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OBC आरक्षण मुद्दे को लेकर CM से आर-पार की लड़ाई में मंत्री हरीश चौधरी, बोले- हर सीमा को लाघूंगा

Baytoo, Barmer News: ओबीसी आरक्षण विसंगति (OBC reservation discrepancy) के मुद्दे को कैबिनेट मीटिंग से डेफर करने के बाद लगातार पूर्व मंत्री और बायतु विधायक हरीश चौधरी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को घेरने के लिए आमजन के बीच जाकर जन जागरण कर रहे हैं. वह लगातार सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंच से इस मुद्दे को लेकर कई सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर किसको फायदा पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहे हैं. 

मुख्यमंत्री के लिए लगा रहे सवालों की झड़ी

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मुख्यमंत्री के लिए लगा रहे सवालों की झड़ी

ओबीसी आरक्षण विसंगति को दूर करने को लेकर पूरे राजस्थान में आंदोलन की अगुवाई करने वाले पूर्व राजस्व मंत्री और बायतु विधायक हरीश चौधरी ने 9 सितंबर की कैबिनेट मीटिंग से ओबीसी आरक्षण विसंगति का मुद्दा डेफर होने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सवालों की झड़ी लगाकर उनको घेरना शुरू कर दिया है और वह लगातार इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाकर लगातार ओबीसी वर्ग में जन जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है. 

 

मुख्यमंत्री केवल आश्वस्त करते हैं

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मुख्यमंत्री केवल आश्वस्त करते हैं

ओबीसी आरक्षण मुद्दे को लेकर हरीश चौधरी का कहना है कि मार्च 2022 से लगातार यह मांग उठती जा रही है और हर बार मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि इस विसंगति को कैबिनेट की मीटिंग में लेकर दूर कर दिया जाएगा लेकिन 9 सितंबर को हुई कैबिनेट की मीटिंग में इस मुद्दे को डेफर कर दिया, जिसके बाद हरीश चौधरी का धैर्य जवाब दे गया.

 

बिना किसी कारण टाल दिया गया ओबीसी का मुद्दा

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बिना किसी कारण टाल दिया गया ओबीसी का मुद्दा

उन्होंने कहा कि कैबिनेट की मीटिंग में पूंजीपतियों के फैसले तो हो रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने ही ओबीसी के मुद्दे को बिना किसी कारण टाल दिया है. इसका मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जवाब देना चाहिए एक तरफ तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस को मजबूत कर दोबारा सत्ता में लाने की बात कर रहे हैं तो ओबीसी के मुद्दे को टालने से मुझे तो कतई कांग्रेस मजबूत नहीं होती दिख रही है और ओबीसी वर्ग से ही आने वाले मुख्यमंत्री गहलोत को यह बताना चाहिए कि किसको फायदा पहुंचाना चाह रहे हैं. 

किन ताकतों को फायदा पहुंचाना चाह रहे सीएम

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किन ताकतों को फायदा पहुंचाना चाह रहे सीएम

ओबीसी के मुद्दे को लेकर पिछले लंबे समय से युवाओं का आंदोलन चल रहा था और 30 सितंबर को जयपुर में शहीद स्मारक पर हजारों की संख्या में युवाओं ने ओबीसी आरक्षण विसंगति को दूर करने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और एक सेकेंड भी ट्रैफिक तक जाम नहीं हुआ. साथ ही बिना किसी विवाद के यह मुद्दा सीएम की प्रशासनिक स्वीकृति और कार्मिक विभाग, आरपीएससी, विधि विभाग से ओबीसी विसंगति की फाइल सामान्य तरीके 9 नवंबर को कैबिनेट मीटिंग तक पहुंच गई. लेकिन उसके बाद मुख्यमंत्री ने ओबीसी के मुद्दे पर कैबिनेट की बैठक में विवाद उत्पन्न कर किन ताकतों को फायदा पहुंचाना चाह रहे हैं. 

युवाओं की मांग को दरकिनार कर दिया

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युवाओं की मांग को दरकिनार कर दिया

हरीश चौधरी ने कहा कि राजस्थान की आधी से ज्यादा आबादी के युवाओं के भविष्य के हक की लड़ाई के लिए अब मैं अंतिम समय तक लडूंगा और इस हक को लेने के लिए जो मुझे कदम उठाना पड़ेगा, वह उठाऊंगा और हर सीमा को लाघूंगा. वही ओबीसी आरक्षण मुद्दे की अगुवाई कर रहे बाड़मेर एनएसयूआई जिला अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी का कहना है कि लगातार ओबीसी आरक्षण को लेकर युवाओं की मांग को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा विश्वासघात करके दरकिनार कर दिया है जिसके चलते आगामी 1 साल तक होने वाली भर्तियों में ओबीसी के लाखों युवाओं बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा और इसको लेकर अब हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा तो भी युवा उतरेंगे और अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे.