कौन हैं वो 2 लोग जिन्होंने महिला आरक्षण बिल के विरोध में डाला वोट?
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कौन हैं वो 2 लोग जिन्होंने महिला आरक्षण बिल के विरोध में डाला वोट?

Loksabha: संसद की लोकसभा से महिला आरक्षण बिल पास हो गया है. इसके पक्ष में 454 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में सिर्फ 2 वोट ही पड़े हैं. अब ये जान लेना जरूरी है कि आखिर ये दोनों लोग कौन हैं.

कौन हैं वो 2 लोग जिन्होंने महिला आरक्षण बिल के विरोध में डाला वोट?

Woman Reservation Bill: आखिरकार महिला आरक्षण बिल लोकसभा से बुधवार शाम को पास हो गया. महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में 454 वोट पड़े. इसके विरोध में सिर्फ 2 वोट ही पड़े हैं. लोकसभा में ये बिल दो तिहाई बहुमत से पास हो गया है. इसके विरोध में जिन दोनों लोगों ने मतदान किया है वे दोनों AIMIM के सांसद हैं. इनमें से एक असदुद्दीन ओवैसी हैं जबकि दूसरे शख्स उन्हीं की पार्टी के अन्य सांसद सैयद इम्तियाज जमील हैं.

कौन हैं वो 2 लोग

दरअसल, लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में 454 वोट पड़े. जबकि 2 वोट इसके खिलाफ पड़े. लोकसभा में ये बिल दो तिहाई बहुमत से पास हुआ. लोकसभा में पर्ची के जरिए वोटिंग हुई है. ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहदुल मुस्लिमीन के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने पहले ही इस बिल का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि इसमें ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रावधान क्यों नहीं किया गया है. इनका प्रतिनिधित्व संसद में काफी कम है. ओवैसी ने कहा कि देश में सात फिसदी मुस्लिम महिलाएं हैं, लेकिन इस सदन में उनका प्रतिनिधित्व सिर्फ 0.7 फीसदी ही है. 

पहले से ही विरोध में थे ओवैसी
ओवैसी ने यह भी कहा कि मुस्लिम लड़कियों का ड्रॉप आउट 19 फीसदी है, जबकि अन्य समुदाय में यह केवल 12 फीसदी है. वहीं, आधी मुस्लिम महिलाएं अशिक्षित हैं. ओवैसी ने सिलसिलेवार आरोप लगाते हुए कहा कि वे इस बिल का विरोध करते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये मुस्लिम और ओबीसी महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ाना चाहते हैं.

ओवैसी की पार्टी से 2 सांसद
बता दें कि ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहदुल मुस्लिमीन के दो सांसद हैं. एक खुद इस पार्टी के चीफ असदुद्दीन ओवैसी हैं जो कि हैदराबाद से सांसद हैं. जबकि दूसरे सांसद सैयद इम्तियाज जमील हैं जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद से चुनकर आते हैं. फिलहाल इधर लोकसभा में महिला आरक्षण बिल दो तिहाई बहुमत से पास हुआ. लोकसभा में पर्ची के जरिए वोटिंग हुई. अब लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में एक तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी. 

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