई भी पूजा-पाठ हो या फिर तीज-त्यौहार भगवान को लगने वाला भोग सबसे पवित्र और ज़रूरी माना जाता है. ...आमतौर पर ये मिठाई, दही, फल या कुछ खास पकवान होते हैं.. क्या आपने कभी चाइनीज़ खाने का भोग भगवान के मंदिर लगते हुए देखा है..

 

Chinese Kali Temple: हलवा-लड्डू नहीं यहां काली मां को लगता है नूडल्स का भोग!जानें कैसी शुरू हुई ये परंपरा

Chinese Kali Temple: नवरात्रि का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस मौके पर मंदिरों को सजाया गया है. वहीं, सार्वजनिक जगहों पर पंडाल लगाए गए हैं.  खासकर, पश्चिम बंगाल के कोलकाता में मां दुर्गा की पूजा भव्य तरीके से की जाती है. कोलकाता में एक ऐसा मंदिर है जहां पर मां को नूडल्स का भोग लगाया जाता है. इस मंदिर का निर्माण चीन के लोगों ने करवाया था. हिंदू धर्म में काली माता को क्रोध का प्रतीक माना जाता है लेकिन कोलकाता में स्थित काली मंदिर उदारता का प्रतीक माना गया है. इस मंदिर के बारे में सबकुछ जानते हैं.

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यहां चाइनीज करते हैं काली माता की पूजा
भारत में कई ऐसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं जिनसे जुड़ी हुई रोचक बातें उन्हें बाकियों से काफी अलग हो जाती है. पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक ऐसा मंदिर मौजूद है जिसे चाइनीज काली मंदिर कहा जाता है. खास बात है कि यहां नूडल्स वाला प्रसाद दिया जाता है. इस मंदिर की देखरेख यहां मौजूद चीनी समुदाय द्वारा की जाती है. कोलकाता के टेंगरा में मौजूद चाइनीज काली बाड़ी को चाइनाटाउन ऑफ इंडिया के रूप में जाना जाता है. वैसे टेंगरा में बौद्ध और ईसाई रीति-रिवाजों का ज्यादा पालन किया जाता है.

नवरात्रि के दौरान यहां काली पूजा की अलग ही रौनक रहती है. कहते हैं कि इस मंदिर को साल 1998 में तैयार किया गया था. यह मंदिर कोलकाता से करीब 12 किमी दूर टांग्रा शहर में है.यहां अधिकतर चीनी लोग रहते हैं इसलिए यह जगह चाइना टाउन के नाम से मशहूर है. 

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भक्तों को दिया जाता है नूडल्स का प्रसाद
कहा जाता है कि यहां मां दुर्गा के रूप काली की पूजा के लिए चीनी समुदाय जमा हुआ और एक समय पर सभी ने पेड़ के नीचे पूजा शुरू की थी. आज ये एक चर्चित मंदिर के रूप में जाना जाता है. इस मंदिर में नूडल्स को प्रसाद के रूप में भक्तों को दिया जाता है. यही वजह इसे बाकी मंदिरों से काफी अलग बनाती है.

प्रचलित है ये कथा
एक कथा के अनुसार करीब 60 साल पहले यहां काली माता का कोई मंदिर नहीं था. यहां एक पेड़ के नीचे कुछ काले पत्थर रखे हुए थे, जिन्हें लोग देवी का प्रतीक मानकर पूजा जाता था. ऐसा कहा जाता है कि एक दिन चीनी लड़का बीमार हो गया. बहुत कोशिशों के बाद भी वह ठीक नहीं हुआ. किसी को भी उसकी बीमारी के कारण समझ नहीं आ था. फिर बीमार लड़के का परिवार पेड़ के नीचे स्थित माता की पूजा करने लगे. बस यहीं से लगातार पूजा की गई और लड़का ठीक हो गया.  जिसके बाद सभी चीनी लोगों को देवी की शक्तियों पर भरोसा हो गया.  कुछ समय के बाद कुछ चीनी लोगों ने वहां पर मंदिर का निर्माण करवाया.  जिसे चाइनीज काली मंदिर के नाम से जाना जाता है. तब से यहां मौजूद चीनी समुदाय में मां काली के प्रति विश्वास और बढ़ गया और वे उनकी पूजा करने लगे.

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अपने अनोखेपन के कारण विश्व विख्यात है मंदिर
इस मंदिर में जो भक्त आते हैं वे मंदिर के भीतर हाथ से बने एक पेपर को जलाते हैं. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और बुरी आत्माएं उनसे दूर रहती हैं. घर में सुख-समृद्धि आती है. ये मंदिर अपने अनोखेपन के कारण विश्व भर में काफी चर्चित है.

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