ऐतिहासिक गुरुद्वारा विठ्ठल घाट की जमीन पर भूमाफ‍िया की नजर, कब्‍जा हटाने पहुंची से भिड़े
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ऐतिहासिक गुरुद्वारा विठ्ठल घाट की जमीन पर भूमाफ‍िया की नजर, कब्‍जा हटाने पहुंची से भिड़े

Azamgarh news : ऐतिहासिक गुरुद्वारा विट्ठलघाट की जमीन पर भूमाफ‍िया ने कब्‍जा कर लिया. वहीं, जब जिला प्रशासन की टीम कब्‍जा हटाने गई तो प्रशासन के सामने ही सिख समाज से भिड़ गए और मारपीट पर उतारू हो गए. 

ऐतिहासिक गुरुद्वारा विठ्ठल घाट की जमीन पर भूमाफ‍िया की नजर, कब्‍जा हटाने पहुंची से भिड़े

वेदेन्द्र प्रताप शर्मा/आजमगढ़ : सनातन धर्म पर जब विदेशी आक्रमणकारी प्रहार कर रहे थे उस समय गुरु नानक देव जी ने खालसा पंथ बनाया और सभी जगह घूम-घूमकर लोगों को जागरूक कर जोड़ा. इसी क्रम में गुरु नानक देव जी आजमगढ़ भी आए थे, जिस स्थान पर वह ठहरे थे उस स्थान पर उस समय के लोगों ने गुरुद्वारे के लिए जमीन दान दे दी. उसी जमीन पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा विट्ठलघाट बना, लेकिन आज उसी ऐतिहासिक गुरुद्वारे की जमीन को कुछ माफिया लोग कब्जाने में लगे हैं. 

यह है पूरा मामला 
जमीन को कब्जे से मुक्ति के लिए सिख समाज ने प्रशासन और अदालत में लंबी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की, लेकिन आज भी गुरुद्वारे की जमीन से कब्जा हट नहीं पाया. इसके चलते सिख समाज ने जिला प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस तक नहीं मनाया. इतना ही नहीं विठ्ठलघाट के गुरुद्वारा श्रीनानक दरबार पर ताला लगा रहा. 

कब्‍जा हटाने पहुंची प्रशासन से भिड़ गए 
सिख समाज का कहना है कि यहां की संपत्तियों पर लगातार कब्जे हो रहे हैं.  जिले के आला अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही. इस मुद्दे को Zee मीडिया ने भी उठाया, जिसका असर रहा प्रशासन कब्जा हटवाने पहुंचा. हालांकि उसे दौरान कब्‍जा धारकों ने प्रशासन के सामने ही सिख समाज से भिड़ गए और मारपीट पर उतारू हो गए. 

सिख समाज के लोगों दर्ज करवाई FIR 
इस दौरान राजस्व की टीम ने किसी तरह से लोगों को शांत कराया. वहीं इस घटना को लेकर सिख समाज ने भूमाफ‍िया के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है. सिख समाज के लोगों का कहना है कि अगर कार्रवाई नहीं होती है तो हम अन्‍य राज्‍यों में आंदोलन को बाध्‍य होंगे. 

सभी कार्यक्रम रद्द 
सिख समाज ने अपने पहले से तय सारे कार्यक्रम को रद्द कर दिया है. अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन क्या रुख अपनाता है और अदालत के फैसले पर कितना अमल होता है. 

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