मुंडावर: जब अस्पताल ही बीमार है तो कैसे होगा मरीजों का इलाज, अंतिम सांसे ले रही CHC
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मुंडावर: जब अस्पताल ही बीमार है तो कैसे होगा मरीजों का इलाज, अंतिम सांसे ले रही CHC

Mundawar, Alwar News: प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र आमजन को राहत पहुंचाने के लिए चिरंजीवी योजना से विभिन्न तरह की सेवाएं दिए जाने के दावे किए जाते है, लेकिन अगर अलवर जिले के शाहजहां पुर के सीएचसी सेंटर के बात करे तो यहां का अस्पताल खुद ही इस कदर बीमार है कि कैसे यहां मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाएगा. 

 

मुंडावर: जब अस्पताल ही बीमार है तो कैसे होगा मरीजों का इलाज, अंतिम सांसे ले रही CHC

Mundawar, Alwar News: प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र आमजन को राहत पहुंचाने के लिए चिरंजीवी योजना से विभिन्न तरह की सेवाएं दिए जाने के दावे किए जाते है, लेकिन अगर अलवर जिले के शाहजहां पुर के सीएचसी सेंटर के बात करे तो यहां का अस्पताल खुद ही इस कदर बीमार है कि कैसे यहां मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाएगा. 

जयपुर दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर स्थित शाहजहांपुर कस्बे की सीएससी में आस-पास के लगते करीब दो दर्जन गांव के अलावा शाहजहां पुर कस्बे के ग्रामीणों के साथ ही नीमराणा, घीलोठ और शाहजहांपुर की औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिक जो शाहजहांपुर में रह रहे है को भी चिकित्सा की दृष्टि से यही सीएससी ही एक मात्र सहारा रहता है. 

इस जर्जर भवन में चल रहे इस अस्पताल में न तो पर्याप्त नर्सिंग कर्मी है, न डॉक्टर्स, न एम्बुलेंस है, न जांच सेवाएं, आखिर किस तरह होता होगा यहां इलाज यह बड़ा सवाल है. यहां व्यवस्था के हिसाब से सीएससी के हालात नाजुक बने हुए हैं. सीएससी में प्रतिदिन 350 से अधिक मरीज अपनी बीमारियों का इलाज पाने नियमित रूप से पहुंचते हैं. अस्पताल में कार्यरत 5 चिकित्सकों में दो महिला चिकित्सक लंबे समय से अवकाश पर हैं. वहीं चिकित्सकों के 7 पद स्वीकृत होने के बावजूद 3 चिकित्सकों के भरोसे यह अस्पताल चल रहा है.

यहां अस्पताल में जीएनएम के तीन ही पद स्वीकृत है, जबकि अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या अधिक होने के चलते संभाल पाने में बड़ी परेशानी होती है. मौसमी बीमारियों के प्रकोप के दौरान अस्पताल में मरीजों की संख्या मेले के समान भीड़ के रूप में दिखाई देती हैं, लेकिन चिकित्सकीय व्यवस्था का अभाव होने से मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है. 

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राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को संभाल पाने में चिकित्सा व्यवस्था अधिकतर नाकाम रहती है. दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीजों को कार्यरत चिकित्सा स्टाफ की ओर से बहरोड़ या अलवर के लिए रेफर करता ही देखा जाता है, यहां अस्पताल में बहरोड की ओर से प्रदान की गई एंबुलेंस भी काफी समय से खराब पड़ी है.

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