चाहें तो मेरा सिर काट दें, लेकिन... प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों से बोलीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारी केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में नाराजगी जाहिर करते हुए टिप्पणी की.

Written by - Manish Pandey | Last Updated : Mar 7, 2023, 09:29 AM IST
  • महंगाई भत्ता (डीए) को लेकर प्रदर्सन
  • पिछली सरकारों पर लगाया आरोप
चाहें तो मेरा सिर काट दें, लेकिन... प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों से बोलीं ममता बनर्जी

नई दिल्मी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार राज्य सरकार के कर्मचारियों को अतिरिक्त महंगाई भत्ता (डीए) नहीं दे पाएगी, भले ही उनका सिर कलम कर दिया जाए. सीएम ममता की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब राज्य  सरकार के कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने बकाया महंगाई भत्ते की मांग को लेकर 10 मार्च को हड़ताल की घोषणा की है.

सीएम ममता बनर्जी ने सोमवार से शुरू हुए विधानसभा के विस्तारित बजट सत्र के दौरान सदन के पटल पर कहा कि "पिछली वाम मोर्चा सरकार ने साल-दर-साल डीए बकाया के भुगतान से इनकार किया था. हमारे सत्ता में आने के बाद हमने डीए भुगतान को कई गुना बढ़ा दिया. आपको और कितना चाहिए? आपको और क्या संतुष्ट करेगा? यदि आप मुझे पसंद नहीं करते हैं, तो आप मेरा सिर काट सकते हैं."

सीएम ममता ने पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिल रहीं वार्षिक छुट्टियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ये केंद्र सरकार या अन्य राज्यों में उनके समकक्षों द्वारा प्राप्त की जाने वाली छुट्टियों से कहीं अधिक हैं. राज्य सरकार के कर्मचारियों ने हर साल औसतन 40 दिनों की छुट्टी का आनंद लिया. त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में वहां के कर्मचारियों को इतनी सुविधाएं नहीं मिलती हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने पेंशन योजना जारी रखी है, जबकि कई राज्य सरकारों ने इसे खत्म कर दिया है. पेंशन के इस भुगतान के लिए सरकारी खजाने से बड़ी रकम जा रही है. आप क्या चाहते हैं? क्या हम डीए का बकाया भुगतान करें और पेंशन योजना को बंद कर दें?

बीजेपी की ममता को सलाह
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि राज्य सरकार को सबसे पहले त्योहारों और मेलों के खातों पर फिजूलखर्ची को नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए और डीए बकाया का भुगतान नहीं करने के लिए इस तरह के बहाने बनाने से पहले राजस्व सृजन पर ध्यान देना चाहिए. आज नहीं तो कल, राज्य सरकार को बकाया डीए का भुगतान करना होगा, क्योंकि अदालत ने सही कहा है कि डीए प्राप्त करना कर्मचारियों का वैध अधिकार है न कि दान.

(आईएएनएस)

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