Inflammatory Bowel Disease: आईबीडी पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों, किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है. आमतौर पर यह 20 से 40 साल की उम्र में लोगों को होती है. डॉक्टर ने इस बीमारी से बचने के कुछ उपाय सुझाए हैं.
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World IBD Day (19 May 2024 ) : इंफ्लेमेटरी बोवेल डिजीज यानी आईबीडी (IBD) आंतों की एक ऐसी बीमारी है जिसे हल्के में लेना जान का जोखिम बढ़ा सकता है. इसकी एक वजह ये भी है कि लोग समय रहते इसकी पहचान नहीं कर पाते. 19 मई को दुनियाभर में विश्व आईबीडी दिवस (World IBD Day) के तौर पर मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके. इस बीमारी को कैसे पहचाना जा सकता है. इससे कैसे बचाव किया जाए.
इस बारे में जब चंडीगढ़ पीजीआई में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की एचओडी प्रोफेसर उषा दत्ता से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ पीजीआई की रिसर्च के अनुसार यह बीमारी भारत में बहुत तेजी से बढ़ रही है. इसका पूरी तरह से इलाज तो फिलहाल संभव नहीं नहीं है, लेकिन समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो इस पर नियंत्रण जरूर किया जा सकता है.
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प्रोफेसर ऊषा दत्ता ने बताया कि इंफ्लेमेटरी बोवेल डिजीज (आईबीडी) इंसान के पाचन तंत्र को ग्रस्त करने वाली दो मुख्य बीमारियां अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन रोग है. लंबे समय तक अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित शख्स की बड़ी आंत में घाव बन जाते हैं. वहीं क्रोहन रोग मुंह से लेकर बड़ी आंत के निचले हिस्से तक इंसान के खाने की नली के किसी भी हिस्से को ग्रसित कर सकती है. इस बीमारी में न सिर्फ आंत की ऊपरी सतह बल्कि पूरी की पूरी आंत खराब हो सकती है. डॉक्टर ने इस बीमारी से बचने के कुछ उपाय सुझाए हैं.
डॉ. ऊषा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अगर एक सप्ताह से अधिक दस्त या खूनी दस्त हों, पेट में दर्द हो तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं. एक सप्ताह तक दस्त किसी इंफेक्शन के कारण हो सकते हैं. दवाई के बाद भी यदि उसमें फर्क न पड़ रहा हो और 2 सप्ताह से अधिक दस्त आ रहे हों तो किसी बड़े अस्पताल में चेकअप जरूर करवाएं।
आईबीडी के लक्षण (IBD Symptoms)
आईबीडी पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों, किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है. आमतौर पर यह 20 से 40 साल की उम्र में लोगों को होती है. इससे प्रभावित लोगों को पेट में दर्द, दस्त के साथ ब्लीडिंग, वजन कम होना, भूख कम लगना, बुखार, जोड़ों में दर्द और थकावट आदि लक्षण दिखाई देते हैं.
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आईबीडी होने की वजह (Causes Of IBD)
ऐसा माना जाता है कि भारतीय खाने में पाश्चात्यकरण के कारण आईबीडी की समस्या बढ़ रही है. यह भी समझा जाता है कि सब्जियां और फल अधिक मात्रा में लेने से इसके जोखिम कम हो जाता है, जबकि प्रोसेस्ड फ़ूड, फास्ट फूड, जंक फूड और नॉनवेज खाने से आईबीडी की चपेट में आ सकते हैं.
अभी तक आईबीडी के इलाज का कोई भी वैज्ञानिक आधार उपलब्ध नहीं है. क्या आईबीडी से ग्रसित लोग दूध पी सकते हैं. दूध पीने से दस्त न हो और यह हजम कर लिया जाए तो दूध पीना चाहिए और इस पर कोई रोक नहीं है.
किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (What things should be kept in mind)
इसके मरीजों को प्रतिदिन व्यायाम, योग या फिर सैर अवश्य करनी चाहिए. आपको अपने खानपान पर ध्यान रखना चाहिए और जहां तक संभव हो ठीक से पका हुआ घर का खाना ही खाएं. साफ पानी पीएं. जब भी भोजन करें तो उसकी मात्रा सीमित रखें. शराब और सिगरेट का सेवन न करें और किसी भी प्रकार के नशे से बचें. अगर लक्षण बढ़ जाए तो तुरंत डॉक्टर से मिले और उनकी सलाह के अनुसार दवाई लें.
इनपुट: विजय राणा