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अस्त होने वाले हैं 'न्याय के देवता' शनि देव, प्रकोप से बचने के लिए करें ये उपाय

Tonk News: किसी भी व्यक्ति की जन्मपत्रिका में 12 घर या खाने होते हैं और जन्मपत्रिका के पहले खाने में जो अंक होता है, वह उस व्यक्ति का लग्न माना जाता है और कुंडली के जिस घर में चंद्रमा (MOON) विराजमान हो, वह उस व्यक्ति की राशि मानी जाती है. उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका या कुंडली के पहले घर में अगर 10 और 11 नंबर हो तो व्यक्ति का लग्न मकर (Capricorn) या कुंभ (Aquarius) माना जाता है और इसके साथ ही अगर व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा  (MOON) जिस घर में स्थित हो उसमें 10 या 11 अंक हो तो व्यक्ति की राशि मकर (Capricorn) और कुंभ (Aquarius) मानी जाती है.

 

शनि ग्रह के अस्त होने पर दुख होता

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शनि ग्रह के अस्त होने पर दुख होता

राजस्थान के टोंक निवासी ज्योतिषाचार्य भारत भूषण शर्मा के अनुसार, ऐसे में जिन व्यक्तियों की जन्मपत्रिका के पहले घर में 10 या 11 अंक होने पर उनके लग्नाधिपति शनि होते हैं और वहीं व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा 10 या 11 अंक वाले घर में होने पर उसकी राशि कुंभ या  मकर होने पर राशि स्वामी शनि होते हैं. ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की जन्मपत्रिका में शनि लग्नेश या राशि स्वामी हों तो शनि ग्रह के अस्त होने पर उस व्यक्ति को कई बार बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में व्यक्ति की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ प्रभावित होने लगती है और उसे किसी भी काम को सफल बनाने में बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

किस ग्रह को सौरमंडल में अस्त कब माना जाता है

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किस ग्रह को सौरमंडल में अस्त कब माना जाता है

ज्योतिषाचार्य भारत भूषण शर्मा के अनुसार, जब भी कोई ग्रह सूर्य के समीप पहुंच जाता है तब उस ग्रह को अस्त कहा जाता है. यह ठीक वैसे ही है जैसे 100 वॉट के बल्ब के समीप 10 वॉट के बल्ब का प्रकाश प्रभावहीन हो जाता है, ठीक वैसे ही सूर्य के समीप पहुंचते ही किसी भी ग्रह कि शक्ति घट जाती है. विगत 17 फरवरी 2024 से ब्रह्मांड में कुंभ राशि में सूर्य और शनि कि युति बनी हुयी है, जो 14 मार्च सूर्य के मीन राशि में प्रवेश तक बनी रहेगी. तत्पश्चात् 18 मार्च को सूर्य के मीन राशि मे 4° पहुंच जाने पर शनि उदित हो जायेंगे.

शनि की दशा महादशा चल रही

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शनि की दशा महादशा चल रही

किसी भी ग्रह के अस्त होने पर उसके शुभ फलों मे न्यूनता आती है, तथा इस सृष्टि में उसके हानिकारक प्रभाव देखने को मिलते हैं. शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह है, अत: वर्तमान समय में इन राशियों के जातक आर्थिक, शारीरिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, जिन्हें शनि की दशा महादशा चल रही है, उन पर भी शनि के अस्त होने का विपरीत प्रभाव पड़ा है. शनि अस्त होने के कारण बिना मौसम के आंधी, तूफान, वर्षा होना, बिजली और ओले गिरना, फसल नष्ट होना, गरीबी और बेरोजगारी बढ़ना, रोग बढ़ना, जनता में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ना जैसे फल देखे जाते हैं.  शनि अस्त होने के साथ ही पंजाब में किसान आंदोलन प्रारंभ हुआ है, ऐसा ज्योतिष की दृष्टि से माना जा रहा है.

भगवान शिव का सरसों के तेल से रुद्राभिषेक

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भगवान शिव का सरसों के तेल से रुद्राभिषेक

शनि अस्त के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिये उपाय

1. शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करें.

2. शनि ग्रह के बीज मंत्र "ओम प्रां प्रीं प्रौं श: शनैश्चराय नम:." का जप करें.

3.उड़द, सरसों के तेल और लोहे का शुभ मुहुर्त में यथासंभव जरुरतमंद व्यक्ति को दान करें.

4.भगवान शिव का सरसों के तेल से रुद्राभिषेक करें .

5- हर शनिवार को सायंकाल पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

Report - ज्योतिषाचार्य भारत भूषण शर्मा

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)