Jaipur: राइट टू हेल्थ बिल पर सीएम गहलोत को करनी चाहिए डॉक्टर्स से बात- सतीश पूनिया
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Jaipur: राइट टू हेल्थ बिल पर सीएम गहलोत को करनी चाहिए डॉक्टर्स से बात- सतीश पूनिया

Jaipur News:  प्रदेश में राइट टू हेल्थ बिल को लेकर चल रही डॉक्टर्स की हड़ताल पर बीजेपी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है. बीजेपी ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पहल करके डॉक्टरों से बात करनी चाहिए मामला लटकाने से मर्ज लगातार बढ़ रहा है. 

 

Jaipur: राइट टू हेल्थ बिल पर सीएम गहलोत को करनी चाहिए डॉक्टर्स से बात- सतीश पूनिया

Jaipur: प्रदेश में राइट टू हेल्थ बिल को लेकर चल रही डॉक्टर्स की हड़ताल पर बीजेपी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है. बीजेपी ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पहल करके डॉक्टरों से बात करनी चाहिए मामला लटकाने से मर्ज लगातार बढ़ रहा है. 

बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश माथुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को आगामी चुनाव जीतने के अलावा जनता की किसी भी समस्या की ओर ध्यान नहीं है. RTH कानून में एक दो कमी है उसे ठीक करना चाहिए. मुख्यमंत्री को बड़े मन से बैठकर गरीबों का ध्यान रखते हुए बीमार लोगों का ध्यान रखते हुए वार्ता करनी चाहिए. उनको तुरंत कहीं ना कहीं संशोधन करना पड़े तो कहीं पर भी अपना ईगो आगे नहीं आना चाहिए संशोधन करना चाहिए.  

डॉक्टरों से बैठकर बैठकर चर्चा करनी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य है कि पिछले 4 साल में मुख्यमंत्री जी किसी भी तरह की समस्याएं हों खुद जाने के बजाय, या तो अफसरों को भेज देंगे या छोटे मंत्रियों को भेज देंगे जिनके पास कोई अनुभव नहीं है . यदि मुख्यमंत्री जी खुद बैठें तो अच्छा होता . मुख्यमंत्री खुद बैठें और इन समस्याओं को वह सही है तो समझावें और बात सही हो तो अमेंडमेंट करना चाहिए. जनता को परेशान नहीं होना चाहिए. 

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि चिकित्सा और स्वास्थ्य एक ऐसा क्षेत्र है जहां 24 घंटे सेवाओं की आवश्यकता होती है   किसी सरकार को किसी समस्या के समाधान की दिशा में अहंकार की तरफ नहीं समाधान की तरफ बढ़ना चाहिए.  जो गतिरोध था वह लगातार यह बरकरार रहा . सरकार ने कोशिश नहीं कि इस भाव को मापने की नौकरी अंततः गतिरोध ऐसे चरम पर चला गया कि आज उसका समाधान नहीं दिख रहा . 

राइट टू हेल्थ के बिल में यदि मंशा ठीक होती तो आम लोगों को चिकित्सा सुविधा ठीक मिले इस पर सब एकमत है लेकिन दोनों ही पक्षों को संजीदगी से सुनकर और उसका योग्य समाधान होना चाहिए था . अंततः इतना लंबा समय निकलने के बाद दोनों ही पक्षों के बीच में नाराजगी के स्वर दिखते हैं. इसलिए अभी भी वक्त है जब सरकार को उसके बारे में डॉक्टर से कोई सार्थक वार्ता के लिए और संजीदगी से वार्ता करने की आवश्यकता है.  

लिहाजा बिल पेश हो गया और पास होकर कानून के रूप में सामने आ गया . अशोक गहलोत इस बात की ब्रांडिंग जरूर करेंगे कि उन्होंने देश में  सबसे पहले राइट टू हेल्थ सबसे पहले लागू किया. उन्हें सब पक्षों की ओर ध्यान देना चाहिए था सरकार को प्रमाणिक तरीके से जनता के हित में भी और चिकित्सा कर्मियों के पक्ष में ध्यान रखते हुए दोनों पक्षों को संतुलित रूप में निकालनी सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है . सरकारी प्रमाणित रुप से काम करें बजाय इसके विरोध का रुख अख्तियार करें. 

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