Rajasthan Assembly : अपराध, संपत्ति और शिक्षा के लिहाज से ऐसी दिखेगी राजस्थान की नई विधानसभा की तस्वीर
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Rajasthan Assembly : अपराध, संपत्ति और शिक्षा के लिहाज से ऐसी दिखेगी राजस्थान की नई विधानसभा की तस्वीर

Jaipur News : इस बार राजस्थान विधानसभा नतीजों में कई दिलचस्प बदलाव देखने को मिले हैं. एडीआर और राजस्थान इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में दागी विधायकों की संख्या 2018 के मुकाबले आठ प्रतिशत बढ़ी हैं. करोड़पति विधायकों की संख्या 6 प्रतिशत बढ़ी है. 

 

राजस्थान विधानसभा की प्रतीकात्मक तस्वीर.

Jaipur : इस बार राजस्थान विधानसभा नतीजों में कई दिलचस्प बदलाव देखने को मिले हैं. एडीआर और राजस्थान इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में दागी विधायकों की संख्या 2018 के मुकाबले आठ प्रतिशत बढ़ी हैं. करोड़पति विधायकों की संख्या 6 प्रतिशत बढ़ी है. सबसे दिलचस्प आंकड़ा विधायकों की उम्र को लेकर सामने आया है. इनमें से आधे 34 फीसदी विधायक ऐसे हैं, जिनकी उम्र 50 से कम है, लेकिन 65 फीसदी विधायकों की उम्र 50 से ज्यादा हैं. मौजूदा विधायकों से जुड़ी रोचक बातें यहां पढें...

राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं.पांच साल बाद एक बार फिर भाजपा ने सत्ता में वापसी की है. भाजपा को सबसे ज्यादा 115 सीटें मिलीं हैं.वहीं कांग्रेस के खाते में 69 सीटें गई हैं. आठ निर्दलीय और सात सीटों पर अन्य पार्टियों के खाते में गई हैं. चुनाव जीतने वाले सभी 199 विधायकों के हलफनामे का विश्लेषण में सामने आया की कुछ विधायक केवल साक्षर ही है तो कुछ पीएचडी होल्डर हैं. वहीं, अरबपति से लेकर करोडपति और लखपति विधायक भी हैं. तो कुछ विधायको पर गंभीर किस्म के अपराध के मामले दर्ज हैं. 

क्या कहती है इलेक्शन वॉच और एडीआर की रिपोर्ट

इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने वर्तमान विधायकों द्वारा घोषित वित्तीय, आपराधिक, शिक्षा, लिंग और अन्य विवरणों पर आधारित रिपोर्ट में इसका जिक्र है.विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद विधायकों के हलफनामे का विश्लेषण करें तो इस रिपोर्ट में चुने गए माननीयों के बारे में अहम जानकारियां दी गई हैं. 

राजस्थान की विधानसभा में इस बार नौ पीएचडी होल्डर विधायक बैठेंगे.हालांकि नए विधायकों में कम पढ़े लिखे भी हैं. 16वीं विधानसभा के लिए चुने गए विधायकों में से 61 पर आपराधिक केस चल रहे हैं.खास बात यह है कि इस बार चुने गए अधिकांश विधायक करोड़पति हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और राजस्थान इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव जीतने वाले 61 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. 

इनमें 44 विधायक (22 फीसदी) पर गंभीर श्रेणी के अपराध दर्ज हैं. पार्टी वाइज बात करें तो भाजपा के 115 में से 35 और कांग्रेस के 69 में से 20 और 6 अन्य विधायक पर अपराधिक मामले दर्ज है. इसके अलावा भाजपा के 24 और कांग्रेस के 16 विधायकों पर गंभीर अपराध दर्ज हैं.रिपोर्ट के अनुसार गंभीर अपराधों में हत्या का प्रयास करना, हमला, सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना और महिलाओं पर अत्याचार जैसे मामले भी विधायकों पर दर्ज हैं.हालांकि 2018 में चुनाव जीतने वाले 46 विधायकों पर अपराध दर्ज थे. इस बार 2018 की तुलना में 8 प्रतिशत की बढोतरी हुई हैं.

मात्र 6 ने अपनी शैक्षणिक योग्यता डिप्लोमाधारक घोषित की है.

राजस्थान विधानसभा में 199 में से 52 विधायकों (26 प्रतिशत) की शैक्षणिक योग्यता 5वीं से 12वीं के बीच है.वहीं 137 (69 प्रतिशत) विधायकों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता स्नातक और उससे ज्यादा बताई है. मात्र 6 ने अपनी शैक्षणिक योग्यता डिप्लोमाधारक घोषित की है. चार ने शैक्षणिक योग्यता साक्षर बताई है..पार्टीवार ब्योरा देखें तो भाजपा के 115 में से 3 साक्षर, एक 5वीं पास, सात 8वीं पास, 14 विधायकों की एजुकेशन 10वीं पास है तो 10 नवनिर्वाचित विधायकों की शिक्षा 12वीं पास हैं. 34 स्नातक, 18 पेशेवर स्नातक, 18 पीजी, 8 पीएचडी और 6 डिप्लोमाधारी हैं.कांग्रेस की बात करें तो एक साक्षर, दो विधायक 8वीं पास, छह विधायक 10वीं पास तो 9 विधायक 12वीं पास हैं.नौ स्नातक, 14 विधायक पेशेवर स्नातक, 25 पीजी, 3 विधायक पीएचडी होल्डर हैं.

वहीं निर्दलीयों की बात करें तो दो विधायक आठवी पास, एक विधायक स्नातक, एक विधायक पेशेवर स्नातक और तीन विधायक पीजी और एक पीएचडी होल्डर हैं.इसी तरह भारत आदिवासी पार्टी की बात करें तो एक विधायक स्नातक, दो विधायक पेशवर स्नातक हैं. आरएलपी पार्टी का एक विधायक पीजी होल्डर हैं.बसपा का एक विधायक आठवीं पास और एक विधायक पीएचडी होल्डर हैं.नवनिर्वाचित विधायकों की बात करें तो 67 (34 प्रतिशत) की उम्र 25 से 50 वर्ष है. जबकि 130 (65 प्रतिशत) की उम्र 51 से 80 के बीच है. दो विधायकों की उम्र 83 साल हैं.सबसे कम उम्र के विधायक शिव विधानसभा से निर्दलीय रविन्द्र सिंह भाटी है जिनकी उम्र 25 साल हैं.तो सबसे उमदराज किशनगढबास के दीपचंद खेरिया हैं जिनकी उम्र 83 साल हैं. महिला प्रतिनिधित्व की बात करें तो 20 (10प्रतिशत) महिलाएं जीती हैं. जबकि 2018 में 23 (12 प्रतिशत) महिलाएं विधायक बनीं थीं.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिर्फोंस (एडीआर) की रिपोर्ट पर नजर डाले तो 199 विधायकों में से 169 (85 प्रतिशत) विधायक करोड़पति हैं.2018 में 158 ( 79 प्रतिशत) विधायक करोड़पति थे. यानी अब छह प्रतिशत ज्यादा करोड़पति उम्मीदवार जीते हैं. दलवार देखें तो भाजपा के 115 में से 101 (88 प्रतिशत) और कांग्रेस के 69 में से 58 (84 प्रतिशत) विजेता उम्मीदवार करोड़पति हैं.करोड़पति का अर्थ उन उम्मीदवारों से है, जिनकी घोषित संपत्ति एक करोड़ से ज्यादा है. 

संपत्ति के मामले में भाजपा की सिद्धी कुमारी

अधिकतम संपत्ति वाले विजेता उम्मीदवारों में पहले क्रम पर बीकानेर ईस्ट से भाजपा की सिद्धी कुमारी हैं. जिनकी संपत्ति एक अरब दो करोड सत्ताईस लाख 92 हजार 547 हैं. दूसरे नंबर पर फुलेरा विधानसभा से विधायक विद्याधर सिंह आते हैं, जिनकी संपत्ति 70 करोड हैं. वहीं तीसरे नंबर पर गंगापुरसिटी विधानसभा क्षेत्र से रामकेश मीना हैं जिनकी संपत्ति 63 करोड़ रुपए है.इसी तरह सबसे कम संपत्ति संगरिया से कांग्रेस विधायक अभिमन्यु की हैं जिनके पास 1.57 लाख की संपत्ति हैं.

वहीं कामां से भाजपा विधायक नौक्षम की संपत्ति 2.70 लाख और शाहपुरा (जयपुर) से विधायक मनीष यादव की संपत्ति 3.34 लाख हैं.रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान विधानसभा 2023 के चुनाव में 75 विधायक ऐसे है जो दोबारा निर्वाचित होकर आए हैं. दोबारा निर्वाचित विधायकों की 2018 में औसत संपत्ति 6.49 करोड थी जो पांच साल में बढकर 2023 में 9.76 करोड हो गई हैं. निर्वाचित विधायकों की औसतन संपत्ति में चुनाव 2018 से 2023 तक 3.36 करोड यानि की 50 फीसदी की बढोतरी हुई हैं. जिसमें भाजपा के विधायकों की 62.53 फीसदी, कांग्रेस के विधायकों की 36.62 फीसदी औसतन संपत्ति में बढोतरी हुई हैं.प्रदेश में कई विधायक ऐसे हैं जिन पर करोड़ों रुपए की देनदारियां बाकी है.शपथ पत्र के हिसाब से 42 विधायकों ने अपनी देनदारी 1 करोड़ से अधिक घोषित की है.

सबसे ज्यादा 30 करोड़ की देनदारी आदर्शनगर से कांग्रेस विधायक रफीक खान पर है. भीलवाडा से निर्दलीय विधायक अशोक कुमार कोठारी 25 करोड़ की देनदारी के साथ दूसरे नंबर पर हैं. वहीं, तीसरे नंबर पर हिंडोली से विधायक अशोक चांदना हैं. चांदना पर 24 करोड़ की देनदारी है.

बहरहाल, इस बार राजस्थान की नई असेंबली में पिछली बार की तुलना में करोडपति, दागी और कर्जदार विधायकों की संख्या ज्यादा हैं.भले ही एक तरफ महिला आरक्षण की बातें हो रही हों, लेकिन इस बार राजस्थान में महिला विधायकों की संख्या बहुत कम देखने को मिलेगी.उम्मीद जताई जा रही है कि अगले चुनाव तक महिला आरक्षण बिल पारित हो जाएगा.ऐसे में राजस्थान में महिला विधायकों की संख्या में भी इजाफा होगा.

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