UP में पहले किशोरी क्लीनिक की हुई शुरूआत, जानिए क्या कुछ है खास
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UP में पहले किशोरी क्लीनिक की हुई शुरूआत, जानिए क्या कुछ है खास

UP News: यूपी के पहले किशोरी क्लीनिक की शुरूआत की गई है. कानपुर में पहली बार किशोरियों के स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए डेडीकेटेड क्लीनिक खोला गया है.

UP में पहले किशोरी क्लीनिक की हुई शुरूआत, जानिए क्या कुछ है खास

कानपुर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में किशोरियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यूपी के पहले किशोरी क्लीनिक की शुरूआत की गई है. दरअसल, यूपी के कानपुर में पहली बार किशोरियों के स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए डेडीकेटेड क्लीनिक खोला गया है. जानकारी के मुताबिक किशोरी क्लीनिक जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में शुरू किया गया है. इसमें किशोरियों की शारीरिक से लेकर मानसिक समस्याओं का समाधान किया जाएगा. आइए आपको बताते हैं क्या कुछ होगा खास.

आपको बता दें कि किशोरियों को काउंसलिंग के जरिए उनके तनाव और पनप रहे अवसाद से छुटकारा दिलाया जाएगा. वहीं, किशोरी क्लीनिक में किशोरियों की एनीमिया की समस्या को दूर करने पर सबसे अधिक जोर रहेगा. इस मामले में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज स्त्री और प्रसूति रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ गुप्ता ने जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किशोरियों में हीमोग्लोबिन की कमी बहुत बड़ी समस्या है.

इसके लिए भारत में 1970 में पहली बार एनीमिया कंट्रोल प्रोग्राम आया था. इसका उद्देश्य आज तक पूरा नहीं हो सका है. किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है. किशोरियों महिलाओं में स्वास्थ्य की जितनी समस्याएं होती हैं. उनमें से 90 फीसद एनीमिया की वजह से हैं. महिलाओं को आयरन की उचित मात्रा नहीं मिल पा रही है.

52 फीसदी महिलाएं एनीमिया का शिकार
दरअसल, ये देखा गया है कि महिलाएं प्रेग्नेंट होती हैं, तो उनमें से 52 फीसदी महिलाएं एनीमिया का शिकार होती हैं. इसका असर उनके बच्चे पर भी पड़ता है. इस क्लीनिक के शुरू होने से पहले विभाग की तरफ से 6 स्कूलों में कैंप लगाकर 1228 किशोरियों का परीक्षण और जांच किया गया. इसमें ये पाया गया कि कॉलेज में पढ़ने वाली अधिकतर किशोरियां एनीमिया का शिकार हैं. उन्हें एनीमिया के बारे में जागरूक किया गया. विभागाध्यक्ष ने कहा कि जल्द ही किशोरी क्लीनिक में कहीं ज्यादा सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी. इसका उद्देश्य किशोरियों में होने वाली समस्याओं का निदान और समाधान के साथ जागरूकता फैलाना भी है.

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